ट्रेंडिंग न्यूज़

अगला लेख

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

Hindi News उत्तराखंडचारधाम यात्रा अपडेट, अब तक 23 लाख रजिस्ट्रेशन; 2 श्रद्धालुओं की मौत

चारधाम यात्रा अपडेट, अब तक 23 लाख रजिस्ट्रेशन; 2 श्रद्धालुओं की मौत

अब तक 23 लाख लोगों ने इस यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया और पहले दिन 46 हजार श्रद्धालुओं ने हिमालय की गोदी में स्थित इन पहाड़ियों के दर्शन किए। इस दौरान दो अलग-अलग जगहों पर दो की मौत हो गई।

चारधाम यात्रा अपडेट, अब तक 23 लाख रजिस्ट्रेशन; 2 श्रद्धालुओं की मौत
Mohammad Azamलाइव हिन्दुस्तान,उत्तरकाशीSat, 11 May 2024 10:03 PM
ऐप पर पढ़ें


गुरुवार को शुरू हुई चार धाम यात्रा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। मिली जानकारी के अनुसार, अब तक 23 लाख लोगों ने इस यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया और पहले दिन 46 हजार श्रद्धालुओं ने हिमालय की गोदी में स्थित इन पहाड़ियों के दर्शन किए। इस दौरान दो अलग-अलग जगहों पर दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि शुक्रवार शाम तक केदारनाथ धाम तक 29030 यात्री, गंगोत्री धाम में 5203 यात्री, यमुनोत्री में 12193 यात्रियों ने दर्शन किए। अधिकारियों ने बताया कि बद्रीनाथ धाम के कपाट रविवार को खोले जाएंगे।

यमुनोत्री में हार्ट अटैक से दो श्रद्धालुओं की मौत
चारधाम यात्रा के पहले दिन बीते शुक्रवार को यमुनोत्री की यात्रा पर आए दो श्रद्धालुओं की हार्ट अटैक से मौत हो गई। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पंचनामे की कार्रवाई पूरी कर शनिवार को शव परिजनों के सुपुर्द कर दिए। मिली जानकारी के अनुसार बीते शुक्रवार की शाम को दो अलग-अलग स्थानों पर हार्ट अटैक से श्रद्धालुओं की मौत हो गई। यमुनोत्री में मध्य प्रदेश के सागर जिले के 71 वर्षीय रामगोपाल और उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले की 69 वर्षीय विमला देवी की मौत हो गई। एसएचओ संतोष सिंह कुंवर ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि पंचनामे की कार्रवाई के बाद यात्रियों के शव परिजनों को सौंप दिया गया है।

इस बारे में जानकारी देते हुए बरकोट पुलिस ने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पीएसओ संतोष कुंवर ने कहा कि उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग ने तीर्थयात्रियों के लिए पहले ही गाइडलाइन जारी की है। सलाह के अनुसार, एक हफ्ते पहले जारी सलाह में स्वास्थ्य विभाग ने कहा था कि यात्रा की योजना बनाने के लिए सात दिनों का समय दिया जाए। उनका कहना है कि तीर्थस्थल 2000 से 4000 हजार मीटर ऊपर हैं। ऐसे में ऑक्सीजन की कमी के कारण वृद्ध यात्रियों को यात्रा में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है और उनकी मौत भी हो सकती है।