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शादी पंजीकरण अनिवार्य से लेकर संपत्ति में महिलाओं को बराबरी, गोवा से क्यों बेहतर उत्तराखंड UCC?

उत्तराखंड के लिए यूसीसी की रिपोर्ट तैयार करने वाली कमेटी ने इसे सशक्त और बेहतर बनाया है। कमेटी के कुछ सदस्यों ने इसकी पुष्टि की है। मालूम हो कि गोवा में पुर्तगालियों ने 1867 में यूसीसी लागू किया था।

शादी पंजीकरण अनिवार्य से लेकर संपत्ति में महिलाओं को बराबरी, गोवा से क्यों बेहतर उत्तराखंड UCC?
Himanshu Kumar Lallदेहरादून, नवीन थलेड़ीTue, 06 Feb 2024 09:40 AM
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सीएम पुष्कर सिंह धामी सरकार ने यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में जो पांच सदस्यीय कमेटी बनाई थी, उसने पहले गोवा के यूसीसी का गहरा अध्ययन किया।

इसके सभी विधिक पहलुओं के आकलन के बाद ही समिति ने उत्तराखंड को लेकर यूसीसी के लिए बनाई अपनी रिपोर्ट में सिफारिशें कीं। चूंकि, गोवा का कानून बहुत पुराना है और तब से अब तक समाज में कई अहम बदलाव आए हैं।

ऐसे में उत्तराखंड के लिए यूसीसी की रिपोर्ट तैयार करने वाली कमेटी ने इसे सशक्त और बेहतर बनाया है। कमेटी के कुछ सदस्यों ने इसकी पुष्टि की है। मालूम हो कि गोवा में पुर्तगालियों ने 1867 में यूसीसी लागू किया था। गोवा के भारत में विलय के बावजूद, यह कानून अब भी वहां लागू है।

पिछले दिनों राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गोवा का दौरा किया था। उन्होंने भी यूसीसी की प्रशंसा की थी। ऐसे में स्वाभाविक है कि धामी सरकार का प्रस्तावित यूसीसी उत्तराखंड में लागू होने के बाद, देश के अन्य राज्यों के लिए नजीर बन सकता है। यूसीसी का ड्राफ्ट मंगलवार को सदन में विधेयक के रूप में पेश किया जाएगा।

गोवा
1. प्रत्येक पति-पत्नी को स्वामित्व अथवा अर्जित जमीन पर बराबरी का हक
2. तलाक के मामले में संपत्ति का आधा हिस्सा पाने का अधिकार
3. माता-पिता अपने बच्चों को विरासत से नहीं कर सकते बेदखल
4. जिन मुस्लिम पुरुषों की शादियां पंजीकृत हैं, वे बहुविवाह नहीं कर सकते, मौखिक तलाक का नहीं है प्रावधान
5. हिन्दू पुरुष, पहली पत्नी से बच्चा पैदा न होने पर कर सकते हैं दूसरा विवाह
6. चर्च में शादी करने वाले कैथोलिक को यूसीसी के तलाक से रखा गया बाहर
7. अन्य समुदायों के लिए विवाह का नागरिक पंजीकरण ही प्रमाण पत्र के रूप में मंजूर

उत्तराखंड
1. संपत्ति में महिलाओं को भी पुरुषों की तरह बराबरी का अधिकार
2. सभी के लिए विवाह का पंजीकरण अनिवार्य
3. पति/पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी संभव नहीं
4. सभी समुदाय की युवतियों को विवाह की उम्र समान
5. लिव इन रिलेशनशिप का डिक्लियरेशन जरूरी
6. जायज-नाजायज संतानों का भेदभाव खत्म
7. बुजुर्गों की देखभाल को भरण पोषण का प्रावधान
 

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