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उत्तराखंड में अस्पतालों के लिए मानकों में ढील की तैयारी, आईपीएचएस मानकों में बदलाव को बन रहा प्लान

उत्तराखंड सरकार इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड (आईपीएचएस) मानकों में बदलाव करने जा रही है। आईपीएचएस मानकों की वजह से अस्पतालों में खड़ी हो रही दिक्कतों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

उत्तराखंड में अस्पतालों के लिए मानकों में ढील की तैयारी, आईपीएचएस मानकों में बदलाव को बन रहा प्लान
Himanshu Kumar Lallदेहरादून। विमल पुर्वाल Tue, 05 Jul 2022 10:35 AM

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उत्तराखंड सरकार इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड (आईपीएचएस) मानकों में बदलाव करने जा रही है। आईपीएचएस मानकों की वजह से अस्पतालों में खड़ी हो रही दिक्कतों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। राज्य सरकार ने 2019 में आईपीएचएस मानक लागू किए हैं। इसके तहत डॉक्टर, स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट और टैक्नीशियन का नया ढांचा तैयार किया गया है। 

जबकि प्रति बेड और ओपीडी के आधार पर स्टाफ की तैनाती का फार्मूला बनाया गया है। यही नहीं आईपीएचएस के तहत अस्पतालों के लिए आबादी से लेकर भवन आदि के मानक भी नए सिरे से बनाए गए हैं। केंद्रीय बजट बढ़ाने के लिए लागू किए गए यह मानक कागज पर तो बहुत अच्छे नजर आ रहे हैं।

लेकिन पहाड़ की भौगोलिक परिस्थितियों की वजह से धरातल पर दिक्कतें आ रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार यह मानक लागू होने के बाद अस्पतालों में कई तकनीकी परेशानियां खड़ी हो रही है। इसके बाद अब इन मानकों में बदलाव का निर्णय लिया गया है।

फार्मासिस्टों के लिए कमेटी : आईपीएचएस मानकों में फार्मासिस्टों के पद खत्म होने की समस्या को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने एक दिन पहले ही स्वास्थ्य महानिदेशक की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित करने का ऐलान किया है। यह कमेटी केवल फार्मासिस्ट संवर्ग के लिए ही गठित की गई है। लेकिन अब आईपीएचएस के सभी मानकों की नए सिरे से समीक्षा की जा रही है। उसके बाद इन मानकों में बदलाव किया जाएगा।

आईपीएचएस मानकों से मर्ज हो गए अस्पताल : मानकों के तहत राज्य में महिला अस्पतालों को समाप्त कर जिला अस्पताल में शामिल कर दिया गया है। बेस अस्पतालों कहीं उपजिला अस्पताल बनाया गया है तो कहीं यह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बदल दिए गए हैं।

खड़ी हो रहीं यह अड़चनें
उत्तराखंड में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना 80 हजार से कम आबादी पर नहीं हो पाएगी।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रेडियोलॉजिस्ट के पद समाप्त हो जाएंगे।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में एक्सरे की सुविधा समाप्त होगी।
स्वास्थ्य उपकेंद्रों से फार्मासिस्टों के पद समाप्त।
राज्य में फार्मासिस्टों के 391 पद समाप्त।
ट्रामा सेंटर के लिए मंजूर डॉक्टर व स्टाफ के पद इमरजेंसी में मर्ज किए जाएंगे।

आईपीएचएस मानक उत्तराखंड की वास्तविक जरूरतों को समझे बिना ही राज्य में लागू हो गए हैं। इस वजह से विभाग में कई तरह की दिक्कतें खड़ी हो रही हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से इस संदर्भ में चर्चा हुई है। अब मानकों में बदलाव किया जा रहा है।
डॉ. धन सिंह रावत, स्वास्थ्य मंत्री

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