class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

पलायन रोकने के लिए कारगर हो सकती है हंस फाउंडेशन की ये योजना

हंस फाउंडेशन के संस्थापक भोले महाराज और माता मंगला का कहना है कि उत्तराखंड में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में फाउंडेशन कार्य कर रही है। अब पलायन रोकने की दिशा में काम करना शुरू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जैविक खाद का निर्माण कर यहां के लोगों को रोजगार से जोड़ा जाएगा। इससे पलायन रोकने में सहायता मिलेगी।

यह बात बुधवार को उन्होंने कनखल में जगदगुरु शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम महाराज से मुलाबात के दौरान कही। उन्होंने कहा कि पहाड़ों में ग्रामीणों के पास जमीन के छोटे-छोटे टुकड़े है। जहां वे प्राकृतिक तरीके से खाद को पैदा कर सकते हैं। माता मंगला ने दावा किया कि रिसर्च के बाद पता चला कि प्राकृतिक खाद के दो साल के अंदर जमीन को यूरिया फ्री कर देगी। अमेठी और रायबरेली में खाद बनाने का काम शुरू किया जा चुका है। 19 हजार से अधिक खाद बनाने के ट्रेनर तैयार हो चुके है, जो उत्तराखंड में ग्रामीणों को निशुल्क खाद बनाने का प्रशिक्षण देंगे। 

फाउंडेशन के कार्यों की सहारना की 

जगदगुरु शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम ने कहा कि हंस फाउंडेशन देश के कई राज्यों में सेवा भाव के काम कर रहा है। सेवा भाव का काम संत व्यक्तित्व वाले ही करते है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में गरीब लोगों के लिए फाउंडेशन ने बेहतरीन काम किये है। अब पलायन रोकने को लेकर फाउंडेशन एक सोच को लेकर सामने आया है तो सभी को सहयोग करना चाहिए। क्योंकि पलायन को लेकर राज्य सरकार भी गंभीर है। 

उत्तराखण्ड के इस गांव में देवता के डर से ग्रामीणों ने तोड़ दिए शौचालय

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Hans Foundation to work on migration
गरीबों के हिस्से का सस्ता राशन बाजार में बेचते पकड़े गए दो डीलर, मुकदमाउत्तराखण्ड: इस गांव में देवता के डर से ग्रामीणों ने तोड़ दिए शौचालय