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बैंड-बाजा और बारात की तैयारी 19 से होगी शुरू

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सनातन धर्म में शादी को पवित्र बंधन माना जाता है। यह रिश्ता जिंदगी भर ठीक से चले, इसके लिए लोग शादी हमेशा शुभ मुहूर्त देखकर ही करते हैं। इसी साल 23 जुलाई को देवशयनी एकादशी के बाद से शादियों के सीजन पर विराम लगा हुआ था। पर अब 19 नवंबर को देवउठनी एकादशी पर सूर्य के वृश्चिक राशि में प्रवेश करते ही शादी, ब्याह की दावतों का दौर फिर से शुरू हो जाएगा। लक्सर के श्री सांई शनिधाम मंदिर के पुजारी पंडित अवनीश शर्मा ने बताया कि देवउठनी एकादशी को खुद में शादी के लिए शुभ मुहूर्त माना जाता है। इसके पश्चात नवंबर महीने में शादी का कोई अच्छा मुहूर्त नहीं है। दिसंबर में 11, 12 और 13 तारीख को जमकर शादियां होंगी। इसके बाद 16 दिसंबर से 14 जनवरी 2019 तक खरमास या मलमास रहेगा। शादियां व दूसरे मांगलिक कार्य नहीं हो सकते हैं। 14 जनवरी के बाद फिर से शादियां शुरू हो जाएंगी। इसके बाद 11 मार्च तक शुभ मुहूर्त के मुताबिक शहनाईयां गूंजती रहेंगी। 

देवों के सोने के कारण बंद थी शादियां
मान्यता है कि साल में एक बार देवशयनी एकादशी (आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तिथि) पर भगवान विष्णु क्षीरसागर में जाकर सो जाते हैं और फिर लगभग चार माह के शयन के बाद कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की एकादशी को जागते हैं। इसे देवउठनी या देवोत्थान एकादशी कहा जाता है। 

नवंबर, दिसंबर को कुल चार शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य पंडित संदीप भारद्वाज ने बताया कि शादी की तिथि पर सूर्य, गुरु और चंद्र की स्थिति की गणना की जाती है। शुभ मुहूर्त के लिए तीनों शुभ स्थान पर होने चाहिए। इस बार 19 नवंबर को देवशयनी एकादशी पर सूर्य और चंदमा तो उच्च के हैं लेकिन इन पर गुरुअस्त का साया रहने से योग पूरी तरह शुभ नहीं है।

 


 

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  • Web Title:marriage season gains pace again on november 19