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31 अक्तूबर, 2020|4:00|IST

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कोरोना से निपटने की सरकारी योजनाएं हवाई, छह माह में जांच लैब तक नहीं बनी 

 sp  mla  subhash rai

कोरोना महामारी से निपटने के सरकारी दावे धरातल पर पूरी तरह उतर नहीं रहे हैं। सरकार ने बीते एक पखवाड़े में कोरोना मरीजों के इलाज से जुड़े तीन बड़े दावे किए।

इसमें एसिम्टोमैटिक मरीजों को होम क्वारंटाइन, निजी अस्पतालों में कोरोना इलाज और नई जांच लैब बनाना शामिल रहीं, लेकिन अब तक कोई भी फैसला पूरी तरह लागू नहीं हो सका है।

स्थिति से है कि अपर सचिव स्वास्थ्य खुद हल्द्वानी आकर इन सुविधाओं को बढ़ाने का दावा कर गए थे। मगर जब सचिव के दावे ही लागू नहीं हो पा रहे तो बाकी के हालात का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है। कोरोना संक्रमण फैले छह माह हो चुके हैं मगर अल्मोड़ा और रुद्रपुर में आज तक कोरोना जांच को एक लैब तक स्थापित नहीं हो पाई है।

अपर सचिव के आदेश अधूरे: अपर सचिव स्वास्थ्य ने हाल में हल्द्वानी पहुंचकर कोविड अस्पताल एसटीएच का निरीक्षण किया था। दो दिनों तक कुमाऊं में कोरोना जांच की नई लैब सुविधा शुरू करने समेत कई दावे किए थे। अब तक यह पूरे नहीं हो सके हैं।

निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजों का इलाज नहीं
निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजों के इलाज की सुविधा देने का वायदा किया गया। मगर आज तक किसी निजी अस्पताल में इलाज शुरू नहीं हो पाया है। कई मरीज खुद निजी अस्पतालों में इलाज कराने दिल्ली तक दौड़ रहे हैं। मगर सरकार की शर्त है कि एनएबीएच में पंजीकृत अस्पताल ही कोविड मरीजों का इलाज कर पाएंगे। मगर प्रदेश सरकार के अस्पताल तक इसमें पंजीकृत नहीं है। ऐसे में नियमों की गठरी निजी अस्पतालों पर थोपने की कोशिश कर रही है। चाहते हुए भी कोई अस्पताल कोविड मरीजों को इलाज नहीं दे पा रहा है। दूसरी समस्या इलाज के दामों को लेकर भी है।  

छह माह में कोरोना की जांच लैब तक नहीं बनाई
कुमाऊं के साथ कोरोना जांच लैब बनाने में सबसे ज्यादा भेदभाव हुआ है। सत्ता पक्ष से जुड़े नेता तक कुमाऊं में नई कोरोना जांच लैब शुरू नहीं करवा पा रहे हैं। अल्मोड़ा, ऊधमसिंहनगर में प्रस्तावित कोरोना जांच लैब स्थापित नहीं हो सकी है। हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज की लैब को मशीन दी गई मगर यहां स्टाफ की दिक्कत है। मुक्तेश्वर वेटनरी संस्थान में गिनती के सैंपल जांचे जा रहे हैं। इस तरह कुमाऊं के छह जिलों की जनता के लिए केवल दो सरकारी जांच केंद्र हैं। हाल में तीन निजी लैब को भी जांच की अनुमति दी गई है। जबकि गढ़वाल क्षेत्र से तुलना करें तो वहां चार सरकारी जांच केंद्र करीब तीन माह से संचालित हैं। इसके अलावा चार-पांच प्राइवेट लैब भी कोरोना जांच की सुविधा दे रहे हैं। 


होम क्वारंटाइन की सुविधा पहाड़ के लिए दूर की कौड़ी
ऐसे कोरोना मरीज जिनमें बीमारी का कोई लक्षण नहीं है, उन्हें सरकार ने 15 अगस्त से होम क्वारंटाइन सुविधा देने का ऐलान किया था। मगर कुमाऊं के किसी पहाड़ी जिले (पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, बागेश्वर और चम्पावत) में अब तक यह लागू नहीं हो सका है। नैनीताल और ऊधमसिंहनगर में गिनती के प्रभावशाली लोग ही इसका फायदा उठा पाए हैं। स्वास्थ्य विभाग इसके पीछे अपने तर्क दे रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि जो नियम धरातल पर लागू ही नहीं हो सकता था, उसे लेकर जनता के बीच भ्रम फैलाने की जरूरत क्या थी। अब लोग होम क्वारंटाइन की गुहार लगा रहे हैं मगर नियमों के बोझ तले उनके प्रार्थनापत्र दम तोड़ रहे हैं।

कुमाऊं में अब तक 6.5 हजार कोरोना संक्रमित, 68 की मौत 
कुमाऊं के छह जिलों में अब तक एक लाख 35 हजार 896 लोगों की कोरोना जांच हो चुकी है। इसमें गुरुवार दोपहर तक छह हजार 713 लोग कोरोना संक्रमित मिले हैं। कुमाऊं मंडल में नैनीताल और ऊधमसिंहनगर जिले कोरोना से सबसे ज्यादा संक्रमित हुए हैं। कुल मरीजों में 70 फीसदी लोग इन्हीं दोनों जिलों के रहने वाले हैं। प्रदेश में अब तक कोरोना संक्रमित 219 लोगों की मृत्यु हो चुकी है, जिसमें से 68 मरीज कुमाऊं मंडल से रहे हैं।


कुमाऊं में कोरोना की स्थिति
जिला    मरीज    मृत्यु 

अल्मोड़ा    416    02
बागेश्वर    222    01
चम्पावत    270    02
नैनीताल     2336    44
पिथौरागढ़    236    02
ऊधमसिंहनगर     3233    17

होम क्वारंटाइन के नियम कड़े हैं। पहाड़ी जिलों में इन्हें लागू करने में दिक्कत आ रही है। नैनीताल और ऊधमसिहंनगर के कुछ क्षेत्रों में कोविड मरीजों को लाभ दिया जा रहा है। फिलहाल निजी अस्पतालों में कोविड मरीजों का इलाज सुविधा नहीं है।
डा. शैलजा भट्ट  निदेशक स्वास्थ्य कुमाऊं

 

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  • Web Title:government schemes insufficient to treat covid 19 patient amid corona virus pandemic in haldwani