sdrf team who scaled mt everest failed to reach mussoorie to assist tourists who were stranded due to snowfall - एवरेस्ट चढ़ने वाली एसडीआरएफ मसूरी के पास सुवाखोली में हांफ गई DA Image
13 नबम्बर, 2019|5:52|IST

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एवरेस्ट चढ़ने वाली एसडीआरएफ मसूरी के पास सुवाखोली में हांफ गई

एसडीआरएफ आपदा प्रबंधन को पूरी तरह तैयार नहीं है। एवरेस्ट फतह करने वाली ये फोर्स मंगलवार रात मसूरी से आगे सुवाखोली तक पहुंचने में ही हांफ गई। रेस्क्यू तो दूर भारी बर्फबारी में फंसे पर्यटकों को निकालने गई एसडीआरएफ की दो टीमें खुद ही रात भर मौके पर नहीं पहुंच पायी। दोनों टीमों को घटनास्थल से पहले ही वापस लौटना पड़ा। इसके पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। सबसे खास कारण रहा बिना पूरी तैयारी के जाना। बताया जा रहा है कि रात एसडीआरएफ की नौ सदस्यीय टीम दो अलग अलग हिस्सों में सुवाखोली के लिए रवाना हुई थी। लेकिन एक टीम मसूरी से कुछ आगे पहुंचने के बाद ही लौट आई। चढ़ाई और भारी बर्फबारी के चलते उनकी गाड़ी फिसल रही थीं। जबकि दूसरी टीम किसी तरह सुबह करीब तीन बजे मौके से कुछ पहले तक पहुंची थी, लेकिन तब तक जनपद पुलिस वहां रेस्क्यू आपरेशन पूरा कर चुकी थी। हां इतना जरूर है कि रास्ते में एक आम आदमी की तरह इन टीमों ने गाड़ियों को धक्का देकर जरूर बर्फ से निकालने में मदद की।  

हैरानी की बात है कि कंट्रोल रूम या जन संपर्क अधिकारी से संपर्क के लिए टीम के पास ना तो सेटेलाइट फोन थे ,ना ही बर्फ हटाने वाले उपकरण।  ना ऐसे वाहन जो बर्फ में आसानी से चल पाते। टीम बिना तैयारियों के ही मौके पर भेज दी गई थी। बुधवार तड़के फिर एक टीम को पूरी तरह से उपकरणों से लैस कर वहां भेजा गया लेकिन तब तक वहां कुछ सब सामान्य हो चुका था।

 

एसपी सिटी श्वेता चौबे पैदल मौके पर पहुंचीं 
हैरानी की बात है कि जिस जगह एसपी सिटी श्वेता चौबे, इंस्पेक्टर मसूरी और अन्य पुलिसकर्मी देर रात पैदल ही पहुंचे गए वहां पहुंचने में एसडीआरएफ की विशेषज्ञ टीमें हार गईं। जबकि एसडीआरएफ को आपदा प्रबंधन की विशेष ट्रेनिंग दी जाती है। विशेष उपकरण दिए जाते हैं ताकि ये किसी भी तरह की मुसीबत में लोगों को सुरक्षित निकाल सकें।

 

हमने बर्फबारी में दुर्घटनाओं की आंशका के चलते एक टीम पहले ही कोल्हूखेत में तैनात की थी। इसे और एक अन्य टीम को सुवाखोली भेजा गया था। 
हम रिपीटर और सेट्स के जरिए टीम के संपर्क में थे। जहां तक सेटेलाइट फोन के इस्तेमाल की बात है तो ये गोपनीय है इसे बताया नहीं जा सकता।
तृप्ति भट्ट, कमांडेंट एसडीआरएफ देहरादून

 

सेटेलाइट फोन का नहीं किया गया कोई उपयोग
केदारनाथ आपदा में भारी नरसंहार का सबसे बड़ा कारण वहां सबसे पहले कम्यूनिकेशन नेटवर्क तबाह होना था। इससे सबक लेकर एसडीआरएफ में इस बात का खास ख्याल रखा गया था। इसके लिए आठ सेटेलाइट फोन और करीब 350 रेडियो सेट्स इस टीम को दिए गए हैं ताकि दुर्गम से दुर्गम स्थान पर भी संपर्क बना रहे। लेकिन सुवाखोली जाने वाली टीमों के पास सेटेलाइट फोन नहीं थे।

 

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