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एमडीडीए लेबर सेस के नाम पर कर रहा अवैध वसूली

एमडीडीए सरकार के नियमों को दरकिनार कर लेबर सेस के नाम पर अवैध वसूली कर रहा है। नियमों के मुताबिक 10 लाख रुपये से अधिक के भवनों के निर्माण पर एक प्रतिशत का लेबर सेस लिया जाता है, लेकिन एमडीडीए दस लाख से कम के निर्माण कार्यों पर भी लेबर सेस वसूल रहा है। मामला सामने आने के बाद विभागीय अधिकारियों ने इस मामले में जांच बिठा दी है।  यह पूरा मामला किसी और ने नहीं बल्कि एमडीडीए से रिटायर्ड इंजीनियर ने ही पकड़ा है। एमडीडीए में रहे विनोद चमोली का नेशविला रोड पर अपना मकान है। उन्होंने इस मकान में पोर्च के ऊपर एक कमरा बनवाया। वह इस नए बनाए कमरे की कंपाउंडिंग करवाने एमडीडीए पहुंचे। इसकी कंपाउंडिंग भी कर दी गई। एमडीडीए ने इस कमरे की लागत सरकारी मानकों के मुताबिक साढ़े चार लाख रुपये आंकी। जिस पर एमडीडीए ने कंपाउंडिंग फीस, डेवल्पमेंट चार्ज के साथ लेबर सेस भी लगा दिया। 


चमोली कहते हैं कि जब दस लाख रुपये से कम के निर्माण पर लेबर सेस नहीं लगा सकते तो फिर इस निर्माण पर किस तरह से 4286 रुपये का लेबर सेस ले रहे हैं। जब उन्होंने खुद एमडीडीए जाकर पता किया तो पता चला कि देहरादून ही नहीं प्रदेश के अन्य प्राधिकरणों में इस तरह से नियम विरुद्ध लेबर सेस लिया जा रहा है। 
उन्होंने इसे लेकर पहले 18 मार्च को एमडीडीए सचिव से शिकायत की और फिर 16 अप्रैल को एमडीडीए उपाध्यक्ष को भी यह शिकायत दी। लेकिन उनकी शिकायत को व्यक्तिगत मामला बताकर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इधर, कई अन्य मामलों में भी इस तरह से लेबर सेस लेने का मामला सामने आए और शिकायतें एमडीडीए पहुंचने लगीं। बावजूद इसके एमडीडीए नियम विरुद्ध लेबर सेस ले रहा है।  इस मामले में एमडीडीए सचिव गिरीश चंद्र गुणवंत का कहना है कि यह मामला उनके संज्ञान में भी आया है। इसकी जांच की जा रही है। यह चूक किस स्तर पर हो रही है, इसकी जानकारी ली जा रही है। साथ ही इस तरह का जो भी लेबर सेस लिया गया है, उसकी वापसी के लिए श्रम विभाग से भी बात की जा रही है। 

 

 

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  • Web Title:mdda charging illegally unde labour cess from residents in dehradun