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Hindi News उत्तराखंडजिस रैट-होल माइनिंग ने बचाई मजदूरों की जान, NGT ने उसे किया है बैन; NDRF अधिकारी ने इसपर क्या कहा

जिस रैट-होल माइनिंग ने बचाई मजदूरों की जान, NGT ने उसे किया है बैन; NDRF अधिकारी ने इसपर क्या कहा

उत्तरकाशी की टनल में फंसे 41 मजदूरों को 17वें दिन रैट होल माइनिंग के जरिए बाहर निकाला गया। रैट होल माइनिंग को एनजीटी ने बैन किया हुआ है। इसपर एनडीआरएफ अधिकारी ने जवाब दिया है।

जिस रैट-होल माइनिंग ने बचाई मजदूरों की जान, NGT ने उसे किया है बैन; NDRF अधिकारी ने इसपर क्या कहा
Sneha Baluniलाइव हिन्दुस्तान,उत्तरकाशीWed, 29 Nov 2023 11:06 AM
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उत्तरकाशी की सिलक्यारा टनल में पिछले 17 दिनों से फंसे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए जिस रैट-होल माइनिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया उसे 2014 में गैरकानूनी घोषित कर दिया गया। रात करीब आठ बजे शुरू हुए ऑपरेशन के लगभग एक घंटे में सभी श्रमिकों को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया गया। मीडिया से बातचीत के दौरान, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य, लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने रैट-होल खनन तकनीक के उपयोग को लेकर पूछे सवाल का जवाब दिया, जिसे राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) द्वारा गैरकानूनी घोषित किया गया है। उन्होंने कहा, 'रैट-होन माइनिंग अवैध हो सकती है लेकिन रैट होल माइनर्स की प्रतिभा और अनुभव का उपयोग किया जा रहा है।'

लेफ्टिनेंट जनरल हसनैन की बात से सहमति जताते हुए एक और अधिकारी ने कहा, 'नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 2014 में कोयला खनन के लिए इस तकनीक पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन यह एक ऐसा कौशल है जिसका उपयोग किया जाता है। निर्माण स्थलों पर, श्रमिकों के लिए स्थिति हमेशा आरामदायक नहीं होती है। न केवल रैट माइन बल्कि गैस-कटिंग के कार्यों में शामिल लोग, यह उनके लिए भी आसान नहीं था। वे एक घंटे तक काम करते थे और फिर बाहर आ जाते थे। यह एक विशेष स्थिति है जहां हमें लोगों की जान बचानी है। वे तकनीशियन हैं और हम श्रमिकों को बचाने के लिए उनके कौशल और उनकी क्षमताओं का उपयोग कर रहे हैं।'

भारी मशीनों के खराब होने और रेस्क्यू ऑपरेशन में कोई सफलता नहीं मिलने के बाद रैट-होल माइनिंग का इस्तेमाल किया गया। चुनौतीपूर्ण अभियान के अंतिम चरण में 25 टन की ऑगर मशीन के विफल हो जाने के बाद फंसे हुए श्रमिकों को बचाने के लिए रैट-होल खनन मंगलवार को शुरू हुई। मंगलवार को मलबे को भेदकर भीतर फंसे लोगों तक पहुंचे 800 एमएम के पाइप से सभी को बाहर निकाल लिया गया। शाम 7.22 बजे पाइप टनल से मजदूरों को बाहर निकालना शुरू हुआ जो कि रात सवा आठ बजे तक चला।

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