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उत्तराखंड के अस्पतालों में ‘एसटीपी’ और ‘ईटीपी’ जरूरी

राज्य के सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और इफुलेंट ट्रीटमेंट प्लांट होना अनिवार्य कर दिया गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने मंगलवार को सभी सीएमओ को इसकी जानकारी दी।  मंगलवार को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने स्वास्थ्य महानिदेशालय में कार्यशाला के दौरान यह जानकारी दी। पीसीबी के पर्यावरण अभियंता अंकुर कंसल ने बताया कि एनजीटी के आदेशों के संदर्भ में गठित राज्य स्तरीय बायो मेडिकल कमेटी के निर्देश पर कार्यशाला हुई। इसमें स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को बताया गया कि सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को तीन महीने में अनिवार्य रूप से जिले में कुल कचरे का उत्पादन और उसमें से कितने का निस्तारण हो पाया इसकी जानकारी देनी है। बैठक के दौरान सरकारी अस्पतालों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में 2002 से पंजीकरण की बाध्यता से छूट मांगी है। साथ ही अस्पतालों ने बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण के लिए पर्याप्त बजट देने और एसटीपी निर्माण के लिए बजट का अनुरोध किया है। इस दौरान बायो मेडिकल वेस्ट उठाने के खर्च को भी अस्पतालों ने बहुत अधिक बताया। बैठक के दौरान कई जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारी मौजूद थे। 


प्रसव के सात दिन में प्रोत्साहन राशि 
बैठक के दौरान स्वास्थ्य विभाग ने सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए कि जननी सुरक्षा योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने वाली महिलाओं को एक सप्ताह के भीतर प्रोत्साहन राशि दी जाए। कई जिलों में इस राशि के देरी से मिलने पर उन्होंने नाराजगी जताई। हालांकि प्रोत्साहन राशि नहीं मिलने के पीछे एक वजह ये भी है कि कई महिलाओं के खाते नहीं हैं। योजना में ग्रामीण क्षेत्रों में प्रोत्साहन राशि 1400 रुपये जबकि शहरी क्षेत्रों में 1000 रुपये राशि प्रदान की जाती है।   

 

 

 
 

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  • Web Title:government hospitals to have stp and etp in government and private hospitals in uttarakhand