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एनर्जी कॉन्क्लेव में 40 हजार करोड़ के एमओयू, उत्तराखंड को यह होगा फायदा

एनर्जी कॉन्क्लेव में ऊर्जा क्षेत्र में 40 हजार करोड़ के एमओयू किए गए। 21 हजार करोड़ की परियोजनाओं के स्वीकृति पत्र (एलओआई) तक जारी हो चुके हैं। निवेशकों के साथ एमओयू किए।

एनर्जी कॉन्क्लेव में 40 हजार करोड़ के एमओयू, उत्तराखंड को यह होगा फायदा
Himanshu Kumar Lallदेहरादून, हिन्दुस्तानWed, 06 Dec 2023 09:47 AM
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एनर्जी कॉन्क्लेव में ऊर्जा क्षेत्र में 40 हजार करोड़ के एमओयू किए गए। 21 हजार करोड़ की परियोजनाओं के स्वीकृति पत्र (एलओआई) तक जारी हो चुके हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर धामी की मौजूदगी में सचिव ऊर्जा आर मीनाक्षी सुंदरम ने निवेशकों के साथ एमओयू किए।

सचिवालय में आयोजित एनर्जी कॉन्क्लेव में सीएम धामी ने कहा कि वाइब्रेंट गुजरात से प्रेरणा लेकर इन्वेस्टरर्स समिट का आयोजन किया जा रहा है। ऊर्जा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश कर राज्य में हाइड्रो, सोलर पावर सेक्टर में इस बार धरातल पर बड़े काम हो रहे हैं।

इन कार्यों से आने वाले समय में उत्तराखंड ऊर्जा प्रदेश के रूप में स्थापित होगा। सरकार उद्योगों के साथ समन्वय बना कर काम कर रही है। उद्योगों की समस्याओं को जानने को नियमित रूप से संवाद किया जाएगा।

सचिव ऊर्जा सुंदरम ने बताया कि मंगलवार को एनर्जी कॉन्क्लेव में 32 निवेशकों ने एमओयू पर साइन किए। अभी तक ऊर्जा क्षेत्र में 40 हजार करोड़ से अधिक के एमओयू हो चुके हैं। ऊर्जा क्षेत्र में होने वाले इन निवेशों के बाद उद्योगों के लिए बिजली की कोई कमी नहीं रहेगी। बल्कि राज्य पावर सरप्लस राज्य बन जाएगा।

इससे उत्तराखंड की जीएसडीपी दोगुनी हो जाएगी। निवेश बढ़ाने को स्मॉल हाइड्रो पॉलिसी, सोलर पॉलिसी, मल्टी स्टेज पंप स्टोरेज पॉलिसी तैयार की गई है। इन पॉलिसी से न सिर्फ निवेश बढ़ रहा है, बल्कि स्थानीय लोगों को भी लाभ मिलेगा। नेट मीटरिंग का प्रावधान किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि मल्टी स्टेज पंप स्टोरेज सेक्टर में अकेले जेएसडब्ल्यू ग्रुप के साथ 15 हजार करोड़ का एमओयू होने जा रहा है। पॉलिसी इस तरह तैयार की गई हैं, जिससे न सिर्फ निवेश बढ़े, बल्कि रोजगार को भी बढ़ावा मिल सके। सीएम सौर स्वरोजगार योजना से स्थानीय लोगों को पॉवर सेक्टर से जोड़ कर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।

पिछली बार ये स्कीम आगे नहीं बढ़ पाई। इसमें बदलाव करने के बाद से लोगों का रुझान बढ़ गया है। इन नए पावर प्रोजेक्ट से मिलने वाली बिजली का समय पर सही इस्तेमाल हो सके, इसके लिए ट्रांसमिशन सिस्टम का मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है।


सीएम बोले, निवेशक समस्याएं भी बताएं
एनर्जी कान्क्लेव के दौरान सीएम धामी ने निवेशकों से खुल कर अपनी समस्याएं और सुझाव भी बताने को कहा। उन्होंने कहा कि एकतरफा संवाद नहीं होना चाहिए, बल्कि सभी खुल कर अपनी बात कहें। इस दौरान निवेशक अरुण शर्मा ने कहा कि समय पर ट्रांसमिशन सिस्टम विकसित हो।

ताकि बिजली का समय पर सही इस्तेमाल हो सके। लाइन लॉस का भार कैप्टिव प्लांट पर न डाला जाए। योजनाओं को लेकर शासन स्तर से तो सपोर्ट मिलता है, लेकिन निचले स्तर पर जिला प्रशासन के अफसरों को योजनाओ की जानकारी न होने से निवेशकों को दिक्कत होती है।

ये निवेशक रहे मौजूद
टीएचडीसी, एनटीपीसी, इस्टर्न रामगंगा वैली हाइडिल प्रोजेक्ट कंपनी, मंदाकिनी हाइड्रो प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड, खुटानी पावर, मेलखेत पावर, हिम ऊर्जा, अगलार पावर, काशी विश्वनाथ, जीएमआर, कुंदन ग्रुप, उत्तर भारत हाइड्रो पावर, भिलंगना हाइड्रो पावर, एमवी पावर एनर्जी, त्रिशूलीन इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड।


 

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