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बद्रीनाथ मंदिर के कपाट बंद करने की प्रक्रिया शुरू, 17 साल बाद दुर्लभ संयोग

उत्तराखण्ड के चारधाम में से एक बद्रीनाथ के कपाट बंद होने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सबसे पहले आज गणेश मंदिर के कपाट बंद होंगे, लेकिन इस बार बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के मौके पर 17 साल बाद दुर्लभ संयोग बन रहा है। 

हिन्दुओं के धाम भगवान बद्री विशाल के मंदिर के कपाट बंद होने से पूर्व पंच पूजाओं का शुभांरभ हो गया है। बद्रीनाथ धाम के कपाट 19 नवंबर को देर शाम 7 बजकर 28 मिनट पर बंद किए जाएंगे। इस कार्य के लिए प्रक्रिया आज से शुरू हो गई है। आज मंदिर परिसर में स्थित गणेश मंदिर में पूजा के बाद मंदिर के कपाट बंद होंगे। भगवान नारायण के कपाट बंद होने से पूर्व आयोजित होने वाली पंच पूजाओं की शुरुआत हो गयी है।

भगवान बदरी शाल के कपाट 19 नवम्बर को शाम 7 बजकर 28 मिनट पर बंद होने हैं। मगर कपाट बंद होने की प्रक्रिया 15 नवम्बर बुधवार से शुरू हो गयी है। भगवान के कपाट बंद होने से पूर्व प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में भक्त भगवान के दर्शन के लिए देश-विदेश के विभिन्न कोनों से पहुंच रहे हैं।  इसके लिए तय मुहूर्त और तिथि 19 नवम्बर तय की गई है। कपाट बंद होने से पहले कड़ाके की सर्दी के बावजूद भी भक्तों का तांता भगवान के दर्शन के लिए लगा है। इस साल अब तक 8 लाख 70 हजार 874 तीर्थ यात्री भगवान बदरीनाथ के दर्शन कर चुके हैं। 

यह है कपाट बंद होने की प्रक्रिया 

बदरीनाथ मंदिर के धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल ने बताया कि कपाट बंद होने की प्रक्रिया शुरू हो गयी है। पहले दिन भगवान गणेश के कपाट बंद होंगे। 16 को आदि केदारेश्वर के कपाट बंद होंगे। 17 को खड़क पुस्तक बंद होगी। 18 को लक्ष्मी जी को न्यौता दिया जाएगा। पूजन होगा। लक्ष्मी कडाई का निर्वहन होगा।
19 नवम्बर को प्रातः काल से ही भगवान बदरीविशाल के मंदिर का फूल शृंगार होगा। इस दिन मंदिर रावल स्त्री जी का वेश धारण कर लक्ष्मी को बदरीनाथ के मंदिर में विराजेंगे। जिसके 7 बजकर 28 मिनट पर कपाट बंद होंगे।

17 साल पहले आया था यही संयोग 

दशहरे के मौके पर बदरी-केदार समिति ने इस बार बद्रीनाथ कपाट बंद होने का जो समय तय किया गया है उसमें बेहद खास बात है। 17 वर्ष बाद कपाट देर शाम 7 बजकर 28 मिनट पर बंद होंगे। इससे पहले वर्ष 1999 में भी देर शाम 7 बजे कपाट बंद हुए थे।

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  • Web Title:Process started for shutting the door of Badrinath temple
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