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उत्तरकाशी हादसा: पौन इंच की पाइप 40 के लिए लाइफलाइन, टनल में ऑक्सीजन से ऐसे मिल रहा जीवनदान

पाइप ही एक माध्यम हैं जिसके जरिए वो टनल के बाहर रेस्क्यू टीम और अपने परिजनों से बातचीत कर पा रहे हैं। और जीवित रहने के जरूरी आक्सीजन के साथ खाद्य सामग्री भी इसी पाइप के जरिए मिल रही है।

उत्तरकाशी हादसा: पौन इंच की पाइप 40 के लिए लाइफलाइन, टनल में ऑक्सीजन से ऐसे मिल रहा जीवनदान
Himanshu Kumar Lallउत्तरकाशी, हिन्दुस्तानTue, 14 Nov 2023 07:46 PM
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उत्तरकाशी टनल हादसे में फंसे लोगों को सकुशल बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान आज मंगलवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। टनल के अंदर फंसे 40 लोगों के लिए पौन इंच की पाइप किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रही है।

पौन इंच की पाइप से टनल में फंसे लोगों को ऑक्सीजन, दवाइयां सहित खाने-पीने की सामाग्री उपलब्ध करवाई जा रही है। सिलक्यारा टनल का एक लोहे का पाइप वहां फंसे मजदूरों के लिए लाइफ लाइन बन चुका है।

यही एक माध्यम हैं जिसके जरिए वो टनल के बाहर रेस्क्यू टीम और अपने परिजनों से बातचीत कर पा रहे हैं। और जीवित रहने के जरूरी आक्सीजन के साथ खाद्य सामग्री भी इसी पाइप के जरिए मिल रही है।

टनल में फंसे मजदूरों की जीवन की सुरक्षा के लिए सबसे जरूरी ऑक्सीजन थी। आक्सीजन कम होने या खत्म हो जाने का मतलब था अनहोनी। तब काम आया टनल में लगा पौने से एक इंच का पाइप। इस पाइप की मदद से आक्सीजन का प्रवाह करना सामान्य हो पाया।

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रेस्क्यू टीम के सामने दूसरी बड़ी समस्या मजदूरों के साथ संवाद कायम करने की थी। सिग्नल न होने और बैटरियां डाउन हो जाने की वजह से वॉकी-टॉकी काम नहीं कर पा रहे थे।

तब निर्माण कंपनी के एक कर्मचारी ने परंपरागत तरीके की याद दिलाते हुए पाइप के जरिए ही बात करने की सलाह दी और वो काम भी कर गई। अब पाइप के जरिए ही मजदूर रेस्क्यू टीम के साथ लगातार बातचीत कर पा रहे हैं।

कंप्रेशर से भेजे जा रहे मखाने, चने, किशमिश
आक्सीजन को भेजना तो आसान था लेकिन रेस्क्यू टीम के सामने बडी चुनौती मजदूरों तो खाद्य पदार्थ भेजने की थी। मलबे की वजह से सारे रास्ते बंद थे। माध्यम केवल एक पाइप ही था। फिर कंप्रेशर के जरिए हल्के वजन के खाद्य पदार्थों को भेजने में भी पाइप ही जरिया बना।

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पाइप के बाहरी सिरे से रेस्क्यू टीम थोड़ी थोड़ी मात्रा में चने, मखाने, किशमिश आदि डालते और कंप्रेशर के जरिए उन्हें तेजी से दूसरी तरफ धकेला जाता। दूसरी तरफ किसी कपड़े की मदद से वो उस खाद्य सामग्री को इकट्ठा कर लेते।

 

भूवैज्ञानिकों ने टनल हादसे की वजहों की जांच शुरू की
भू-वैज्ञानिकों ने सिलक्यारा में टनल में हुए भूस्खलन की जांच शुरू कर दी। भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र (यूएसडीएमए) के निदेशक डॉ. शांतनु सरकार की अध्यक्षता में गठित अध्ययन कमेटी ने टनल के भीतर और टनल के ऊपर पहाड़ी का सर्वे किया।

मंगलवार सुबह कमेटी सदस्यों ने मौके पर जाकर बारीकी से भूस्खलन की वजह की पड़ताल की और सैंपल भी एकत्र किए। मालूम हो किबीते रोज आपदा प्रबंधन सचिव डॉ.रंजीत कुमार सिन्हा ने इस अध्ययन कमेटी का गठन किया था।

सूत्रों के अनुसार भूवैज्ञानिक यह जानने का प्रयास कर रहे है कि निर्माण से पहले किए गए सर्वेक्षणों के बावजूद भूस्खलन की स्थिति क्यों पैदा हुई? साथ ही इस क्षेत्र में आगे भविष्य के लिए क्या खतरे हो सकते हैं।

कमेटी सरकार को सभी पहलुओं का अध्ययन करने के बाद भूस्खलन के कारण बताएगी और सुरक्षात्मक उपायों के सुझाव भी देगी। कमेटी में वाडिया इंस्टिट्यूट ऑफ हिमालय जियोलॉजी के वैज्ञानिक डॉ. खइंग शिंग ल्युरई, जीएसआई के वैज्ञानिक सुनील कुमार यादव, वरिष्ठ वैज्ञानिक- सीबीआरआई कौशिल पंडित, उपनिदेशक भूतत्व एवं खनिजकर्म विभाग- जी.डी प्रसाद और भूवैज्ञानिक- यूएसडीएमए तनड्रिला सरकार शामिल हैं।

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