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केदारनाथ आपदा:आठ साल बाद भी नहीं गया गम,अपनों को तलाश रहे हैं हम, जानिए कब क्या हुआ

हिन्दुस्तान टीम, देहरादूनPublished By: Himanshu Kumar Lall
Wed, 16 Jun 2021 12:36 PM
केदारनाथ आपदा:आठ साल बाद भी नहीं गया गम,अपनों को तलाश रहे हैं हम, जानिए कब क्या हुआ

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में आज से ठीक आठ साल पहले का वो दिन याद कर सभी के होश उड़ जाते हैं। दर्शन को केदारनाथ जा रहे देश-विदेश के श्रद्धालुओं ने आपदा का वो मंजर देखा था, जो आज भी उनके रौंगेटे खड़ा कर देता है। ग्लेशियर टूटने से ऊफनाई मंदाकिनी नदी ने हर जगह तबाही और तबाही ही मचाई थी। केदारनाथ आपदा में कई श्रद्धालुओं को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा, तो चार हजार से अधिक तीर्थ यात्रियों का कुछ भी नहीं पता चला। सूत्रों की मानें तो आपदा के आठ साल गुजर जाने के बाद भी केदारघाटी में अब भी कई शव दफन हैं। केदारनाथ आपदा के दौरान लापता हुए लोगों के मृत शरीर, नर कंकाल खोजने के लिए सोनप्रयाग से पुलिस और एसडीआरएफ की 10 टीमें भी पिछले साल भी खोजबीन के लिए निकली थीं। आपदा से हुए नुकसान को भरपाई के लिए सरकार ने केदारघाटी के पुनर्निर्माण के लिए मास्ट प्लान बनाया है, जिसपर तेज गति से काम हो रहा है। 

वर्ष 2013 की प्राकृतिक आपदा में तहसनहस हुआ भगवान शिव का धाम केदारनाथ नए रंग-रूप में उभर रहा है।  पिछले आठ सालों के अंदर ही केदारपुरी में सुरक्षा-सौंदर्य से जुड़े निर्माण कार्यों की वजह से केदारपुरी की भव्यता बढ़ी है। कोरोना के हालात सामान्य होने के बाद जब यात्रा दोबारा शुरू होगी, तब शिव के भक्तों को अपने आराध्य का धाम और भी वैभवशाली रूप में नजर आएगा। खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्यक्तिगत रुचि से केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण और सौंदर्यीकरण को लाभ मिला है। ठीक सात साल पहले वर्ष 2013 में 16-17 जून की रात बारिश और बाढ़ ने केदारनाथ की तस्वीर बिगाड़ दी थी। सात साल के प्रयासों की वजह से तस्वीर में दोबारा से केदारधाम की भव्यता के नए रंग निखरने लगे हैं।  केदारघाटी में आपदा से टूटे पुलों के निर्माण में एमपी लेड से करीब 25 से 30 करोड़ खर्च किए गए है। इसमें माई की मंडी, सिल्ली, विजयनगर, चन्द्रापुरी, कालीमठ, रैलगांव प्रमुख पुल है। अन्य कई छोटे पुलों का निर्माण और मरम्मत का काम हुआ है। 

 

 


आठ साल बाद भी तीन हजार लोग लापता
केदारनाथ की विनाशकारी आपदा को आठ साल बीत चुके हैं, लेकिन आपदा में 3,183 लोगों का आज तक पता नहीं चल पाया है। 16 और 17 जून, 2013 की भीषण आपदा में केदारनाथ और मंदाकिनी घाटी में हजारों लोग लापता हो गए थे। आठ साल बाद इनमें कुछ लोगों के लोगों के शव मिले, जबकि सैकड़ों कंकाल बरामद हो पाए। अन्य लोगों के बारे में अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है। आपदा में लापता होने वालों में उत्तराखंड, देश, नेपाल समेत कई देशों के लोग शामिल थे। रामबाड़ समेत कई छोटे छोटे कस्बे जो मंदाकिनी किनारे बसे थे, वहां यात्रा रूट पर चल रहे काफी तीर्थयात्री भी इस आपाद में लील हो गए थे। रुद्रप्रयाग पुलिस के मुताबिक आपदा में लापता हुए लोगों के बारे में कुल 1840 एफआईआर उसके पास राज्य और अन्य प्रदेशों से आई। जांच में पता चला कि, इसमें से कई दो-दो बाद दर्ज हुई। इसे लेकर रुद्रप्रयाग पुलिस ने अलग से विवेचना सेल गठित की गई। पुलिस ने जांच के बाद इसमें 584 एफआईआर मर्ज की, जो दो-दो जगहों पर दर्ज थी। पुलिस ने कुल 1256 एफआईआर को वैध माना। पुलिस के पास 3,886 गुमशुदगी दर्ज हुई जिसमें से विभिन्न सर्च अभियानों में 703 कंकाल बरामद किए गए। जबकि आपदा के दौरान ही पुलिस को 11 शव मिले थे जिनकी शिनाख्त के बाद दाह संस्कार भी किया गया किंतु आज भी 3,183 लोगों को कोई पता नहीं है।

कब क्या हुआ
14 जून को शुरू हुई थी बारिश
16 जून की शाम चौराबाड़ी ताल टूटने से मंदाकिनी में बाढ़ आयी, केदारनाथ के आपास नुकसान, रामबाड़ा तहस-नहस
17 जून सुबह दोबारा चौराबाड़ी ताल से काफी पानी मलबा लेकर आया। केदारनाथ समेत पूरी घाटी में तबाही। हजारों यात्री मारे गए।
18 जून को पहली बार केदारघाटी की तबाही के बारे में सरकार को पता चला। 
19 जून को सरकार ने भीषण तबाही की बात स्वीकार की। 

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आपदा में नुकसान का ब्योरा
4027
            लोगों की मौत
1853            पूर्ण क्षतिग्रस्त पक्के मकान
361              पूर्ण क्षतिग्रस्त कच्चे मकान
2349            बुरी तरह से क्षतिग्रस्त पक्के भवन
340              बुरी तरह से टूटे कच्चे मकान
9808            आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त पक्के मकान
1656            आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त कच्चे मकान
2162            सड़कें  क्षतिग्रस्त
86                पुल (मोटर मार्ग व पैदल) टूटे
172              पुलिया ध्वस्त
3484            पेयजल लाइनें ध्वस्त
4515            गांव मेंबिजली आपूर्ति बाधित
13,844.34    परिसंपत्तियों को नुकसान (राशि करोड़ में)

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