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हेमकुंड साहिब के कपाट दर्शन को खुले, तीर्थ यात्रियों की भीड़

गुरुग्रंथ साहब के दर्शन और शबद कीर्तन के बाद सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में बना हुआ हलवा, दलिया और चाय दी गई। सभी यात्री ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनो तरह से रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं।

हेमकुंड साहिब के कपाट दर्शन को खुले, तीर्थ यात्रियों की भीड़
Himanshu Kumar Lallजोशीमठ,संवाददाता। Sat, 25 May 2024 07:20 PM
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सिखों के हिमालयी तीर्थ श्री हेमकुंड साहिब के कपाट विधि विधान से वर्ष की पहली अरदास के साथ शनिवार सुबह 9.30 बजे दर्शनार्थ खोल दिए गए है। इस अवसर पर पूरे गुरुद्वारा साहिब को फूलों और विद्युत प्रकाश से सजाया गया था।

कपाट खुलते समय 3500 तीर्थयात्री हेमकुंड पहुंचे। इसी के साथ हिंदुओं की आस्था के प्रतीक लोकपाल(लक्ष्मण मंदिर) के कपाट विधि विधान के साथ आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए। शनिवार को सुबह 6 बजे घांघरिया से संगत हेमकुंड के लिए पैदल रवाना हुई जो लगभग साढ़े आठ बजे हेमकुंड पहुंची।

प्रातः साढ़े नौ बजे पंजाब से आए बैंडों की मधुर स्वर लहरियों के बीच गुरूग्रंथ साहब को जो बोले सो निहाल और सत नाम वाहे गुरू के जयघोषों के बीच पंच प्यारों की अगुवाई में भक्तों के हुजूम के साथ सचखंड से दरबार साहब में लाकर सुशोभित किया जायेगा। सचखंड से बाहर लाये जा रहे गुरुग्रंथ साहब का दर्शन करने वालों की भीड़ उमड़ी रही।

ग्रंथी मिलाप सिंह और कुलवंत सिंह की अगुवाई में 10 बजे सुखमनी साहब का पाठ शुरू हुआ। सुखमनी साहब का पाठ सुनने से पहले भक्तों ने बर्फ से ढके हिम सरोवर में स्नान कर दरबार साहब में मत्था टेका। सुखमनी साहब का पाठ के बाद प्रातः 11 से सवा बारह बजे तक शबद कीर्तन हुए।

उसके बाद साढ़े बारह बजे अरदास और हुक्मनामा लिया गया। गुरुग्रंथ साहब के दर्शन और शबद कीर्तन के बाद सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में बना हुआ हलवा, दलिया और चाय दी गई। यात्रा में आने वाले सभी यात्री ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनो तरह से अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं।

बताया कि दर्शन के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। इस अवसर पर ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेन्द्र जीत सिंह बिन्द्रा, ब्रिगेडियर एमएस ढिल्लो, सरदार गुरूनाम सिंह आदि मौजूद रहे।

हेमकुंड पैदल यात्रा मार्ग हुआ गुलजार
कपाट खुलते ही हेमकुंड पैदल यात्रा मार्ग और मोटर मार्ग की चट्टीयां एवं बाजार गुलजार हो गए है। यात्रा मार्ग में स्थित गोविन्दघाट, पुलना, जंगलचट्टी, भ्यूंडार, कांजिला, घांगरिया, अटलकोटी तल्ली, अटलाकोटी मल्ली, सीढ़ी और हेमकुंड के निकट दुकान और ढाबे खुल चुके हैं ।

गोविन्दघाट और घांगरिया में तीर्थयात्रियों के रहने के लिए बेहतरीन होटल लाज तो अन्य चट्टीयों में तीर्थयात्रियों के भोजन और जलपान की सभी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध है। यात्रा मार्ग में तीर्थयात्रियों के आवागमन में सहायता देने के लिए 30 डंडी कंडी और 650 से अधिक घोड़े खच्चर पहुंच चुके हैं।