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27 मई, 2020|5:09|IST

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कोरोना लॉकडाउन-4.0: निजी ऑपरेटरों ने बस संचालन से साफ किया इनकार,जानें वजह 

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लॉकडाउन-4 में छूट के बावजूद निजी ऑपरेटरों ने बस संचालन से साफ इनकार कर दिया है। इनका कहना है कि 50 फीसदी सवारी में चलने से चालक-परिचालकों का वेतन तो दूर डीजल का खर्च तक नहीं निकलेगा।

इस मामले पर उत्तराखंड परिवहन महासंघ भी उनके साथ आ गया है। ऐसे में निजी बस सेवाओं का अभी शुरू हो पाना काफी मुश्किल लग रहा है। हालांकि, महासंघ सरकार द्वारा मौजूदा किराए में डेढ़ गुना तक की वृद्धि पर संचालन शुरू करने विचार करने की बात कह रहा है। 

दरअसल, लॉकडाउन के बाद से ही सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह से बंद हैं। इससे सरकारी और निजी संचालकों को भारी नुकसान हुआ है। लॉकडाउन के चौथे चरण में सरकार ने सार्वजनिक परिवहन को 50 फीसदी सवारी के साथ राज्य में संचालन की इजाजत दी है।

लेकिन, बंदी की मार झेल रहे वाहन संचालक 50 फीसदी सवारी में घाटे को झेलने की स्थिति नहीं है। हल्द्वानी में ऑटो रिक्शा चालक गुरुवार को संचालन में नुकसान देखते हाथ पीछे खींच चुके हैं।

तो अब बसों की सेवा देने वाली कुमाऊं मोटर ऑनर्स यूनियन, हल्द्वानी-रामनगर बस यूनियन और बाजपुर-काशीपर बस यूनियन ने संचालन से इंकार कर दिया है। ऐसे में जनता को भी राहत मिलने की उम्मीद खत्म हो गई है। 

 
बसों की आयु सीमा मिले दो साल की छूट : 
निजी बस ऑपरेटर ने सरकार से किराए में इजाफा करने के साथ ही वाहन की आयु सीमा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। मोटर मालिकों का कहना है कि बस के लिए संचालन की आयु 15 साल निर्धारित की गई है। कहा कोरोना के चलते बंदी के बीच दो साल पीछे चले गए हैं। ऐसे में वाहन आयु में दो साल की छूट देते हुए इसे 17 साल किया जाए। 

 

चालक- परिचालकों और स्टाफ पर संकट :
दो महीने से बंद संचालन के बीच बसों के चालक और परिचालक बेरोजगार हो गए हैं। तो वहीं केमू के पास भी अपने नियमित स्टाफ को वेतन देने के लाले पड़ गए हैं। ऐसे में बस संचालन शुरू न होने से उनके सामने आर्थिक संकट और गहरा सकता है। 

 

 

सरकार ने 50 फीसदी सवारी का नियम तो बना दिया है, लेकिन ऐसे में बस का संचालन कैसे करें। पहले ही औसत बड़ी मुश्किल से आता था और अब ऐसी स्थिति में छोटे-छोटे निकालना मुश्किल होगा। इसलिए फिलहाल बस संचालन न करने पर राय बनी है।
सुरेश सिंह डसीला, चेयरमैन केमू एवं महासचिव परिवहन महासंघ
 
 
आधी सवारी लेकर अगर चलते हैं तो नुकसान होगा। डीजल का खर्च निकलना तक संभव नहीं है। ऐसे में हमारे लिए बस संचालन न करना ही उचित है।
अभय क्वीरा, अध्यक्ष, हल्द्वानी-रामनगर बस यूनियन
 
बस संचालन में आधी सवारी के कारण होने वाला नुकसान सबसे बड़ी बाधा है। सरकार यदि कुछ फीसदी किराए बढ़ाने पर सहमति देती है तो सोचा जा सकता है। हालांकि, प्रवासियों को पहुंचाने में पूरी मदद करेंगे।
एलएस कार्की, सचिव, बाजपुर-काशीपुर बस यूनियन
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  • Web Title:private operators refuse to run buses in kumaon division districts as covid 19 cases rise amid lockdwon 4 due to corona virus pandemic in uttarakhand