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ऐसे कैसे होगा उत्तराखंड का विकास,हर दूसरे बच्चे में खून की कमी, नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे में चौंकाने वाले खुलासे

कार्यालय संवाददाता, हल्द्वानी Himanshu Kumar Lall
Sat, 27 Nov 2021 01:59 PM
ऐसे कैसे होगा उत्तराखंड का विकास,हर दूसरे बच्चे में खून की कमी, नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे में चौंकाने वाले खुलासे

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उत्तराखंड में नौनिहालों का स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा है। नौनिहालों की आधी से ज्यादा आबादी खून की कमी से पीड़ित (एनमिक) है। कोरोना की तीसरी लहर जिसे बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक बताया गया है को देखते हुए यह स्थिति ज्यादा चिंता करने वाली है। स्वास्थ्य विभाग के लिए भी एक अलर्ट है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस) ने राज्य में स्वास्थ्य को लेकर अपनी रिपोर्ट जारी की है। जारी रिपोर्ट में पांच से छह वर्ष के बीच के बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर दिए गए आंकड़े चौंकाने वाले हैं।

आंकड़ों के मुताबिक राज्य में शहरीय क्षेत्र के 63.8 प्रतिशत बच्चे एनमिक हैं यानी खून की कमी से पीड़ति हैं। वहीं ग्रामीण इलाकों में यह आंकड़ा 56.6 प्रतिशत है। राज्य में वर्तमान में कुल 58.8 प्रतिशत बच्चे एनमिक हैं। हैरानी की बात यह है कि 2015-16 में राज्य में 59.8 प्रतिशत बच्चे एनमिक थे और पांच साल बाद सरकारें केवल इन एनमिक बच्चों की संख्या में मात्र एक प्रतिशत की कमी कर पाईं। अगर कोरोना की तीसरी लहर शुरू हुई तो सबसे ज्यादा खतरा कुपोषित बच्चों को होगा। 

एनीमिक होने का असर
विशेषज्ञों का कहना है कि एनमिक बच्चों का इम्यून सिस्टम भी बहुत कमजोर होता है। कोई गंभीर बीमारी होने पर मृत्यु की आशंका बढ़ जाती है। कुपोषण से बच्चों के वजन और ऊंचाई दोनों असमान्य हो जाती हैं। मस्तिष्क का विकास कम हो जाता है। बच्चे के व्यवहार में बदलाव होने लगता है। चिड़चिड़ापन, सुस्ती या चिंतित दिखाई देना लगता है। 

राज्य में 42 फीसदी गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित
नैनीताल।  नैनीताल क्लब में शुक्रवार को एनीमिया मुक्त भारत पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसका शुभारंभ सीएमओ डॉ. भागीरथी जोशी ने किया। उन्होंने बताया कि एनीमिया की व्यापकता में कमी से मातृ एवं शिशु जीवित रहने की दर में सुधार लाया जा सकता है। सीएमओ ने बताया कि प्रधानमंत्री की व्यापक योजना के तहत एनीमिया मुक्त भारत (एएमबी) कार्यक्रम शुरू किया गया है।

इसमें 6 से 59 महीने के बच्चों, किशोरों, 15 से 49 वर्ष की प्रजनन आयु की महिलाओं को शामिल किया गया है। राज्य में पांच साल तक के 59.8 प्रतिशत बच्चे खून की कमी यानी एनीमिया की बीमारी से ग्रसित हैं। जबकि 42.4 प्रतिशत गर्भवती, 50.1 प्रतिशत धात्री महिलाएं, 15-19 आयु वर्ग में 20 प्रतिशत किशोर व 42.4 प्रतिशत किशोरियां भी इस बीमारी से पीड़ित हैं। एसीएमओ डॉ. रश्मि पंत ने बताया कि एनीमिया एक गंभीर समस्या बन रही है और इसके लिए पोषण पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। 
 

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