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अंधेरगर्दी : दून अस्पताल में जाचें ठप, ऑपरेशन बंद

उत्तराखंड के सबसे बड़े दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में अव्यवस्थाओं का अंबार है। मरीज और तीमारदार बेहाल हैं। सीटी स्कैन और ईको मशीन खराब पड़ी है। सामान की कमी के चलते पैथोलॉजी की कई जांचें ठप हैं। ऑटोक्लेव मशीन खराब होने से ऑपरेशन प्रभावित हो रहे हैं।  अव्यवस्थाओं के चलते मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया हैं। निजी लैबों में जांच कराने पर उनकी जेब ढीली हो रही है। इतना सब होने पर भी कॉलेज प्रबंधन ठोस कदम नहीं उठा रहा है।

समस्या 1
सीटी स्कैन मशीन खराब, बैरंग लौट रहे मरीज 

अस्पताल के एमआरआई सेंटर में ढाई महीने से सीटी स्कैन मशीन ठप है। इसे न तो ठीक कराया जा रहा है और न ही नई मशीन खरीदी जा रही है। दून अस्पताल में सीटी स्कैन जांच 1500 से 2000 रुपये तक की होती है, लेकिन निजी लैबों में इसके लिए ढाई से छह हजार रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं। एमआरआई सेंटर के प्रभारी महेंद्र भंडारी के मुताबिक, दून अस्पताल में रोजाना करीब 30 से 40 मरीजों के सिटी स्कैन होते हैं। मशीन खराब होने की वजह से मरीजों को डेट देनी बंद है। 

समस्या 2
दिल की जांच की मशीन 15 दिन से खराब पड़ी

दून अस्पताल में दिल की जांच की ईको मशीन 15 दिन से खराब है। इस वजह से मरीजों जांच नहीं हो पा रही है। अस्पताल में कई सालों से कॉर्डियोलॉजिस्ट भी नहीं हैं। विशेष ट्रेनिंग करने वाले फिजीशियन डा. साजिद उमर और डा. विजय भंडारी ही ईको जांच कर दिल के मरीजों का इलाज करते हैं। बताया जा रहा है कि ईको जांच मशीन 20 साल पुरानी है, जो आए दिन खराब ही रहती है। सितंबर माह में ही मशीन को 2 लाख 75 हजार रुपये लगाकर ठीक कराया गया था। यहां ईको जांच 348 रुपये में होती है। दस मरीजों की रोजाना जांच होती हैं। 

समस्या 3 
सामान खत्म होने से पैथोलॉजी की जांचें बंद 

दून अस्पताल की पैथोलॉजी लैब में सामान खत्म हो गया है। इस कारण बायोकैमेस्ट्री की थायराइड, लीवर, किडनी, हार्ट और माइक्रोबॉयोजी की एचसीवी, हेपेटाइटिस सी, बी, सीआरपी, ब्लड कल्चर, विडाल, टाइफी डॉट आदि जांंचें बुधवार से बंंद हैं। पैथोलॉजी लैब की ओर से कई बार प्रस्ताव भेजे जाने के बाद भी सामान की खरीद नहीं की गई है। अस्पताल में 50 रुपये से लेकर 300 रुपये तक की खून की तमाम जांचें हो जाती हैं, लेकिन यहां जांच नहीं होने की वजह से मरीजों को 500 से लेकर 2500 रुपये में जांच करानी पड़ रही है।

समस्या 4
केवल इमरजेंसी ऑपरेशन किए जा रहे 
दून अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर में तीनों ऑटोक्लेव मशीनें खराब हो गई हैं। इस वजह से ऑपरेशन बंद हो गये हैं। केवल इमरजेंसी ऑपरेशन ही किए जा रहे हैं। 
दून अस्पताल की ओटी में रोजाना आर्थो, ईएनटी, न्यूरो और जनरल सर्जरी के करीब 20 ऑपरेशन होते हैं। ओटी में तीन ऑटोक्लेव मशीनें (ऑपरेशन उपकरणों की सफाई वाली मशीन) हैं, जिनमें से दो कई दिनों से खराब पड़ी थी। बुधवार को तीसरी मशीन भी खराब हो गई। इससे रूटीन के सारे ऑपरेशन ठप हो गए। ऑपरेशन कराने आई पार्वती, ऋषभ, नितिन, संजय आदि मरीजों को ऑपरेशन नहीं होने से अभी और इंतजार करना पड़ेगा। वहीं, इमरजेंसी ऑपरेशन जैसे-तैसे किए जा रहे हैं। बुधवार और गुरुवार को तीन इमरजेंसी ऑपरेशन ही हो पाए। अस्पताल की ओटी में ऑटोक्लेव मशीन 12 से 14 साल पुरानी होने के कारण कई बार खराब हो जाती हैं। प्राचार्य एवं एमएस खुद बार-बार मशीन के खराब होने पर सवाल उठा चुके हैं। बहरहाल, अस्पताल के डिप्टी एमएस डा. एनएस खत्री का कहना है कि मशीन को ठीक कराया जा रहा है। आने वाले एक-दो दिन में व्यवस्था दुरुस्त कर ली जाएंगी। इमरजेंसी ऑपरेशन कराए जा रहे हैं। 
 
