Nainital Laxmi Elephant Defeat Death Doctors Panel Reject Mercy Killing Proposal in Ramnagar - राहत: बेजुबान 'लक्ष्मी' ने दी मौत को  मात, डॉक्टरों के पैनल ने खारिज किया दया मृत्यु का प्रस्ताव DA Image
19 नबम्बर, 2019|1:34|IST

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राहत: बेजुबान 'लक्ष्मी' ने दी मौत को  मात, डॉक्टरों के पैनल ने खारिज किया दया मृत्यु का प्रस्ताव

laxmi elephant   hindustan photo

रामनगर वन प्रभाग के आमडंडा डिपो में पल रही बीमार हथिनी 'लक्ष्मी' ने मौत को मात दे दी है।  खानपान में सुधार से वह स्वस्थ होने लगी है। देशभर के डॉक्टरों की टीम ने जांच के बाद दया मृत्यु देने का प्रस्ताव खारिज कर दिया है। साथ ही उसे बेहतर उपचार के लिये एसओएस मथुरा भेजने की बात कही है। अगस्त 2018 में हाईकोर्ट के आदेश पर रामनगर वन प्रभाग ने ढिकुली स्थित रिजॉर्ट से नौ हथिनियों को कब्जे में लेकर आमडंडा डिपो में रखा। इसी बीच 56 साल की हथिनी लक्ष्मी के पैर में इंफेक्शन हो गया। इसके उपचार को वन विभाग शुरुआत में कॉर्बेट पार्क और स्थानीय पशु चिकित्सकों की मदद लेता रहा।

हालत बिगड़ने पर पंतनगर यूनिवर्सिटी, भारतीय वन्यजीव संस्थान, एसओएस मथुरा के विशेषज्ञों के साथ ही दक्षिण अफ्रीका से डॉक्टरों को बुलाया गया। तमाम कोशिशों के बाद जब हथिनी स्वस्थ नहीं हुई तो अधिकारियों ने भी हाथ खड़े कर दिये। 14 जून को प्रमुख वन संरक्षक (पीसीसीएफ) जयराज ने हथिनी को असहनीय दर्द में देखते हुए उसकी दया मृत्यु की बात कही। इसके साथ ही देशभर के डॉक्टरों का पैनल भी गठित कर दिया गया। इसके बाद हथिनी को दया मृत्यु देने की तैयारी थी। 

खाना खाते ही जगी उम्मीद 
हथिनी के एक सप्ताह तक खाना-पीना बंद करने के बाद अधिकारी मान रहे थे कि उसे दया मृत्यु दी जाए, लेकिन इधर डॉक्टरों के पैनल के जांच के बीच उसने खाना-पीना शुरू कर दिया। इससे फिर लक्ष्मी के जीने की उम्मीद जग गई है। 

पैर के इंफेक्शन का मथुरा में होगा उपचार
हथिनी के पैर में इंफेक्शन से हुए गहरे जख्म धूल, मिट्टी के कारण नहीं भर पा रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि एसओएस मथुरा भेजने के बाद वह स्वस्थ हो जाएगी। उसे मथुरा भेजने के लिए रिपोर्ट भी तैयार कर ली है। 

जांच टीम ने देहरादून भेजी रिपोर्ट 
हथिनी को दया मृत्यु देने के प्रस्ताव को खारिज कर जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट देहरादून भेज दी है। इसमें बताया गया है कि हथिनी के पैर में इंफेक्शन है, उसने खाना-पीना शुरू कर दिया है। ऐसे में उसे दया मृत्यु नहीं दी जा सकती। उपचार के लिये उसे मथुरा भेजना जरूरी है।

इन संस्थानों के डॉक्टरों ने की जांच 
पंतनगर यूनिवर्सिटी, वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट देहरादून, आईवीआरआई बरेली, चिड़ियाघर नैनीताल।  

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