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हेमकुंड साहिब के कपाट शीतकाल के लिए बंद,‘जो बोले सो निहाल’ के जयकारों से गूंज उठा गुरुद्वारा

पूर्व वर्षों तक श्री हेमकुंड साहिब के कपाट सुबह 9.30 से 10 बजे के बीच बंद किए जाते थे, लेकिन मौसम अनुकूल होने और तीर्थ यात्रियों को सुविधा देने के लिए इस बार हेमकुंड गुरुद्वारे के कपाट दोपहर 1.30 बजे बंद हुए। कपाट बंद होने की परिक्रिया सुबह दस बजे शुरू की गई। मुख्य ग्रंथी भाई मिलाप सिंह ने सबसे पहले सुखमनी साहिब का पाठ किया। सिख यात्रियों ने हिम सरोवर में स्नान कर सुखमनी पाठ में शिरकत की। जिसके बाद 11.40 पर सबद कीर्तन प्रारंभ हुआ जो 12.30 बजे तक चला। 12.40 पर ग्रंथी मिलाप सिंह व कुलवन्त सिंह ने वर्ष की अंतिम अरदास कर तीर्थ यात्रियों को हेमकुंड की महिमा व विशेषता सुनाई। अंतिम अरदास की समाप्ति के बाद मुख्य ग्रंथी ने श्री गुरुग्रंथ साहिब को विधिविधान से दरबार साहिब से उठाकर अपने सर पर रखा, जिसके बाद पूरा गुरुद्वारा जो बोले सो निहाल के जयकारों से गूंज उठा। पंच प्यारों की अगुवाई में गुरुग्रंथ साहिब को गुरुद्वारे की नीचे बने सुरक्षित स्थान सच खंड सुशोभित किया गया। जिसके बाद मुख्यग्रंथी की अगुवाई में श्रद्धालुओं ने हिम सरोवर की परिक्रमा पूरी होने के बाद 1.30 बजे गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष सरदार जनक सिंह की मौजूदगी में कपाट बंद किए गए।

लोकपाल के कपाट भी बंद
भ्यूंडार घाटी के क्षेत्रपाल लोकपाल लक्ष्मण जी के कपाट भी बुधवार को शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं। भ्यूंडार घाटी के लोगों ने अपने घरों से बने अनाज का प्रसाद बनाकर भगवान लक्ष्मण, राम व सीता की पूजा अर्चना की व क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। स्थानीय निवासी गिरीश चौहान, किशोर पंवार ने बताया कि प्रतिवर्ष श्री हेमकुंड साहिब के कपाट खुलने पर लोकपाल मंदिर के कपाट खुलते हैं।  

 
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  • Web Title:hemkunt sahib sacred portals closed for winter amid huge gathering of devotees