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पीएम मोदी के वेड इन उत्तराखंड स्लोगन के बाद प्लान, ओंकारेश्वर मंदिर में शुरू होगी वेडिंग डेस्टिनेशन

एक ओर ऊखीमठ ओंकारेश्वर मंदिर में विवाह के लिए बुनियादी सुविधाएं जुटाई जा रही हैं वहीं कोठा भवन के 4.70 करोड़ के प्रथम फेज के काम शुरू हो गए हैं। ओंकारेश्वर मंदिर में वेडिंग डेस्टिनेशन होगी ।

पीएम मोदी के वेड इन उत्तराखंड स्लोगन के बाद प्लान, ओंकारेश्वर मंदिर में शुरू होगी वेडिंग डेस्टिनेशन
Himanshu Kumar Lallरुद्रप्रयाग।  बद्री नौटियालSun, 04 Feb 2024 05:00 PM
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पीएम नरेंद्र मोदी ने वेड इन उत्तराखंड का नारा दिया था। इसके बाद उत्तराखंड में वेडिंग डेस्टिनेशन के लिए प्लान बना है। पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में उषा-अनिरुद्ध विवाह मंडप में पहली बार पहला पंजीकृत विवाह होगा। हालांकि इससे पहले भी यहां लोगों ने विवाह किए होंगे, किंतु इन विवाहों का कोई रिकार्ड नहीं है।

अब, त्रियुगीनारायण की तर्ज पर यहां विवाह कराने की तैयारियां हो रही हैं। दिल्ली-दून के दो परिवारों ने शादी को आवेदन किए हैं। पीएम के सुझावों पर सीएम धामी उत्तराखंड में वेडिंग डेस्टिनेशन को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री से वार्ता के बाद बीकेटीसी अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने इस काम के लिए विशेष प्रयास शुरू कर दिए हैं।

एक ओर ऊखीमठ ओंकारेश्वर मंदिर में विवाह के लिए बुनियादी सुविधाएं जुटाई जा रही हैं वहीं कोठा भवन के 4.70 करोड़ के प्रथम फेज के काम शुरू हो गए हैं। बीकेटीसी के अनुसार 18 अप्रैल 2024 को ऊखीमठ ओंकारेश्वर मंदिर में दिल्ली के एक परिवार द्वारा विवाह करने का आवेदन किया गया है। जबकि दून के एक परिवार ने भी विवाह के लिए आवेदन किया है।

हालांकि उन्होंने अभी इसकी तिथि नहीं बताई है। बीकेटीसी के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने बताया कि उषा अनिरुद्ध के विवाह स्थल का सौन्दर्यीकरण करने के साथ ही यहां विभिन्न सुविधाएं जुटाई जाएंगी ताकि त्रियुगीनारायण की तर्ज पर यहां भी वेडिंग डेस्टिनेश्न को बढ़ावा मिल सके।

बीकेटीसी शांतिकुंज की नियमावली का अध्ययन कर विवाह के लिए अपनी नियमावली तैयार कर रही है। कार्याधिकारी आरसी तिवारी ने बताया कि बीकेटीसी के पास विवाह के लिए दो आवेदन आए हैं। उक्त परिवारों द्वारा फाइनल सूचना देने के बाद विवाह का पंजीकरण करेंगे।

यह है मान्यता
पौराणिक मान्यता के अनुसार शोणितपुर नगरी के असुरराज बाणासुर की बेटी उषा का विवाह श्रीकृष्ण के पोते अनिरुद्ध के साथ ऊखीमठ में ही हुआ था। उषा की शादी अनिरुद्ध से होने के बाद से इस स्थान को उषामठ कहा जाने लगा और बाद में यह ऊखीमठ के नाम से पहचाना जाने लगा। यहां आज भी उषा-अनिरुद्ध विवाह मंडप मौजूद है।
 

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