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कैंसर और किडनी डायलिसिस वाले शिक्षकों का ही होगा तबादला: अरविंद पांडे

कैंसर और किडनी की बीमारी से पीड़ित शिक्षकों का तबादले का इंतजार खत्म होने जा रहा है। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने कैंसर और किडनी में डायलिसिस की स्थिति में पहुंच चुके शिक्षकों की सूची तीन दिन में तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

तबादला कानून के तहत गठित मुख्य सचिव समिति से इनके तबादले की अनुमति लेकर इनको इच्छित और सुगम स्थानों पर तैनाती दी जाएगी। सोमवार को सचिवालय में मीडिया से बातचीत में शिक्षा मंत्री ने बताया कि जो शिक्षक स्वयं बीमार होंगे या उनके पति या पत्नी बीमार होंगे अथवा उनके बच्चे इन बीमारियों से ग्रसित होंगे, केवल उनका ही तबादला किया जाएगा। तबादले के लिए बनने वाली पहली लिस्ट में केवल इन दो बीमारियों से पीड़ित शिक्षक शामिल किए जाएंगे। बाकी शिक्षकों के लिए तबादला कानून के तहत प्रक्रिया अपनाई जाएगी। मालूम हो कि तबादला कानून में बीमारी के श्रेणी में कैंसर, ब्लड कैंसर, एड्स/एचआईवी-पॉजीटिव, हृदय रोग(बाइपास या एंजियोप्लास्टी हुई हो), किडनी रोड (दोनों किडनी फेल होने पर डायलिसिस पर निर्भर, या किडनी ट्रांसप्लांट हुआ हो), टीबी (दोनों फेफड़े में इंफेक्शन हो या एक फेफड़ा पूरी तरह खराब हो गया हो), रीड़ की हड्डी टूटना, मिर्गी, मानसिक रोग को रखा गया है। पर, शिक्षा मंत्री ने केवल कैंसर और डायलिसिस को ही वरीयता दी है।

अतिथि शिक्षकों का बढ़ा इंतजार: अतिथि शिक्षकों को नियुक्ति के लिए अभी कुछ और इंतजार करना पडेग़ा। शिक्षा मंत्री का कहना है कि पहले सरकार प्रमोशन और नई भर्ती वाले शिक्षकों को नियुक्त करना चाहती है। इनकी नियुक्ति से स्कूलों में रिक्त पदों की वास्तविक स्थिति सामने आ जाएगी। इसके बाद सभी उपलब्ध पदों पर अतिथि शिक्षकों को नियुक्त किया जाएगा। मालूम हो कि हाईकोर्ट ने 14 अगस्त के आदेश में सरकार को अतिथि शिक्षक नियुक्त करने की छूट दी है और एक तय समयावधि में उनकी नियुक्ति को कहा है।

वर्ष 2008 का कोटिकरण रहेगा लागू
मंत्री ने साफ किया है कि नई नियुक्ति, पोस्टिंग व तबादला में वर्ष 2008 का कोटिकरण लागू रहेगा। एलटी से प्रवक्ता कैडर में होने वाले प्रमोशन, लोक सेवा व अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से भर्ती होने वाले शिक्षकों को इसी कोटिकरण के अनुसार सुगम-दुर्गम में तैनाती दी जाएगी। मालूम हो 2008 के बाद तीन बार और कोटिकरण हुआ है, पर सरकार ने विवादों को देखते हुए 2008 को ही लागू रखने का निर्णय किया है।

एलटी-प्रवक्ता के सामान्य तबादले मुश्किल
एलटी और प्रवक्ता कैडर के शिक्षकों के तबादले अब खटाई में जाते दीख रहे हैं। तबादला कानून के अनुसार 10 जून तक तबादल हो जाने चाहिए। शिक्षा विभाग की मांग पर उसे तीन बार समय विस्तार मिल चुका है। इसके तहत 10 अगस्त तक तबादले हो ही जाने चाहिए थे। अब तक केवल बेसिक शिक्षकों के ही तबादले हुए हैँ। चूंकि अब शैक्षिक सत्र का काफी वक्त बीत चुका है, ऐसे में तबादलों का औचित्य भी नहीं रह जाता।

सीधी भर्ती पर अडिग
प्रधानाचार्य के 50 फीसदी पदों को सीधी भर्ती से भरने के अपने फैसले पर अडिग हैं। उन्होंने कहा कि नई भर्ती से आने वाले युवा नई सोच और ऊर्जा के साथ आते हैं। इस भर्ती में आवेदन करने पर विभाग के एलटी और प्रवक्ता को कुछ अतिरिक्त वरीयता भी दी जाएगी।

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  • Web Title:government to draft list of teachers suffering from cancer and kidney diseases