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Hindi News उत्तराखंडनैनीताल पुलिस अपना रिकॉर्ड सुधारने में लगी, लोगों का थाने में चक्कर काटते हुए निकल रहा दम

नैनीताल पुलिस अपना रिकॉर्ड सुधारने में लगी, लोगों का थाने में चक्कर काटते हुए निकल रहा दम

अगर उससे पहले आरोपी पुलिस के हत्थे चढ़ गया तो उसका मुकदमा दर्ज कर अपनी ही वाहवाही के लिए अगले ही दिन मामले का लंबा चौड़ा खुलासा कर देती है।  इस तरह के मामलों की भरमार है। शहर का ऐसा कोई थाना नहीं है।

नैनीताल पुलिस अपना रिकॉर्ड सुधारने में लगी, लोगों का थाने में चक्कर काटते हुए निकल रहा दम
nainital police trying to improve its record people getting tired roaming around police station
Himanshu Kumar Lallहल्द्वानी, हिन्दुस्तानWed, 12 Jun 2024 04:00 PM
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उत्तराखंड पुलिस आम लोगों की मदद करने के बजाय अपना रिकॉर्ड सुधारने में लगी हुई है। जी हां, चौंकिए बिल्कुल भी मत। ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं कि क्राइम होने के बाद भी पुलिस कई दिनों तक एफआईआर तक दर्ज नहीं कर रही है। 

नैनीताल जिला पुलिस ने नया चलन शुरू किया है। वारदात होती है, लेकिन उसकी शिकायत 24 घंटे तो दूर 24 दिन बात तक भी दर्ज नहीं होती है। नतीजा यह रहता है कि पीड़ितों को बार-बार थाने-चौकियों के चक्कर काटने पड़ते हैं। वारदात का शिकार हुए पीड़ित आखिर में आकर कोर्ट की दहलीज पर ही गुहार लेकर पहुंचते हैं।

अगर उससे पहले आरोपी पुलिस के हत्थे चढ़ गया तो उसका मुकदमा दर्ज कर अपनी ही वाहवाही के लिए अगले ही दिन मामले का लंबा चौड़ा खुलासा कर देती है।  इस तरह के मामलों की भरमार है। शहर का ऐसा कोई थाना नहीं है, जहां तहरीर दिए जाने के 24 घंटे बाद ही मामला दर्ज हो जाता हो। यह स्थिति सबसे ज्यादा घरों में चोरी और बाइक चोरी जैसे मामलों की रहती है।

आपसी विवाद, मारपीट, कहासुनी व अन्य मामलों में अगर पुलिस रिपोर्ट दर्ज करने से पहले जांच का हवाला दे तो भी चीजें समझ आती हैं, लेकिन चोरी के मामले या फिर सड़क हादसे की शिकायत में भी यह लापरवाही समझ से परे मालूम पड़ती है।

केस 1: लोहरियासाल मल्ला गली नंबर एक ऊंचापुल निवासी प्रकाश चंद्र बहुगुणा के घर 11 अप्रैल को चोरी की वारदात हुई थी। घर में घुसे चोर नगदी चोरी कर ले गए थे। जाते वक्त चोरों ने अलमारी और ड्रेसिंग टेबल के शीशे पर संदेश लिखा ‘चोरी तो की पर सोना नहीं मिला, चोरी के लिए माफ करना’। यह संदेश जमकर वायरल हुआ था। घटना के तीन दिन बाद मुखानी पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था।

केस 2: इंदिरानगर निवासी हसीन शाह की बाइक 20 अप्रैल को उनके घर के बाहर से चोरी हो गई थी। अगले ही दिन उन्होंने वनभूलपुरा थाना पुलिस को इसकी मौखिक और दो दिन बाद लिखित शिकायत दी। तहरीर मिलने के बाद भी पुलिस ने 18 दिन बाद बाइक चोरी का मुकदमा दर्ज किया।

केस 3: तल्ली हल्द्वानी की जेआरपुरम कॉलोनी के निवासी कुशी राम 15 अप्रैल को शादी समारोह में गए हुए थे। 18 अप्रैल को जब वापस लौटे तो घर के ताले टूटे पड़े थे। शिकायत मिलने के भी 15 दिन बाद कोतवाली पुलिस ने चार मई को इस मामले में मुकदमा दर्ज किया।

केस 4: श्रीराम कॉलोनी भगवानपुर रोड मुखानी निवासी रमेश सिंह राणा 66 साल के हैं। 4 जून 2023 को अपनी पत्नी मीना राणा के साथ टहलने के लिए निकले थे। इस दौरान तेज रफ्तार एक कार ने दोनों को टक्कर मार दी थी। हादसे में उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गईं। हादसे के अगले ही दिन रमेश के पुत्र देवेंद्र ने मुखानी पुलिस को तहरीर दी, लेकिन मुकदमा दर्ज करने में एक या दो दिन नहीं पूरा एक साल लग गया। यहां तक कि एक साल बाद भी मुकदमा कोर्ट के आदेश पर दर्ज किया गया।

चोरी आदि के मामलों में तुरंत मुकदमा दर्ज होना चाहिए, फिर भी अगर जांच आदि में समय लगता है, तब भी सात दिन काफी होते हैं। इससे भी ज्यादा देरी हो अगर मुकदमा दर्ज करने में हो रही है तो ऐसे मामलों की समीक्षा बैठक कर जांच की जाएगी।
प्रकाश चंद, एसपी सिटी, हल्द्वानी