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कम समय में ज्यादा काम मेरा ध्येय: सीएम पुष्कर सिंह धामी 

हिन्दुस्तान टीम, देहरादूनHimanshu Kumar Lall
Thu, 02 Dec 2021 10:58 AM
कम समय में ज्यादा काम मेरा ध्येय: सीएम पुष्कर सिंह धामी 

उत्तराखंड के युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी दो दिन बाद पांच माह का कार्यकाल पूरा करने जा रहे हैं। इस अवधि में उन्होंने कई लोक-लुभावन फैसले लिए। कोरोना के कारण आर्थिक दिक्कतों से घिरे लोगों के लिए प्रोत्साहन पैकेज दिया। सरकारी विभागों में रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की। उपनल से भर्ती कर्मचारियों, आंगनबाड़ी, आशा कार्यकर्ताओं, त्रिस्तस्तरीय पंचायतों के प्रतिनिधियों का मानदेय बढ़ाया। कर्मचारियों के लिए उपचार प्रक्रिया में सुधार किए।

देवस्थानम ऐक्ट खत्म करने का ऐलान जैसे बड़े फैसले लिए। दूसरी तरफ महंगाई, बेरोजगारी, पलायन, शिक्षा और चिकित्सा जैसी चुनौतियां खड़ी हैं। नए साल की शुरुआत में सरकार को विधानसभा चुनाव का सामना करना है। पांच माह के कामकाज और भविष्य की चुनौतियों को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को हिन्दुस्तान के स्थानीय संपादक गिरीश गुरुरानी और विशेष संवाददाता नवीन थलेड़ी से विस्तृत बातचीत की। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:-     

सवाल: भाजपा सरकार के पांच साल के तीन प्रमुख और पिछले पांच माह के तीन प्रमुख फैसले क्या मानते हैं ?
जवाब: कई बड़े फैसले लिए गए। सबसे बड़ी बात पांच साल के भीतर जितनी भी घोषणाएं हुईं, उन सभी के शासनादेश निकले और योजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास भी हो चुके हैं। सरकार ने पारदर्शी शासन दिया। मैं इसे सबसे बड़ी उपलब्धि मानता हूं। बातें कम और काम ज्यादा का नारा दिया, इसे धरातल पर भी उतारा गया। मैंने, जब से कार्यभार ग्रहण किया तीन चीजें सरलीकरण, समाधान व निस्तारण शुरू की हैं। नौकरशाही को काफी हद तक दुरुस्त किया। रोजगार व स्वरोजगार के लिए ठोस कदम उठाए। मंै सबसे बड़ी उपलब्धि यह मानता हूं कि इस दौरान हर वर्ग के लिए कुछ न कुछ किया। लोकत्रांतिक प्रक्रिया के तहत लोग जो भी मांग करते रहे, सरकार कम संसाधन होते हुए भी एक सहयोगी के रूप में उनके साथ खड़ी रही। चारधाम के पर्यटन कारोबारी, स्वास्थ्यकर्मी, परिवहन कारोबारी और महिला समूहों को पैकेज देने में सरकार ने पूरी उदारता बरती।

सवाल: रोजगार बड़ा मुद्दा है। सरकारी विभागों में भर्ती का अभियान गति क्यों नहीं पकड़ पाया ?
जवाब: नहीं, ऐसा नहीं है। भर्ती की प्रक्रिया तेजी से शुरू की गई है। चार माह में दस हजार से भी ज्यादा भर्तियां शुरू हो चुकी हैं। शेष 14 हजार पदों पर भी अगले दो-तीन माह में प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। कुल मिलाकर सरकार ने भर्तियों के लिए एक खाका बना दिया है। युवाओं को निशुल्क आवेदन और उम्र सीमा में एक वर्ष की छूट की सुविधा दी है।  

सवाल: भाजपा ने पिछले चुनाव से पहले लोकायुक्त लाने का वादा किया था, पूरा क्यों नहीं कर पाई ?
जवाब: इस पर विचार कर रहे हैं। अभी पूरी तरह से पारदर्शी शासन चल रहा है। लोकायुक्त के लिए लोगों से सुझाव भी लिए जाएंगे। 

सवाल: तीनों कृषि कानून वापस होने के बाद तराई क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों में कोई बदलाव देख रहे हैं?
जवाब: कृषि कानून वापस लेने पर मोदी जी ने स्वयं ही कहा कि किसानों के हित में कानून लाए थे और  देश हित में इसे वापस लिया है। इसे राजनीतिक नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए। पीएम के इस कदम का स्वागत करता हूं कि उन्होंने बड़ा दिल दिखाकर इसे वापस लिया और किसानों प्रति संवेदनशीलता दिखाई।   

