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Hindi News उत्तराखंडतो क्या नेताओं की शह पर हुए अवैध कब्जे...देहरादन में बस्तियों के वोट बैंक से बने विधायक

तो क्या नेताओं की शह पर हुए अवैध कब्जे...देहरादन में बस्तियों के वोट बैंक से बने विधायक

ये वोटर राजनीति की दशा और दिशा तय करते हैं। जब कार्रवाई की बात आती है तो खामियाजा बस्ती में रहने वालों को ही भुगतना पड़ता है। देहरादून में अतिक्रमण के खिलाफ बुलडोजर ऐक्शन हुआ है।

तो क्या नेताओं की शह पर हुए अवैध कब्जे...देहरादन में बस्तियों के वोट बैंक से बने विधायक
Himanshu Kumar Lallदेहरादून, महावीर सिंह चौहानTue, 28 May 2024 10:45 AM
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देहरादून में नदी-नालों के किनारे अवैध कब्जे करवाने में नेता भी जिम्मेदार हैं। बस्तियों के वोट बैंक के सहारे कुछ तो विधायक तक बन गए। कई ऐसे हैं, जो नगर निगम में पार्षद रह चुके हैं। देहरादून में अब स्थिति यह हो चुकी है कि चाहकर भी कोई जनप्रतिनिधि अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की पैरवी नहीं कर पाता।

वोट के लिए नेता बस्तीवालों की मांगें पूरी करने में कोई कसर नहीं छोड़ते। बिजली-पानी कनेक्शन दिलाने से लेकर राशन कार्ड, आधार, आयुष्मान कार्ड समेत तमाम सुविधाएं दिलाने के लिए जनप्रतिनिधि और पार्टी कार्यकर्ता विभागों के चक्कर लगाते हैं।

दून नगर निगम के अनुसार, बस्तियों में वर्ष 2016 तक 40 हजार के आसपास मकान थे। यह संख्या अब काफी बढ़ चुकी है। बहुत बड़ा वोट बैंक बस्तियों में रहता है। ये वोटर राजनीति की दशा और दिशा तय करते हैं। जब कार्रवाई की बात आती है तो खामियाजा बस्ती में रहने वालों को ही भुगतना पड़ता है।

एक ओर, एमडीडीए के मास्टर प्लान 2041 में नियोजन विभाग ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि देहरादून को योजनाबद्ध तरीके से बसाने के लिए रिस्पना-बिंदाल नदी और नालों के किनारे से 19 हजार के आसपास कच्चे-पक्के निर्माण हटाकर लोगों को आवास बनाकर शिफ्ट करना पड़ेगा।

नगर निगम और जिला प्रशासन ने भी नदी और नालों के संकरे होने को चिंताजनक बताया है। जनप्रतिनिधि भी अवैध निर्माण के खिलाफ शिकायतें दर्ज करते हैं। लेकिन, जब बस्तियों में कार्रवाई की बात आती है तो वोट बैंक के लिए अधिकतर कार्रवाई का विरोध शुरू कर देते हैं। इसी दोहरी नीति के कारण अवैध निर्माण पर रोक नहीं लग पा रही।

सोमवार को कार्रवाई करने वाली टीम में अपर नगर आयुक्त वीर सिंह बुदियाल, उप नगर आयुक्त गोपाल राम बिनवाल, एसडीएम हरगिरी, तहसीलदार मोहम्मद शादाब, कर अधीक्षक-भूमि राहुल कैंथोला, कोतवाल राकेश गुसाईं, एसएसआई प्रदीप नेगी, सीओ डोईवाला अभिनय चौधरी, सीओ डालनवाला आशीष भारद्वाज और नगर निगम के कई कर्मचारी भी मौजूद रहे।

एनजीटी के दखल के बाद जिम्मेदार सक्रिय
एनजीटी के आदेश के बाद ही नगर निगम, एमडीडीए और जिला प्रशासन बस्तियों में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सक्रिय हुए। पर, यह बड़ा सवाल है कि रिस्पना-बिंदाल नदी को कब्जामुक्त करने में विभागों को कितनी कामयाबी मिल पाएगी?

पहले चरण में एनजीटी के आदेश पर नगर निगम, एमडीडीए, जिला प्रशासन ने रिस्पना किनारे 27 बस्तियों में 11 मार्च 2016 के बाद अवैध रूप से बने मकानों को चिन्हित किया। जबकि, नदी किनारे बसी 129 बस्तियों में मकानों की संख्या कई गुना है।

सर्वे में पता चला टैक्स नहीं मिल रहा
नगर निगम ने सौ वार्डों में जीआईएस मैपिंग करवाई थी, उसके तहत हजारों नए मकान ऐसे हैं, जिनका हाउस टैक्स जमा नहीं होने था। इनमें बड़ी संख्या बस्तियों में बने हुए मकानों की है।

कांग्रेस अवैध कब्जों के पक्ष में नहीं है। मगर, जब कब्जे हुए, तब शासन-प्रशासन सोया हुआ था क्या? लंबे समय से रह रहे लोगों को उजाड़ने से पहले पुनर्वास की व्यवस्था की जाए। उनको मालिकाना हक मिले। कांग्रेस बस्ती वालों के साथ खड़ी है। भाजपा की कथनी-करनी में अंतर है।
डॉ. जसविंदर सिंह गोगी, महानगर अध्यक्ष-कांग्रेस

कोर्ट के आदेश, ड्रोन की नजस से कार्रवाई आसान
देहरादून, कार्यालय संवाददाता। एनजीटी के आदेश पर सोमवार को चूना भट्टा, नेमी रोड, चंदर रोड पर नगर निगम और पुलिस प्रशासन की टीम ने आठ घंटे तक अभियान चलाया। पूरी कार्रवाई को ड्रोन कैमरे में कैद किया गया। हालांकि, इस दौरान कोई जनप्रतिनिधि खुलकर सामने नहीं आए। कल तक विरोध के लिए ललकारने वाले नेता कोर्ट के आदेश और ड्रोन की नजर के कारण मौके से नदारद रहे।

एनजीटी ने एक मामले में सुनवाई करते हुए 13 मई को आदेश जारी किया कि रिस्पना के किनारे स्थित 27 बस्तियों में 11 मार्च 2016 के बाद अवैध रूप से बने मकानों को चिन्हित कर तीस जून तक ध्वस्त करने की कार्रवाई करें। इसके बाद पहले नगर निगम, जिला प्रशासन और एमडीडीए ने संयुक्त सर्वे कर मकान चिन्हित किए। सोमवार सुबह कार्रवाई शुरू की गई।

कार्रवाई के बाद अगली सुनवाई पर नगर निगम और अन्य विभागों को एनजीटी में पक्ष रखना है। इसलिए, ड्रोन कैमरे से अभियान की रिकॉर्डिंग की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, इसी कारण नेता मौके पर विरोध से बच रहे हैं।

सोमवार को कुछ जगह लोगों ने कार्रवाई का विरोध जरूर किया। अधिकारियों के साथ थोड़ी बहुत नोकझोंक हुई। लेकिन विधायक, निवर्तमान मेयर और पार्षद और अन्य जनप्रतिनिधि नजर नहीं आए। ज्यादा विरोध नहीं होने से टीम आसानी से चिन्हित कब्जों को हटा पाई।