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हल्द्वानी में 18 साल बाद अतिक्रमण हटाने पर ऐसा क्यों हुआ बवाल? हर कोई पूछ रहा यह सवाल 

इससे पहले वर्ष 2006 में रेलवे की भूमि से अतिक्रमण हटाए जाने के दौरान वनभूलपुरा के गफूर बस्ती क्षेत्र में अतिक्रमण ध्वस्त किए जाने के दौरान पुलिस और क्षेत्र के लोगों के बीच झड़पें हुईं थीं।

हल्द्वानी में 18 साल बाद अतिक्रमण हटाने पर ऐसा क्यों हुआ बवाल? हर कोई पूछ रहा यह सवाल 
Himanshu Kumar Lallहल्द्वानी, हिन्दुस्तानFri, 09 Feb 2024 09:28 AM
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हल्द्वानी का वनभूलपुरा क्षेत्र 18 साल बाद फिर से क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने को लेकर हुई हिंसा के बाद चर्चा में आया है। क्षेत्र में प्रशासन के क्षेत्र में मदरसे और धार्मिक स्थल से अतिक्रमण हटाने के दौरान हुई हिंसा में 6 लोगों की मौत ने पूरे क्षेत्र को अशांत कर दिया है।

इससे पहले वर्ष 2006 में रेलवे की भूमि से अतिक्रमण हटाए जाने के दौरान वनभूलपुरा के गफूर बस्ती क्षेत्र में अतिक्रमण ध्वस्त किए जाने के दौरान पुलिस और क्षेत्र के लोगों के बीच झड़पें हुईं थीं। साथ ही वनभुलपुरा में हाईकोर्ट के अतिक्रमण हटाने के आदेश के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया था, लेकिन पुलिस व प्रशासन की सुजबूझ के चलते मामला शांत रहा।

जिससे के बाद सुप्रीम कोर्ट की रोक से क्षेत्र के 4600 परिवारों को राहत मिली। हल्द्वानी के वनभुलपुरा का एक हिस्सा नजूल व रेलवे की भूमि पर बसे होने के कारण विवादों में रहता है। वर्ष 2006 में रेलवे ने प्रशासन की मदद से वनभुलपुरा के गफूर बस्ती क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की।

इस दौरान क्षेत्र में रह रहे सैकड़ों घरों को ध्वस्त कर दिया गया। इस दौरान क्षेत्र में पुलिस और लोगों के बीच कई बार झड़पें हुई। लेकिन बाद में रेलवे के अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी होने के बाद मामला शांत हो गया।

बाद में रेलवे ने फिर से क्षेत्र में विस्तार के लिए करीब 4600 घरों को चिह्नित कर इज्जतनगर में वाद चलाया। जिसमें सारे परिवारों को अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस जारी किए गए। लेकिन रेलवे मामले में अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही शुरू नहीं कर पाया। 

मामले में बाद में आरटीआई कार्यकर्ता रविशंकर जोशी की ओर से रेलवे की जमीन से अतिक्रमण हटाए जाने को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। जिसपर हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान 20 दिसंबर 2022 को क्षेत्र में अतिक्रमण की जद में आए 4600 घरों को ध्वस्त करने के आदेश जारी किए।

हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद पूरा प्रकरण राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियां बना। देश-विदेश का मीडिया अतिक्रमण प्रभावित क्षेत्र के लोगों की करवरेज के लिए वनभुलपुरा पहुंचा। इस दौरान पूरे क्षेत्र में कई दिनों तक तनाव फैला रहा। लेकिन तत्कालीन प्रशासन व पुलिस की सुझबूझ के चलते माला शांत रहा।

मामले में वनभुलपूरा से अतिक्रमण हटाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद 8 फरवरी 2023 को हाईकोर्ट के अतिक्रमण हटाने के आदेश पर रोक लगा दी। जिससे क्षेत्र के हजारों परिवारों में राहत मिली।

लेकिन गुरुवार को वनभूलपुरा के मलिक का बगीचा क्षेत्र में मदरसे और धार्मिक स्थल से अतिक्रमण हटाने के दौरान पूरे क्षेत्र में हिंसा फैल गई। जिसमें पांच लोगों की मौत ने 18 साल बाद फिर से पूरी हल्द्वानी को दहला दिया है। प्रशासन व पुलिस की विफलता के चलते हुए इस घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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