सवाल: महंगाई को विपक्ष प्रमुख मुद्दे के रूप में उठा रहा है, इससे कैसे निपटेंगे ?
जवाब: देखिए, एक तरफ चीन और पाकिस्तान सीमा पर हमारे सैनिक मोर्चाबंदी में लगे हुए हैं। कोरोना महामारी से पूरा विश्व प्रभावित हुआ था। मैं प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने इन विकट परिस्थितियों में विकास कार्य नहीं रुकने दिए। देश के 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन देने का काम किया। स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई संसाधन जुटाए। मैं मानता हूं कि प्रदेश की जनता मोदी जी का चमत्कार देख रही है।

सवाल: कांग्रेस व आप ने मुफ्त बिजली देने का वादा कर दिया है, ऊर्जा मंत्री ने भी मुफ्त बिजली देने का ऐलान किया था, पर लागू नहीं हुआ ?    
जवाब: हमारे उत्तराखंड के लोग स्वाभिमानी हैं और देशभक्त लोग हैं। यहां पर लोग मेहनत करते हैं। वे चुनाव के समय ऐसे राजनीतिक जुमलों के झांसे में आने वाले नहीं हैं। उत्तराखंड सैनिक बाहुल्य प्रदेश व देवभूमि है। सस्ती बिजली देने के लिए सरकार योजनाओं पर काम कर रही है।

सवाल: पहाड़ के लिए कोई विकास का मॉडल है, जो पलायन रोक सके?
जवाब: उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां भिन्न हैं। पलायन तभी रुकेगा, जब गांव व मोहल्ले सशक्त होंगे और पढ़े-लिखे युवाओं को कोई रोजगार व स्वरोजगार मिलेगा। सरकार ने दो प्रकार की योजनाओं पर फोकस किया है। जैसे दूरस्थ क्षेत्रों के गांव मजबूत हों और उनमें आजीविका के साधन उपलब्ध हों। सरकार बोधिसत्व शृंखला कार्यक्रम के जरिए ऐसी योजनाएं क्रियांवित करने जा रही है, जिससे स्वरोजगार बढ़ेगा और लोगों का पलायन रुकेगा। इसके लिए क्षेत्रों के अनुरूप योजनाओं पर फोकस किया जा रहा है। 

सवाल: पहाड़ में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर करने के लिए कोई सरकार ठोस उपाय नहीं कर पाई, ऐसा क्यों ?
जवाब: नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं है। भाजपा सरकार ने मैनपावर बढ़ाने पर फोकस किया है। पहले एक हजार डाक्टर ही राज्य में थे, अब इनकी संख्या 2100 के आसपास पहुंच चुकी है। सरकार ने कोरोना महामारी से लड़ने के साथ-साथ अवस्थापना सुविधाएं बढ़ाई हैं। पीएचसी व सीएचसी को मजबूत किया। लोगों को राहत पहुंचाने के लिए 207 जांचें निशुल्क की हैं। आयुष्मान कार्ड भी निशुल्क बनाया जा रहा। अफसरों को सख्त हिदायत दी है कि जिनके पास भी आयुष्मान कार्ड हैं, उन्हें इलाज के लिए अस्पतालों में न भटकना पड़े। जो कोई इलाज देने में आनाकानी करेंगे, उन्हें चिह्नित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

सवाल: विकास कुछ शहरों तक ही सिमटकर रह गया है, गांवों में आज भी दयनीय स्थिति है।
जबाव: इसके लिए हम योजना बना रहे हैं। सभी विभागों को दस साल का रोडमैप बनाने के लिए पत्र लिखा है। हर गांव को सड़क से जोड़ने,  पर्यटन व धार्मिक स्थलों को व्यवस्थित करने के साथ ही गांवों में इंटरनेट की सुविधा दी जा रही है। पलायन रोकने में ये कदम बड़े कारगर साबित होंगे।

उन तीन घंटों को छोड़कर कभी तनाव में नहीं रहा
मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने कहा कि एक दिन भी ऐसा नहीं रहा, जब उन्हें कोई तनाव महसूस हुआ हो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्य सेवक के रूप में जिम्मेदारी सौंपी और जनता का उन्हें भरपूर आशीर्वाद मिला। हर क्षण जनता के लिए समर्पण भाव से काम करता हूं। हां 24 नवंबर को एक बैठक में विलंब होने के दौरान जब उनके दो-तीन घंटे बर्बाद हुए तो उस वक्त तनाव जरूर रहा, क्योंकि उस शेडयूल में, मैं जनता के लिए कोई काम नहीं कर पाया। धामी ने कहा कि मुझे कोई भी काम मुश्किल नहीं लगता है। 

 

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