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चिंताजनक: उत्तराखंड में युवाओं के साथ ही बढ़ रहा वोट का पलायन

उत्तराखंड पलायन के चलते मतदान का प्रतिशत लगातार गिर रहा है। साल 2014 में पूरे प्रदेश में मतदान प्रतिशत 62.15 फीसदी रहा, जबकि वर्ष 2019 में मतदान का प्रतिशत घटकर 57.85 फीसदी पहुंच गया। इस प्रकार देखा जाए तो राज्य में पिछले चुनावों के मुकाबले मतदान प्रतिशत में 4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। इस प्रकार देखा जाए तो राज्य में युवाओं के साथ ही वोट का पलायन भी बढ़ रहा है। उत्तराखंड में यदि वर्ष 2009 से 2019 के मतदान प्रतिशत को अगर देखा जाए तो इसमें औसत रूप से गिरावट दर्ज की जा रही है। हरिद्वार लोक सभी सीट को अगर देखा जाए तो इस सीट पर वर्ष 2004, 2009, 2014 व 2019 में वोट प्रतिशत 53.19, 60.89, 71.57 व 66.24 फीसदी रहा।

इस सीट पर 2014 के मुकाबले 4 फीसदी वोट की गिरावट दर्ज की गई है। इसी प्रकार नैनीताल सीट पर इसका प्रतिशत 48.88, 58.69, 68.41 व 66.61 फीसदी रहा। इस सीट में भी पिछले चुनाव के मुकाबले 2 फीसदी वोट की गिरावट दर्ज की गई है। जबकि टिहरी सीट पर वोट प्रतिशत 43.44, 51.38, 57.44 व 54.38 प्रतिशत रहा।  इस सीट में भी पिछले चुनाव के मुकाबले 3 फीसदी वोटों की गिरावट आई है। पौड़ी लोक सभा सीट पर 46.62, 48.87, 53.98 व 49.89 प्रतिशत रहा। इस सीट में भी 3 फीसदी वोटों की गिरावट दर्ज हुई है। इस प्रकार देखा जाए राज्य के मैदानी क्षेत्रों के मुकाबले पर्वतीय क्षेत्रों की सीटों में मतदान प्रतिशत कम रहा है। वर्ष 2014 के चुनावों में जहां मैदानी क्षेत्रों 70 फीसद वोट पड़े, वहीं पर्वतीय क्षेत्रों में मतदान 55 फीसदी तक सिमट गया। वहीं 2019 के चुनाव में मैदान के साथ ही पवर्वतीय क्षेत्रों के जिलों में 4 से लेकर 3 फीसदी वोटों की गिरावट दर्ज की गई है। 

 

 

अल्मोड़ा सीट पर बढ़ा सिर्फ एक फीसदी वोट
अल्मोड़ा सीट पर 2004 से लेकर 2019 के चुनावों में वोट प्रतिशत 49.89, 45.57, 52.41 व 53.38 फीसदी रहा।  इस सीट में मात्र एक फीसदी वोट की बढ़ोत्तरी दर्ज हुई है। जबकि इस सीट पर 2004 के मुकाबले 2009 के मतदान में 4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। यह सीट राज्य की एकमात्र सीट है जिसमें मात्र एक फीसदी वोट की बढ़ोत्तरी हुई है।

 

पलायन रुकने से बढ़ेगा वोट प्रतिशत: डॉ. राजेश
समाज शास्त्री डॉ. राजेश कुमार बताते हैं कि उत्तराखंड में बढ़ती बेरोजगारी के चलते पर्वतीय जिलों में वोट का प्रतिशत लगातार गिर रहा है। राज्य में वोट का प्रतिशत गिरने के पीछे पलायन पूरी तरह से जिम्मेदार है। डॉ. राजेश बताते हैं कि उत्तराखंड राज्य बनने के 19 साल बाद भी सुदूरवर्ती गांवों में अबतक विकास नहीं पहुंच पाया है। गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी जैसी आवश्यक सुविधाएं नहीं पहुंच पाने और बेरोजगारी के कारण पलायन लगातार बढ़ रहा है। यही कारण है कि राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में मैदान के मुकाबले काफी कम मतदान होता है। गांवों को स्वावलंबी बनाकर ही पलायन को रोका जा सकता है। गांवों से पलायन रुकने पर ही मतदान भी बढ़ेगा।


 

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