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उत्तराखंडअल्मोड़ा महिला अस्पताल के प्रभारी सीएमएस डॉ.गर्ब्याल का कोरोना से निधन

अल्मोड़ा। संवाददाता Published By: Yogesh Yadav
Thu, 13 May 2021 07:18 PM
अल्मोड़ा महिला अस्पताल के प्रभारी सीएमएस डॉ.गर्ब्याल का कोरोना से निधन

महिला अस्पताल के प्रभारी सीएमएस डॉ.दीपक गर्ब्याल (59 वर्ष) की  कोराना की चपेट में आने से मौत हो गई। कोरोना संक्रमित डॉ. गब्र्याल ने इलाज के दौरान गुरुवार को हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल में अंतिम सांस ली। वह करीब तीन साल से अल्मोड़ा के जिला महिला अस्पताल में प्रभारी सीएमएस के पद पर तैनात थे। उनकी मौत से ​जिला और महिला अस्पताल के स्वास्थ्य अधिकारियों और कर्मचारियों में शोक की लहर है। 

मूल रूप से धारचूला निवासी महिला अस्पताल के प्रभारी सीएमएस डॉ.गब्र्याल ने बेटी की बीती 17 अप्रैल को अपने मूल निवास स्थान धारचूला में ही शादी की थी। इसके चलते वो लंबे समय से अवकाश पर चल रहे थे, लेकिन बेटी की शादी के बाद अचानक तबीयत खराब होने पर वह इलाज के लिए हल्द्वानी चले गए। जहां उनकी कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद उनका एक निजी अस्सपताल में इलाज चल रहा था।

बीते दिनों ज्यादा तबीयत खराब होने पर उन्हें सुशीला तिवारी अस्पताल में वेंटीलेटर पर रखा गया था। गुरुवार को इलाज के दौरान डॉ.गर्ब्याल ने दम तोड़ दिया। अल्मोड़ा जिला महिला अस्पताल की प्रभारी सीएमएस डॉ.प्रीति पंत ने बताया कि दोपहर करीब पौने 2 बजे उन्हें फोन से डॉ.गर्ब्याल के निधन की सूचना मिली। उनके निधन से पूरे अस्पताल कर्मियों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। 

प्रशासनिक कार्यों संग प्रसव में निभाते थे भूमिका 
जिला महिला अस्पताल के डॉ.गर्ब्याल बीते तीन साल से प्रभारी सीएमएस के पद पर कार्यरत थे। इसके चलते निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ.गर्ब्याल प्रशासनिक कार्यों के साथ ही अस्पताल में ऑपरेशन से प्रसव के दौरान अहम भूमिका निभाते थे। इतनी अधिक उम्र होने के बाद भी वह पूरे सेवाभाव से मरीजों के उपचार में जुटे रहते थे। दिन भर ड्यूटी के बाद भी यदि रात में किसी महिला का प्रसव कराना हो तो वह कभी अपनी ड्यूटी से पीछे नहीं हटे। कोरोना काल में भी डॉ.गब्र्याल ने अपना सक्रियता में कभी कमी नहीं आने दी। कोरोनाकाल में जब बेस अस्पताल में कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज को छोड़कर अन्य सेवाएं बंद कर दी गईं, उस समय महिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं का दबाव बढ़ गया। लेकिन उन्होंने कभी भी किसी महिला मरीज को परेशानी नही होने दी।

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