ट्रेंडिंग न्यूज़

Hindi News उत्तराखंडछोड़ दी थी जिंदगी की आस...उत्तरकाशी टनल हादसे में ऐसे मिली दोबारा जिंदगी 

छोड़ दी थी जिंदगी की आस...उत्तरकाशी टनल हादसे में ऐसे मिली दोबारा जिंदगी 

उत्तरकाशी टनल हादसे में 41 मजदूरों को दोबारा जिंदगी मिली है। सिलक्यारा में भूस्खलन होने के बाद पुष्कर ऐरी ने बताया कि सुरंग में फंसने के बाद उन्होंने जिंदगी की आस छोड़ दी थी।

छोड़ दी थी जिंदगी की आस...उत्तरकाशी टनल हादसे में ऐसे मिली दोबारा जिंदगी 
Himanshu Kumar Lallटनकपुर, संवाददाता। Sun, 03 Dec 2023 10:43 AM
ऐप पर पढ़ें

उत्तरकाशी टनल हादसे में 41 मजदूरों को दोबारा जिंदगी मिली है। सिलक्यारा में भूस्खलन होने के बाद पुष्कर ऐरी ने बताया कि सुरंग में फंसने के बाद उन्होंने जिंदगी की आस छोड़ दी थी। कहा, कि शुरुआती 12 घंटे खौफनाक थे। 12 घंटे बाद पाइप से सुरंग में पहली आवाज आई तो लगा कि जिंदगी बच सकती है।

शुक्रवार देर रात घर पहुंचे पुष्कर के लिए वह लम्हा बेहद खुशनुमा रहा। मां गंगा देवी, पिता राम सिंह और भाभी ममता ऐरी ने पुष्कर को गले लगा लिया। दूसरे दिन पुष्कर ने 17 दिन तक सुरंग में फंसे रहने की दास्तां सुनाई। पुष्कर ने बताया कि 11 नवंबर की सुबह करीब पांच बजे भूस्खलन शुरू हुआ वहां से बंद सुरंग तक करीब दो किमी का सफर था, जिसमें वह लोग कैद हुए थे।

बताया कि शुरुआत में उन सभी लोगों ने सुरंग से बाहर निकलने की आस छोड़ दी थी। क्योंकि छुट्टी की वजह से बाहर उनकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं था। 14 घंटे बाद मिला भोजन टनकपुर। सुबह पांच बजे भूस्खलन होने के बाद शाम करीब सात बजे उन्हें भोजन मिला।

पुष्कर ने बताया कि करीब 14 घंटे बाद सभी श्रमिकों की संख्या को गिनने के बाद ड्राई फ्रूट दिए गए। बताया कि ड्राई फ्रूट में मुरमुरे, काजू, बादाम, किश्मिस दिए जाते थे। बताया कि उन्हें यह भोजन तेरह दिन तक दिया गया। तेरह दिन बाद उन्हें पनीर, बिरयानी, दाल, दलिया आदि दिया जाने लगा


 

हिन्दुस्तान का वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें