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एनएच घोटाले के आरोपी अफसरों को तैनाती

एनएच-74 मुआवजा घोटाले में आरोपी पांच पीसीएस अधिकारियों को कार्मिक विभाग ने नई तैनाती दे दी। एनएच-74 के चौड़ीकरण के दौरान अधिगृहीत भूमि का मुआवजे बांटने में हुए करोड़ों रुपयों के घोटाले में ये सभी अधिकारी न सिर्फ निलंबित हुए थे, बल्कि जेल भी गए थे।इस बहुचर्चित घोटाले में नाम सामने आने के बाद एसडीएम डीपी सिंह, भगत सिंह फोनिया, तीर्थपाल सिंह, नंदन सिंह नगन्याल और अनिल शुक्ला को सस्पेंड कर दिया गया था। मगर, पिछले माह ही इनकी बहाली भी हो गई और इन सभी पीसीएस अफसरों को उत्तराखंड राजस्व परिषद से अटैच भी कर दिया गया था।

कार्मिक विभाग ने जारी कर दिए आदेश
गुरुवार को कार्मिक विभाग से जारी आदेश के अनुसार, एसडीएम दिनेश प्रताप सिंह को एसडीएम रुद्रप्रयाग, तीर्थपाल को एडीएम उत्तरकाशी, भगत सिंह फोनिया को एसडीएम पिथौरागढ़, नंदन सिंह नगन्याल को एसडीएम रुद्रप्रयाग, अनिल शुक्ला को बतौर एसडीएम पिथौरागढ़ भेजा गया है। इनके साथ ही पिथौरागढ़ के एसडीएम सौरभ गहरवार को चमोली, एडीएम उत्तरकाशी हेमंत कुमार वर्मा को अपर आयुक्त कर के पद पर देहरादून भेजा गया।


पीसीएस चटवाल को नैनीताल भेजा और जवाब भी मांगा
देहरादून। सरकार ने रुद्रप्रयाग में तैनात पीसीएस अधिकारी गौरव चटवाल का तबादला रुद्रप्रयाग से बतौर एसडीएम नैनीताल कर दिया है। इतना ही नहीं, कार्मिक विभाग ने केदारनाथ ड्यूटी के दौरान अचानक इस्तीफा देने वाले गौरव चटवाल का जवाब तलब भी कर लिया है। उनसे एक सप्ताह के अंदर अचानक इस्तीफा देने पर स्पष्टीकरण देने के लिए कहा है। ऐसा नहीं किए जाने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

डुप्लीकेट चालान फर्जीवाड़े में सस्पेंड एआरटीओ बहाल
देहरादून। फर्जी चालान रसीदों से परिवहन विभाग को चूना लगाने के आरोप में निलंबित हुए एआरटीओ आनंद कुमार जायसवाल बहाल कर दिए गए हैं। उन्हें बहाली के साथ परिवहन आयुक्त मुख्यालय से अटैच किया गया है। परिवहन सचिव शैलेश बगौली ने इसके आदेश किए। उन्होंने बताया कि बहाली की अवधि तक उनके खिलाफ जांच की प्रक्रिया जारी रहेगी। सूत्रों ने बताया कि सरकार इस मामले में लोक सेवा आयोग की राय का इंतजार कर रही है। सूत्रों ने यह भी बताया कि जांच में जायसवाल दोषी पाए जा चुके हैं। उन पर कार्रवाई के लिए परिवहन विभाग ने लोक सेवा आयोग से अनुमति मांगी थी। मगर, आयोग ने कुछ बिंदुओं पर असहमति जताकर जांचे गए 400 से ज्यादा दस्तावेज मांग लिए। इनके अध्ययन के बाद आयोग राय देगा। सूत्रों ने बताया कि परिवहन विभाग ने कुछ दस्तावेज आयोग को भेज भी दिए हैं।

यह है मामला
2010 से 2015 तक जायसवाल ऋषिकेश में तैनात थे। यहां प्रवर्तन दल के राजस्व में कमी आ रही थी। सूत्रों के अनुसार, तब यह शिकायत मिली कि परिवहन अधिकारी-कर्मचारी नियमों के उल्लंघन में पकड़े जाने वाले वाहनों पर फर्जी चालान रसीदों के जरिये कार्रवाई कर रहे हैं। जुर्माना तो ज्यादा वसूला जा रहा था, लेकिन सरकारी खजाने में जमा हो रही रसीदों में यह राशि काफी कम होती थी। आपके प्रिय अखबार ‘हिन्दुस्तान’ ने 13 जुलाई 2016 को इसका खुलासा किया था। इसके बाद जांच में इसकी पुष्टि होने पर तत्कालीन परिवहन सचिव सीएस नपलच्याल ने 28 मार्च 2017 को जायसवाल को सस्पेंड कर दिया। उस वक्त वो उत्तरकाशी में एआरटीओ के पद पर तैनात थे।

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