Pakistan and China have not released postage stamp on Mahatma Gandhi till date - महात्मा गांधी पर पाकिस्तान और चीन ने आज तक जारी नहीं किया डाक टिकट DA Image

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महात्मा गांधी पर पाकिस्तान और चीन ने आज तक जारी नहीं किया डाक टिकट

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दुनिया के ऐसे देश जिनका आपने शायद कभी नाम भी नहीं सुना होगा उन्होंने भी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जीवन और कार्यों से प्रभावित होकर समय-समय पर डाक टिकट जारी किए हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, सऊदी अरब जैसे वो शक्तिशाली राष्ट्र हैं जिन्होंने बापू पर डाक टिकट जारी किए हैं। लेकिन पाकिस्तान और चीन उन कुछ राष्ट्रों में शामिल हैं, जिन्होंने आज तक बापू पर कोई डाक टिकट जारी नहीं किया।

डाक टिकट का विश्व इतिहास करीब 175 साल पुराना है। भारत में स्वतंत्रता के बाद पहला डाक टिकट 21 नवंबर 1947 को जारी हुआ था। जबकि महात्मा गांधी वह पहली शख्सियत थे, जिन पर भारत में पहला डाक टिकट 15 अगस्त 1948 को जारी किया। तब से लेकर दुनिया भर में महात्मा गांधी पर पांच सौ प्रकार के डाक टिकट जारी हो चुके हैं। भारत के बाद अमेरिका वह पहला विदेशी राष्ट्र था, जिसने बापू पर 26 जनवरी 1961 को डाक टिकट जारी किया। उसके बाद कांगो ने डाक टिकट जारी किया। जिस देश ब्रिटेन से बापू ने आजादी की लड़ाई लड़ी, उसने भी उनके निधन के 21 साल बाद डाक टिकट जारी किया।

1969 में करीब चालीस देशों ने बापू की जन्मशती मनाते हुए सत्तर प्रकार के डाक टिकट जारी किए। दक्षिण अफ्रीका जहां से गांधी के महात्मा बनने की शुरूआत हुई, उस महाद्वीप के भी तकरीबन सभी देशों ने बापू पर डाक टिकट जारी किए। इनके अलावा बांग्लादेश, श्रीलंका, भूटान, नेपाल, अफगानिस्तान, रुस, जर्मनी, फ्रांस, सऊदी अरब, तजाकिस्तान, डोमनिक गणराज्य जैसे देशों ने बापू पर डाक टिकट जारी कर सम्मान प्रकट किया है। रिटायर्ड आईएएस व बापू पर चार सौ से अधिक डाक टिकटों के प्रमुख संग्रहकर्ता एसके दास के अनुसार, कई अंजान देशों ने बापू पर डाक टिकट जारी किए हैं। लेकिन पाकिस्तान, चीन का ऐसा न करना हैरत में डालता है।

पाक, चीन में है प्रतिमा
विदेश मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार, बापू की 84 देशों में 110 स्थानों पर प्रतिमाएं स्थापित हैं। इनमें पाक और चीन भी शामिल हैं। जर्मनी-ब्रिटेन में 11-11, अमेरिका में आठ, दक्षिण अफ्रीका व कनाडा में 3-3 स्थानों पर बापू की प्रतिमाएं हैं। चीन में एकमात्र मूर्ति बीजिंग में लगी है। पाक के कराची में एक प्रतिमा बताई जाती है।

भारत ने सीमांत गांधी खान अब्दुल गफ्फार खान, मार्टिन लूथर किंग और नेल्सन मंडेला जैसी शख्सियतों पर भी टिकट जारी किए। दूसरे देशों की लोकप्रिय शख्सियत को सम्मान देने के लिए डाक टिकट जारी करने की परंपरा पूरे विश्व में है। तकरीबन सभी देशों ने बापू को सम्मान दिया है। प्रो.बीके जोशी, दून लाइब्रेरी के निदेशक व कुमाऊं विवि के पूर्व कुलपति। 

ये अंजान देश भी जारी कर चुके डाक टिकट
माइक्रोनेशिया(पैसाफिक ओशन में द्वीपों का समूह राष्ट्र), गिनी बिसाऊ, बेनिन, सोलोमन आईलैंड, जिब्राल्टर, सेंट विंसेंट, सांडा आईलैंड, स्कॉटलैंड(यूके अधिपत्य वाला राष्ट्र), बारामूडा, गुयाना, बाराबडोस, बहामास, सेंट लूसिया, जमैका, त्रिनिडाड एंड टोबेगो, एंटिगुआ(वेस्टइंडीज द्वीप समूह) 

उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव के पास डाक टिकटों का खजाना
करीब 65 साल से डाक टिकटों का संग्रह कर रहे उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव सुरजीत के. दास के पास बापू से जुड़े करीब चार सौ डाक टिकट हैं। इनमें 1948 में बापू की हत्या के कुछ समय बाद एक साथ जारी चार बहुमूल्य टिकट भी हैं। इसमें आठ आना, 12 आना से लेकर दस रूपये तक के टिकट हैं। इस तरह के कुल 16 संग्रह प्रकाशित हुए थे। विदेश में ये संग्रह पांच लाख पाउंड(414 करोड़ रूपये)में बिक चुके हैं।

ये भी जाने-
-देश की 53 बड़ी व असंख्य छोटी सड़कें बापू के नाम से हैं
-विदेश में 48 सड़कें महात्मा गांधी के नाम पर हैं
-महात्मा गांधी ऐसे विदेशी शख्सियत हैं जिन पर सर्वाधिक डाक टिकट अनेकों देशों ने जारी किए हैं
-नोबल के लिए गांधी पांच पर बार नामांकित हुए, मगर उन्हें एक बार भी नहीं मिला
-गांधी पर डाक टिकट जारी करने का सिलसिला लगातार जारी है
- बापू और कस्तूरबा वह पहले दम्पत्ति थे जिन पर 1963 में भारत ने 20 पैसे का डाक टिकट जारी किया

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