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एसडीआरएफ ‘सेटेलाइट तकनीक’ को बनाएगी हथियार,जानिए कैसे

आपदा आने पर स्टेट डिजास्टर रिलिफ फोर्स यानी एसडीआरएफ आपदा आने पर सैटेलाइट तकनीक के जरिये बचाव अभियान चला पायेगी। सैटेलाइट तकनीक से न केवल एसडीआरएफ टीम को सटीक लोकेशन का पता चल पायेगा, वहीं उच्च हिमालय क्षेत्रों में कहां कहां एवलांच और कृत्रिम झील बन रही है, इसकी भी जानकारी समय पर मिल जाया करेगी। सोमवार को उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) में एसडीआरएफ टीम को वैज्ञानिकों ने विशेष प्रशिक्षण दिया।  प्रशिक्षण में यूसैक के निदेशक प्रो एमपीएस बिष्ट ने टीम को विभिन्न सैटेलाइट तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने चार धाम यात्रा के दौरान कैसे कोई अप्रिय स्थिति होने पर सैटेलाइट मैपिंग के जरिये आपदा ग्रस्त इलाके तक पहुंचे, इसकी विशेष प्रशिक्षण दिया। इसके साथ ही बद्रीनाथ एवं केदारनाथ यात्रा मार्ग पर पड़ने वाले लैंडस्लाइड जोन एवं संभावित एवलांच प्रभावित क्षेत्रों की जानकारी सैटेलाइट मानचित्रों के आधार पर दी गयी।

उन्होंने बताया कि दोनों धामों में अवस्थित ग्लेशियर के पिघलने की स्थिति में किन-किन जगहों पर लैंडस्लाइड की स्थिति उत्पन्न हो सकती है उन जगहों पर विशेष निगरानी रखने से संभावित आपदा से त्वरित बचाव कर यात्रियों एवं स्थानीय निवासियों को सुरक्षित रखा जा सकता है। सिस्टम मैनेजर हेमंत बिष्ट द्वारा जीपीएस आधारित ऑनलाईन और ऑफलाईन एप्स की जानकारी दी गई। उन्होंने एसडीआरएफ की टीम को जीपीएस प्वाइंट को कंम्यूटर सिस्टम के सॉफ्टवेयर में डाउनलोड करना एवं उसको मानचित्र में प्रदर्षित करने का प्रशिक्षण दिया। यू-सैक के वैज्ञानिक शशांक लिंगवाल ने एसडीआरएफ की टीम को जीपीएस की हैंड्स ऑन ट्रेनिंग दी। प्रशिक्षण टीम ने इंस्पेक्टर संजय उप्रेती, सब इंस्पेक्टर नीरज शर्मा, कांस्टेबल नीतेश केस्टवाल, राजेश कुमार, प्रीति मल, महेश चंद्र, लक्ष्मण सिंह बिष्ट, यू-सैक के जन संपर्क अधिकारी सुधाकर भट्ट आदि उपस्थित थे। 


 

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  • Web Title:satellite technique is to be used by sdrf in disaster prone areas in uttarakhand