समस्या 5
एमआरआई जांच तीन घंटे तक ठप 
दून अस्पताल में एमआरआई सेंटर में वोल्टेज स्टेबलाइजर में तकनीकी खराबी के चलते एमआरआई जांच तीन घंटे तक ठप रही। गुरुवार को रोजाना की भांति एमआरआई किए जा रहे थे। सुबह 10 बजे तक करीब 10 मरीजों के एमआरआई किए गए, तभी अचानक बिजली सप्लाई जाने से मशीन बंद हो गई। एमआरआई प्रभारी ने इसकी सूचना डिप्टी एमएस डा. एनएस खत्री को दी। उन्होंने तकनीशियन को भेजकर बिजली जाने का पता कराया। इस पर वोल्टेज स्टेबलाइजर में खराबी सामने आई। इसे ठीक होने में करीब तीन घंटे लगे। दोपहर एक बजे से जांच शुरू हो सकी। इसके पर मरीजों को राहत मिली। 
सिर में गंभीर चोट वाले किए जा रहे रेफर
हादसों में सिर में गंभीर चोट लगने वाले घायलों को सीटी स्कैन मशीन बंद होने के चलते इमरजेंसी से ही हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है। इससे गरीब मरीजों को ज्यादा आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इमरजेंसी से रोजाना ऐसे 5 से 6 केस मरीजों को रेफर किया जा रहा है। वहीं, अस्पताल के डाक्टरों ने ओपीडी में भी सीटी स्कैन बाहर से कराने की सलाह देनी शुरू कर दी है।  

सीटी स्कैन मशीन काफी महंगी है। इसकी खरीद की प्रक्रिया चल रही है। एक-दो दिन में मशीन के आर्डर हो जाएंगे। विदेश से एक माह में आ पाएगी। ईको मशीन ठीक कराने के लिए कमेटी गठित की गई है। ठीक नहीं होने की स्थिति में नई खरीदी जाएंगी। पैथोलॉजी जांच ठीक चल रही है। कुछ सामान खत्म होने से कभी-कभी दिक्कत आ जाती है। ओटी में ऑटोक्लेव बार-बार कैसे खराब हो रहे हैं। इसके पीछे किसकी साजिश है। इसकी जांच एमएस डा. केके टम्टा कर रहे हैं। कुछ लोगों को चिह्नित किया गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 
डा. आशुतोष सयाना, प्राचार्य, दून मेडिकल कॉलेज  

अस्पताल ने बंद किया इलाज, बुजुर्ग की मौत 
दून अस्पताल में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना हुई है। डाक्टरों एवं नर्सिंग स्टाफ ने एक बुजुर्ग महिला मरीज को रेफर कर इलाज बंद कर दिया। 
तीन घंटे तक परिजन महिला को हायर सेंटर ले जाने की कोशिश में लगे रहे, लेकिन इसी बीच न तो डाक्टर न ही नर्सिंग स्टाफ ने मरीज को देखने की जहमत उठाई और मरीज के लिए स्ट्रेचर तक मुहैया नहीं कराया। परिजन मरीज को गोद में लेकर बैठे रहे। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से डाक्टर और नर्सिंग स्टाफ के अमानवीय व्यवहार की मौखिक शिकायत अस्पताल प्रबंधन से की है, वहीं कार्रवाई की मांग को परिजन शुक्रवार को अस्पताल में धरना देंगे। 
दरसअसल, खुड़बुड़ा इलाके के अन्ना हजारे चौक निवासी 60 वर्षीय बुजुर्ग महिला जैतून पत्नी जलालुदीन को उल्टी-दस्त होने पर विगत 11 जून को अस्पताल में भर्ती कराया गया। वार्ड 16 में डाक्टर अंकुर पांडेय की देखरेख में उनका इलाज चल रहा था। महिला की देखरेख कर रही उनकी पारिवारिक संबंधी पार्षद तृप्ता जाटव, बेटी फूलजहां एवं बेटे इमरान ने बताया कि उनको आईसीयू उपलब्ध नहीं कराया गया। 12 जून को सुबह 10 बजे उनकी मां को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। वाहन और पैसों का इंतजाम करने में उन्हें थोड़ा वक्त लगा। लेकिन इस दौरान संबंधित डाक्टर उन्हें देखने नहीं आया और नर्सिंग स्टाफ ने स्ट्रेचर तक नहीं दिया। इमरजेंसी तक उन्हें गोद में लाया गया। इमरजेंसी में करीब डेढ़ बजे डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने डिप्टी एमएस डा.एनएस खत्री से इसकी मौखिक शिकायत की। वार्ड 25 की पार्षद तृप्ता जाटव ने बताया कि डाक्टर एवं नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर शुक्रवार को अस्पताल परिसर में धरना दिया जाएगा। 


परिजनों ने डाक्टर के मरीज को न देखने एवं नर्सिंग स्टाफ पर लापरवाही बरतने और बेड व स्ट्रेचर उपलब्ध न कराने के आरोप लगाए हैं। मौखिक शिकायत के आधार पर डाक्टर एवं सिस्टर इंचार्ज से जवाब मांगा गया है। जवाब संतोषजनक नहीं होने पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। 
डा. एनएस खत्री, डिप्टी एमएस दून अस्पताल 
 

 

 

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