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12 जुलाई, 2020|8:41|IST

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कोरोना इफेक्ट:ट्रक बेचकर व्यवसाय बदलने के लिए मजबूर हो गए ट्रांसपोर्टर  

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ट्रांसपोर्टरों को ढुलाई का काम नहीं मिलने से उनके सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में उनके लिए  ड्राइवर-हेल्पर की तनख्वाह और बैंक की किस्त निकालना मुश्किल हो रहा है।

काम न मिलने के चलते कई ऑपरेटर ट्रक बेचकर दूसरे व्यवसाय करने को मजबूर हो गए हैं।  सेलाकुई में उद्योगों से जुड़े परिवहन व्यवसायी भी इसी स्थिति से दो-चार हो रहे हैं। इन्हीं में से एक हैं सेलाकुई क्षेत्र के रामपुर निवासी लियाकत।

लियाकत भी परिवहन व्यवसाय से जुड़े थे। उन्होंने बीते दस वर्ष से सेलाकुई स्थित कंपनियों में सामान ढुलान के काम में दो ट्रक लगा रखे थे। इससे चालक, हेल्पर के वेतन, बैंक किस्त और तमाम खर्चे काटने के बाद उन्हें पचास हजार रुपये प्रतिमाह तक की कमाई हो जाती थी। 

बीते कुछ समय से कंपनियों को कच्चा माल मिलने में परेशानी होने लगी तो उत्पादन भी गिर गया। इससे माल ढुलाई समेत अन्य वाहनों को काम मिलना दुश्वार हो गया और आय घटने लगी।

काम की चिंता में पड़े लियाकत को पिछले दिनों हार्ट अटैक भी पड़ा। ऋषिकेश एम्स में उनका इलाज चला। अब उन्हें महंगी दवाएं खानी पड़ रही है। एक साथ कई परेशानियों में घिरने के चलते लियाकत को अपने दोनों ट्रक औने-पौने दामों में बेचने पड़े। 

इसके बाद तीन बेटे-बेटी सहित पांच लोगों के परिवार को पालने के लिए लियाकत ने अब दो भैंस खरीदी हैं। लियाकत इन भैंसों का दूध बेचकर ही अपने परिवार को पाल रहे हैं।

यह हाल अकेले लियाकत का नहीं हैं। परिवहन से जुड़े अन्य व्यावसायियों की स्थिति भी कुछ यही है। इनके सामने गंभीर आर्थिक संकट तो है ही, साथ ही अपने काम को पटरी पर लाने की चुनौती भी मुंह बाए खड़ी है।

 

केस-1
हरबर्टपुर निवासी पुष्पेंद्र रोहिला शुरू से परिवहन व्यवसाय से जुड़े हैं। सेलाकुई स्थित विभिन्न कंपनियों में उनके पांच ट्रक ढुलान के काम में लगे थे। कोरोना महामारी के बाद आर्थिक मंदी के चलते उन्हें अपने तीन ट्रक बेचने पड़े। अब दो ट्रक बचे हैं। वे भी काम न मिलने के कारण घर के बाहर खड़े हैं।


केस-2
हसनपुर के सईद अहमद के पास आठ ट्रक थे। लॉकडाउन व कंपनियों के उत्पादन में गिरावट के चलते काफी समय से काम नहीं मिला। इसके चलते बैंकों की किस्तें जमा नहीं हो पा रही थीं। इससे व्यथित अहमद ने छह ट्रक बेच दिए। दो ट्रक बचे हैं। उनके लिए भी काम नहीं मिल रहा। बड़ा परिवार होने के कारण उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

 

केस-3
छरबा निवासी सरदार सुरजीत सिंह के दस ट्रक थे। इस व्यवसाय से उनकी प्रतिमाह की आमदनी पांच लाख रुपये से अधिक थी। लेकिन अब फैक्ट्रियों में काम कम होने और काम नहीं मिलने पर उन्हें अपने चार ट्रक बेचने पड़े। बचे हुए छह ट्रकों को भी काम न मिलने के कारण वह बैंक की किस्तें नहीं दे पा रहे हैं। चालक और हेल्पर का वेतन देना भी भारी पड़ रहा है। सिंह का बेटा भोपाल में अपना होटल व्यवसाय चलाते हैं। लेकिन होटल बंद होने के कारण बेटा भी फिलहाल घर में ही है।

 

केस-4
बालूवाला के वीरेंद्र सिंह के पास दो ट्रक थे। अब कारखानों में उत्पादन कम होने से काम नहीं मिल रहा। चालक-हेल्पर का वेतन तथा ट्रक का खर्चा भी नहीं निकला। ट्रक घर पर ही खड़े थे तो उन्होंने भी अपने दोनों ट्रक बेच दिए। गांव में वीरेंद्र के पास दो बीघा के करीब जमीन है। उस पर खेती कर परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं।

 

सरकार ने बैंकों के ऋण की किस्त पर तीन माह तक की रोक लगाई है। लेकिन किस्त पर ब्याज माफ नहीं किया है। इससे व्यावसायियों को अधिक ब्याज भरना पड़ेगा। सरकार को चाहिए कि परिवहन व्यावसायियों के ऋण पर ब्याज भी माफ करे।
परिवहन व्यवसाय से जुड़े मालिक, चालक और हेल्पर के खातों में पैसा डालकर उनकी आर्थिक मदद भी की जाए ताकि वे अपने व्यवसाय को फिर से खड़ा कर पाएं।
गुलफाम अली, अध्यक्ष, सेलाकुई पछुवादून ट्रक ऑनर वेलफेयर एसोसिएशन 

 
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  • Web Title:lockdown due to corona virus badly affected transporters changing business to survive as lockdown 4 due to corona virus pandemic in uttarakhand