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13 अप्रैल, 2021|7:23|IST

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PM मोदी ने 'मन की बात' में क्यों की उत्तराखंड के जगदीश की तारीफ? उनकी कहानी जान आप भी करेंगे सलाम

कहते हैं कि जब जिद जुनून में बदल जाए तो उसके सार्थक परिणाम जरूर मिलते हैं। ऐसी ही एक मिसाल उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में देखने को मिली है। बागेश्वर निवासी जगदीश कुनियाल ने अपने भगीरथ प्रयासों से गांव में हरियाली ला दी है। कई साल पहले सूख चुके स्थानीय गदेरे को पुनः रिचार्ज किया है। कई सालों की अर्थक प्रयासों व मेहनत की बदौलत उनके आसपास के गांवों में पेयजल संकट को दूर कर दिया है। यहीं नहीं, उनकी मेहनत की वजह से सिंचाई की समस्या को भी दूर किया है।

गौरतलब है कि प्रदेश पर्वतीय जिलों में पीने के पानी की समस्या हमेशा से बनी रही है। गर्मियों के दिनों में गांवों में पानी की समस्या बहुत ही ज्यादा विकराल रूप ले लेती है। ग्रामीण महिलाओं को कई-कई  किलोमीटर चलकर पीने का पानी घर लाना होता है। पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए सरकारी की ओर से कई पंपिम योजनाएं भी संचालित की जा रही हैं लेकिन प्रदेश में अब भी कई गांवों में पीने के पानी का संकट बरकरार है।  ऐसे में कुनियाल का प्रयास यकीनन सराहनीय कदम है। ग्रामीणों को अब अपने गांव में ही स्वच्छ पीने का पानी मिल सकेगा तो दूसरी ओर खेती के लिए भी प्रयाप्त पानी से फसल अच्छी हो सकेगी। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज रविवार को अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी उनके प्रयासों की सराहना की है। उनकी सक्सेस स्टोरी का विशेष जिक्र किया है। मोदी ने महान कार्य के लिए कुनियाल को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनके प्रयासों से विभिन्न गांवों में पानी की समस्या दूर हो गई है। उन्हाेंने कहा कि ऐसे में खाली हो रहे गांवों में ग्रामीण दोबारा आकर बसने लगेंगे। यहीं नहीं, उनके प्रयासों से अन्य क्षेत्र के ग्रामीणों को भी प्रेरणा मिलेगी। 

आधुनिकता की अंधी दौड़ और भौतिक सुख साधनों को पाने की लालसा में लोग पर्यावरण की लगातार अनदेखी कर रहे हैं। कोई भी पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। ऐसे समय में भी कुछ लोग हैं, जो पर्यावरण की रक्षा के लिए समर्पण भाव से काम कर रहे हैं। इनमें से एक नाम है विकास खंड के सिरकोट गांव निवासी जगदीश कुनियाल का। जो पिछले 40 साल पौधरोपण कर पर्यावरण और जल संरक्षण के लिए काम कर रहे हैं। 57 वर्षीय कुनियाल ने 18 साल की उम्र में अपने गांव की बंजर जमीन पर पौधरोपण का कार्य शुरू किया था। जिसके बाद से यह सिलसिला अनवरत चलता रहा।  पिछले 40 सालों में वह विभिन्न प्रजातियों के 25 हजार से अधिक पौधे रोपकर उनका संरक्षण कर रहे हैं।

किशोरावस्था से शुरू हुआ उनका प्रकृति प्रेम अब भी जारी है। पर्यावरण संरक्षण के अलावा पौधों को उन्होंने अपनी आय का साधन भी बनाया है। उन्होंने अपनी 800 नाली जमीन पर चाय का बागान तैयार किया है। जिसके जरिए उनकी आजीविका चलती है। वहीं बाकी बची हुई जमीन पर वह साग-सब्जी सहित अन्य जड़ी-बूटी वाले पौधे उगा रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता और क्षेत्र के पर्यावरण प्रेमी बसंत बल्लभ जोशी ने बताया कि कुनियाल का प्रकृति प्रेम अनूठा है। वह बिना किसी शोर-शराबे के पर्यावरण की रक्षा कर रहे हैं। दिखावों से दूर रहकर उन्होंने प्रकृति की रक्षा के लिए सराहनीय कार्य किया है। जिसको देखकर क्षेत्र के लोग भी प्रेरित हो रहे हैं। 

सूखे जल स्रोतों को मिला नवजीवन
बागेश्वर। कुनियाल के बसाए जंगल से क्षेत्र में सूख रहे प्राकृतिक जल स्रोतों को नया जीवन मिल रहा है। गांव के करीब आधा दर्जन छोटे-बड़े जलस्रोतों का पानी लगातार कम होता जा रहा था। जिसे देखकर उन्होंने अपने जंगल में बांज, बुरांश, उतीस सहित कई चैड़ी पत्तीदार पौधे रोपे। पौधे बढ़ते गए तो स्रोतों में पानी की मात्रा भी बढ़ने लगी। वर्तमान में गांव के सभी जल स्रोतों में भरपूर पानी है। जिसका उपयोग लोग पीने के अलावा खेती के काम में भी कर रहे हैं।

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  • Web Title:prime minister narendra modi pm modi mann ki baat talks about bageshwar jagdish kuniyal success story about reviving gadhera spring