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14 अगस्त, 2020|5:59|IST

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उत्तराखंड : भारत-नेपाल विवाद का पंचेश्वर के प्रोजेक्ट पर पड़ सकता है असर, उठ रही संधि को खारिज करने की मांग

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भारत के लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को लेकर नेपाल के चल रहे घटनाक्रम का असर अब उत्तराखंड और नेपाल की सीमा पर पंचेश्वर में प्रस्तावित बिजली और सिंचाई के मेगा प्रोजेक्ट पर भी पड़ सकता है। नेपाल की कुछ भारत विरोधी राजनैतिक ताकतें इस संधि को खारिज करने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, नेपाल सरकार ने इस संधि का बचाव किया है।

नेपाल की मीडिया के मुताबिक वहां की जनता समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व विदेश मंत्री उपेंद्र यादव ने नेपाल के नए नक्शे पर प्रतिनिधि सभा में बोलते हुए कहा कि, नेपाली कांग्रेस और कम्युनिस्ट नेता महाकाली संधि पर देश से माफी मांगें। यादव ने कहा कि, दोनों देशों की सीमा विभाजक महाकाली नदी का उदगम ही इस संधि में गलत बताया गया है तो, यह संधि क्यों की गई। उन्होंने इस संधि को खारिज करने की मांग की। हालांकि यादव का तर्क सच्चाई से दूर है। कालापानी हमेशा से ही काली नदी का उदगम माना गया है। पंचेश्वर परियोजना 80 के दशक से प्रस्तावित थी। दोनों देशों के बीच लागत और लाभ में बंटवारे की सहमति के बाद संधि की गई। 1996 में तत्कालीन नेपाली कांग्रेस और वर्तमान कम्युनिस्ट सरकार भी इस संधि के पक्ष में हैं।

उपेंद्र यादव ने कहा कि, सुगौली की संधि के बाद 1996 की महाकाली सन्धि भी नेपाल के लिए अपमानजनक थी। हालांकि यादव की पार्टी नेपाल में सियासी लिहाज से बहुत ताकतवर नहीं है। लेकिन वहां के सरकार विरोधियों का उन्हें इस मामले में समर्थन मिल सकता है। ऐसे में नेपाल में पंचेश्वर को मुद्दा बनाए जाने से पहले भारत को इस दिशा में कदम उठाने चाहिए ताकि, बिजली और पानी की यह आकार ले सके।a

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  • Web Title:Pancheshwar project may have impact due India Nepal dispute