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पापा उन्हें निकालकर ही बाहर आना... रेस्क्यू की कहानी सुना क्यों रोने लगे रैट माइनर मुन्ना कुरैशी?

मुन्ना ने बताया, 'नहीं मुझे कोई डर नहीं था। मुझे पता था कि ये 41 भाइयों के जिंदगी का सवाल है। हमारे हौसले बुलंद थे। हमने यह तय कर लिया था कि उन्हें बाहर निकाल कर ही घर जाएंगे।'

पापा उन्हें निकालकर ही बाहर आना... रेस्क्यू की कहानी सुना क्यों रोने लगे रैट माइनर मुन्ना कुरैशी?
Devesh Mishraलाइव हिंदुस्तान,उत्तरकाशीWed, 29 Nov 2023 11:00 PM
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Silkyara tunnel: उत्तरकाशी के सिलक्यारा सुरंग से सभी 41 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। इस रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद मुन्ना कुरैशी नाम के एक शख्स की खूब चर्चा की जा रही है। दरअसल, मजदूरों के बहुत करीब जाकर ड्रिलिंग कर रही अमेरिकी ऑगर मशीन 'नाकाम' हो गई। इसके बाद दिल्ली से 12 रैट होल माइनर्स को बुलाया गया। इन्हीं रैट माइनर्स ने हाथ से खुदाई कर के 17 दिन से अंदर फंसे मजदूरों को बाहर निकाला है। इस ऑपरेशन में मुन्ना कुरैशी रैट माइनर्स की टीम के लीडर थे। ऐसे में मुन्ना ने उस वक्त की कहानी सुनाई है। उनकी कहानी वाकई में भावुक कर देने वाली है।

क्या रेस्क्यू के दौरान लगा था डर?
'आजतक' से बातचीत के दौरान मुन्ना से पूछा गया कि क्या इस रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान उन्हें डर लगा था? मुन्ना ने बताया, 'नहीं मुझे कोई डर नहीं था। मुझे पता था कि ये 41 भाइयों के जिंदगी का सवाल है। हमारे हौसले बुलंद थे। हमने यह तय कर लिया था कि उन्हें बाहर निकाल कर ही घर जाएंगे।'

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पापा उन्हें निकालकर ही बाहर आना...
मुन्ना कुरैशी ने बताया, 'इस रेस्क्यू ऑपरेशन पर निकलने पर मेरे बेटे ने कहा था कि पापा आप एक-दो दिन में घर आ जाना। इसके बाद जब मैं यहां आ गया तब उसका फोन आया। मेरे बेटे ने फोन पर कहा कि पापा सभी 41 लोगों को बाहर निकालकर ही आना। मैं यहां आपका इंतजार कर रहा हूं।'

एक आदमी चला भी जाए तो...
बातचीत के दौरान मुन्ना कुरैशी ने कुछ ऐसा कहा कि उनकी आंखें नम हो गईं। उन्होंने कहा, 'जब मैं मजदूरों के पास पहुंचा तब वो लोग मुझे गले से लगा लिए। मैं कभी रोता नहीं हूं लेकिन उस वक्त मैं रोने लगा।' नम आंखों के साथ मुन्ना ने आगे कहा, '41 आदमियों के लिए एक आदमी चला भी जाए तो कोई दिक्कत नहीं होती। उन 41 लोगों के पीछे बहुत लोग हैं, मां, बच्चे और बहन।' मुन्ना की ये बातें किसी 'मसीहा' से कम नहीं हैं।

बता दें कि सुरंग से बचाये गए सभी 41 श्रमिकों को बुधवार को हवाई मार्ग से ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ले जाया गया जहां उनकी स्वास्थ्य जांच की गई। इन श्रमिकों में से कई ने बताया कि वे हमेशा एक-दूसरे के साथ खड़े रहे और उन्होंने कभी भी उम्मीद नहीं छोड़ी।

सड़क मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सिलक्यारा सुरंग केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 900 किलोमीटर लंबी एवं सभी मौसम में इस्तेमाल में सक्षम 'चार धाम यात्रा रोड' का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में 4.5 किलोमीटर लंबी सिलक्यारा सुरंग परियोजना का जरूरी सुरक्षा ऑडिट और टूटे ढांचे की मरम्मत के बाद फिर से शुरू होगी।

केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न एजेंसियों द्वारा लगातार युद्धस्तर पर चलाए गए बचाव अभियान के 17 वें दिन मंगलवार रात सिलक्यारा सुरंग में फंसे सभी 41 श्रमिकों को सकुशल बाहर निकाल लिया गया था। श्रमिकों को चिन्यालीसौड़ के एक अस्पताल में चिकित्सा निगरानी में रखा गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्रमिकों से मिलकर उनका हालचाल जाना और उन्हें एक-एक लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि का चेक सौंपा। 

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