hearing fails to be held in consumer commission in uttarakhand - उपभोक्ता आयोग : फरियादी 1200 से ज्यादा और सुनवाई ठप DA Image
6 दिसंबर, 2019|2:03|IST

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उपभोक्ता आयोग : फरियादी 1200 से ज्यादा और सुनवाई ठप

राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग से इंसाफ की उम्मीद लगाए राज्य के 1200 से ज्यादा लोग मुश्किल में हैं। चार महीने से आयोग में अपीलों पर सुनवाई और कार्रवाई बंद है। यह स्थिति सदस्यों की नियुक्ति न होने की वजह से पैदा हुई है। सुनवाई का कोरम पूरा करने के लिए तीन सदस्यीय आयोग में कम से कम दो लोगों का होना जरूरी है।  वर्तमान में आयोग में अध्यक्ष तो जरूर हैं, लेकिन उनके अधीन आने वाले सदस्य के दोनों ही पद एक अगस्त से खाली हैं। तीन सदस्यीय आयोग पूर्व सदस्य वीना शर्मा और बलवीर गुप्ता का कार्यकाल जुलाई में खत्म हो गया था। लंबे से खाली चल रहे अध्यक्ष के पद को जस्टिस डीएस त्रिपाठी की नियुक्ति से 17 जुलाई को भर दिया गया था। दोनों सदस्यों का कार्यकाल उसी महीने खत्म हो जाने से जस्टिस त्रिपाठी आयोग में अकेले रह गए हैं। सुनवाई न होने का खामियाजा उन उपभोक्ताओं को उठाना पड़ रहा है, जिन्होंने इंसाफ की उम्मीद में अर्जी लगाई है।

मांगे दिशानिर्देश: राज्य सरकार ने राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया के लिए केंद्र सरकार से दिशानिर्देश मांगे हैं। खाद्य सचिव सुशील कुमार ने केंद्र सरकार को पत्र भेजकर राज्य की उलझन से अवगत कराया गया है। उन्होंने नए एक्ट की अधिसूचना के बाबत स्थिति स्पष्ट करने की गुजारिश की है। सरकार केंद्र के जवाब के इंतजार में है।


उपभोक्ता परेशान

  • 1149 प्रथम अपील पर अब तक न हो पाई सुनवाई
  • 121 उपभोक्ता परिवाद भी लटके हुए हैं अधर में
  • 01 अगस्त से ठप हो आयोग में सुनवाई की प्रक्रिया
  • 02 सदस्यों के पद हैं रिक्त, कोरम के लिए सदस्य जरूरी

दो ऐक्ट से उलझन में है प्रदेश सरकार 
आयोग में सदस्यों की नियुक्ति उपभोक्ता संरक्षण बिल के तहत की जाती रही है। पर, केंद्र सरकार नया बिल केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण बिल-2019 मंजूर कर चुकी है। नये बिल में नियुक्ति की प्रक्रिया अलग है। सरकार की उलझन ये है कि नया ऐक्ट लागू होने से पुराना ऐक्ट स्वत: खत्म हो गया पर नये ऐक्ट की अधिसूचना जारी न होने से वो भी पूरी तरह अस्तित्व में नहीं है। कुछ समय पहले न्याय विभाग से राय ली गई थी लेकिन इस मुद्दों पर स्थिति साफ नहीं हो पाई।


बीमा धोखाधड़ी की हैं ज्यादा शिकायतें
आयोग में सबसे ज्यादा शिकायतें बीमा को लेकर हैं। बीमा कंपनियां बीमा करते वक्त जो वादे करती हैं, उनमें कई कंपनियों बाद में मुकर जाती है। ऐसे तर्क-तथ्य दिए जाते हैं, जिससे उपभोक्ता को उसके बीमा का लाभ न मिल सके। दूसरे सबसे ज्यादा मामलों बिजली कनेक्शन, बिल, बिल्डर आदि से जुड़े हैं। 

 

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