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Hindi News उत्तराखंडभाई को ढूंढने निकला था शवान, हल्द्वानी हिंसा में गोली लगने से घर पहुंचा शव

भाई को ढूंढने निकला था शवान, हल्द्वानी हिंसा में गोली लगने से घर पहुंचा शव

किसी ने अपने परिवार एक मात्र पालन-पोषण करने वाला खो दिया तो किसी ने अपने चहेते बेटे को। हिंसा के 13 दिन बाद मृतकों के परिजनों को भले ही मुआवजा मिला हो लेकिन उनके अपनों की मौत का जख्म ताउम्र रहेगा।

भाई को ढूंढने निकला था शवान, हल्द्वानी हिंसा में गोली लगने से घर पहुंचा शव
Himanshu Kumar Lallहल्द्वानी, हिन्दुस्तानWed, 21 Feb 2024 04:49 PM
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हल्द्वानी के वनभूलपुरा हिंसा वाले दिन कई घरों के चिराग बुझ गए। हिंसा के दिन मरने वाले शवान और 13 फरवरी को अस्पताल में दम तोड़ने वाले मोहम्मद इसरार के परिजनों से ‘हिन्दुस्तान’ की टीम ने बातचीत की तो परिजन फफक पड़े।

किसी ने अपने परिवार एक मात्र पालन-पोषण करने वाला खो दिया तो किसी ने अपने चहेते बेटे को। हिंसा के 13 दिन बाद मृतकों के परिजनों को भले ही मुआवजा मिला हो लेकिन उनके अपनों की मौत का जख्म ताउम्र रहेगा।

क्या पता था मौत इंतजार कर रही है 
बिलाली मस्जिद के पास रहने वाला 28 वर्षीय शवान आठ फरवरी को पिता मो. शफीक के साथ घर के नीचे संचालित जनरल स्टोर पर बैठा था। फोर्स का फ्लैग मार्च देखकर शवान ने पिता को बताया और दुकान बंद करने को कहा। दुकान बंद हुई तो ध्यान दिया कि छोटा भाई शादान घर के बाहर रह गया है।

उसे ढूंढने के लिए गया, लेकिन उसके बाद वापस ही नहीं लौटा। लाइन नंबर आठ में अचानक उसके पैर में गोली लग गई। उसके एक दोस्त ने मदद की और तुरंत लाइन नंबर 17 में क्लीनिक पर लेकर पहुंचा। भाई को फोन कर शवान की हालत के बारे में बताया।

कुछ देर बाद हालत बिगड़ी और जब तक परिवार वाले उस तक पहुंच पाए तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। शवान तीन भाइयों में दूसरे नंबर का था। उसकी मौत के बाद से उसकी मां रेशमा और पिता मोहम्मद शफीक आज भी बेटे को याद कर गमजदा हैं।

इसरार का परिवार अब भाइयों के भरोसे
गफूर बस्ती निवासी फुरकान बताते हैं कि आठ फरवरी की शाम उनका भाई मो. इसरार (53) नमाज पढ़कर अपना छोटा हाथी रेलवे क्रॉसिंग के पास खड़ा करने गया था। इसके बाद घर की तरफ जा रहा था। घर से कुछ ही दूरी पर किसी ने उसके सिर में गोली मार दी।

तुरंत घायल इसरार को बेस फिर निजी अस्पताल और फिर वहां से एसटीएच ले जाया गया। एसटीएच में इलाज के दौरान 13 फरवरी को उसकी मौत हो गई। इसरार के परिवार में उसकी पत्नी और छह बच्चे हैं। उनकी पूरी जिम्मेदारी अब मृतक इसरार के भाई फुरकान और इमरान उठा रहे हैं।

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