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मोबाइल गेम-इंटरनेट की आदत से बच्चे आक्रामक, लड़कों से अलग लड़कियों का गुस्सा 

मोबाइल गेम, इंटरनेट एडिक्शन और स्क्रीन टाइम के अधिक अधिक समय न सिर्फ लड़कों बल्कि लड़कियों में भी आक्रामकता बढ़ा रहा है। लड़कियों की यह आक्रामकता लड़कों से काफी भिन्न है।

मोबाइल गेम-इंटरनेट की आदत से बच्चे आक्रामक, लड़कों से अलग लड़कियों का गुस्सा 
Himanshu Kumar Lallदेहरादून। शैलेन्द्र सेमवालThu, 19 Oct 2023 05:03 PM
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मोबाइल गेम, इंटरनेट एडिक्शन और स्क्रीन टाइम के अधिक अधिक समय न सिर्फ लड़कों बल्कि लड़कियों में भी आक्रामकता बढ़ा रहा है। लड़कियों की यह आक्रामकता लड़कों से काफी भिन्न है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसको रोकने के लिए अभिभावकों को सतर्क रहना चाहिए।  

उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग में छोटे से लेकर किशोर लड़के-लड़कियों के ऐसे कई मामलों की काउंसलिंग की गई है। ऐसे ही दून के एक स्कूल में पढ़ने वाली दो लड़कियों का झगड़ा आयोग पहुंचा। लड़की लगातार क्लास की 9्छारत्रा को निक नेम से चिढ़ा रही है और सार्वजनिक जगह पर उसे इसी नाम से पुकारती है, जिससे अच्छी ध्वनि नहीं आती।

इस निकनेम को पूरे स्कूल में प्रचारित भी कर दिया। एक अन्य मामले में लड़कियों के झगड़े में एक ने सहेली का फेक अकाउंट बनाकर बदनाम करने की कोशिश की। वह सहेली के इस फेक अकाउंट में लगातार आपत्तिजनक पोस्ट कर रही थी।

तीसरे मामले में लड़कियों के दो ग्रुप में झगड़ा होने पर लड़कियों ने दूसरे ग्रुप की लड़कियों का नाम स्कूल के ही लड़कों के साथ जोड़ना शुरू कर दिया। चौथे मामले में पांचवीं और छठी क्लास के बच्चे बैड टच करते पाए गए।

बाल आयोग की मनौवैज्ञानिक निशांत इकबाल के मुताबिक, लड़कों में आक्रामकता अक्सर मारपीट तक पहुंचती है। जबकि लड़कियां हर बात पर मारपीट नहीं करतीं, बल्कि वह गलत नेम कॉलिंग, एक-दूसरे के मानसिक उत्पीड़न का प्रयास करती हैं। ये सभी उत्पीड़न की श्रेणी में है और आक्रामकता का ही स्वरूप है। बाल आयोग अध्यक्ष गीता खन्ना के मुताबिक कोविड के बाद मोबाइल एडिक्शन के मामले बढ़े हैं।

अभिभावकों की बड़ी जिम्मेदारी
निशांत इकबाल के मुताबिक, बच्चे मोबाइल टीवी, कम्प्यूटर पर क्या सामग्री देख रहे हैं, अभिभावक उसकी निगरानी जरूर कराएं। बेवजह टीवी, मोबाइल लेकर बैठे रहने की आदत न डलवाएं न खुद उनके सामने ऐसा करें। बच्चों को वीडियो के जरिए पढ़ाई न करवाएं। ऐसे अभिभावक जो अपने बच्चों के सामने ही झगड़ा करते हैं वे ऐसा न करें न ही बच्चों को अपने झगड़े में शामिल करें।

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