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6 मार्च, 2021|6:41|IST

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कोरोना से जंग के बीच सरकारी डॉक्टरों का ओपीडी बहिष्कार का एलान, मरीजों को होगी परेशानी

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राज्य के सरकारी डॉक्टर बुधवार से ओपीडी में मरीजों को नहीं देखेंगे। इससे सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा संघ की प्रदेश कार्यकारणी की मंगलवार को गांधी अस्पताल में आपात बैठक हुई, जिसमें बुधवार से ओपीडी बहिष्कार के फैसले पर अडिग रहने का निर्णय लिया गया।

स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ अमिता उप्रेती ने संघ के पदाधिकारियों को फोन कर ओपीडी बहिष्कार के फैसले को टालने का अनुरोध किया लेकिन संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार डॉक्टरों की मांगों को लेकर गंभीर नहीं है। ऐसे में ओपीडी बहिष्कार का फैसला वापस ले पाना संभव नहीं है।

संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ नरेश नपल्च्याल और महामंत्री डॉ मनोज वर्मा ने कहा कि जब तक सरकार एक दिन की वेतन कटौती वापस नहीं लेती और पीजी डॉक्टरों को पूरा वेतन नहीं दिया जाता तब तक डॉक्टर आंदोलन करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार डॉक्टरों की लगातार अनदेखी कर रही है और मजबूरन डॉक्टरों को ओपीडी बहिष्कार के लिए बाध्य होना पड़ रहा है।

डॉक्टरों ने बुधवार से 30 सितम्बर तक प्रस्तावित ओपीडी बहिष्कार के संदर्भ में सरकार व सभी जिलों के जिला अधिकारियों को नोटिस भी दे दिया है। 29 सितम्बर को गांधी अस्पताल में फिर बैठक होगी जिसमें आगे आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी। बैठक में डॉ मेघना असवाल, डॉ एसएन सिंह, डॉ प्रताप रावत, डॉ प्रवीण पंवार, डॉ पीयूष त्रिपाठी, डॉ आशुतोष भरद्वाज सहित अनेक डॉक्टर मौजूद थे। 

कोरोना से सबंधित सभी कार्य किए जाएंगे
पीएमएचएस की ओर से जिला शाखाओं को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि अस्पतालों में सिर्फ ओपीडी का बहिष्कार किया जाएगा। इसके अलावा डॉक्टर सभी कार्य करेंगे। संघ की ओर से लिखा गया है कि कोरोना रोगियों एवं डॉक्टरों के प्रति सरकार असंवेदनशील हो सकती है।

लेकिन डॉक्टर ऐसा नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद भी मांगों पर कार्रवाई न होना दुखद है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर कोरोना आपदा से संबधित सभी कार्य करेंगे। इसके अलावा मेडिकोलीगल, पोस्टमार्टम, सर्जरी, आईपीडी, इमरजेंसी के कार्य सुचारी रूप से किए जाएंगे। कोरोना जुड़े सैंपलिंग व अन्य सभी कार्य किए जाएंगे। 

मरीजों को राहत, डॉक्टरों का आंदोलन स्थगित
देहरादून।
राज्य के सरकारी डॉक्टरों ने बुधवार से प्रस्तावित ओपीडी बहिष्कार टाल दिया है। मंगलवार देर सांय सचिव स्वास्थ्य के साथ हुई वार्ता के बाद डॉक्टरों ने आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया। इससे सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को बड़ी राहत मिल गई है। 

प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा संघ की ओर से ओपीडी बहिष्कार के ऐलान के बाद मंगलवार देर सांय सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी ने स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ अमिता उप्रेती को आपात स्थित से निपटने की रणनीति तैयार करने के लिए सचिवालय बुलाया। इस दौरान दोनों के बीच डॉक्टरों की हड़ताल से उपजने वाले हालातों पर चर्चा की गई।

इस बीच सचिव की ओर से पीएमएचएस के पदाधिकारियों को भी वार्ता का न्यौता दिया गया। सचिव ने पीएमएचएस के पदाधिकारियों को वेतन कटौती बंद करने और पीजी डॉक्टरों को पूरा वेतन देने की लिखित सहमति का पत्र दिया और ओपीडी बहिष्कार को वापस लेने का अनुरोध किया।

उन्होंने कहा कि देश में उपजी विपरीत परिस्थतियों को देखते हुए हड़ताल का कदम उचित नहीं होगा। सचिव ने कहा कि डॉक्टरों की मांगों के संदर्भ में अधिकारियों को पत्रावलियां प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इस पर डॉक्टरों ने आंदोलन को स्थगित करने का निर्णय लिया। पीएमएचएस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ नरेश नपल्च्याल, महामंत्री डॉ मनोज वर्मा ने कहा कि सचिव के लिखित आश्वासन के बाद आंदोलन को स्थगित करने का निर्णय लिया गया है और डॉक्टर बुधवार को ओपीडी में कार्य करेंगे। 

मरीजों को राहत 
इससे पहले डॉक्टरों की मंगलवार को गांधी अस्पताल में आपात बैठक हुई जिसमें बुधवार से ओपीडी बहिष्कार का फैसला लिया गया था। डॉक्टरों ने सरकार पर असंवेदनशील होने का आरोप लगाते हुए कहा था कि चौबीस घंटे काम करने के बावजूद उनका वेतन काटा जा रहा है। डॉक्टरों के इस फैसले से मरीजों की मुश्किल बढ़ गई थी। लेकिन अब हड़ताल स्थगित होने से मरीजों को बड़ी राहत मिल गई है। 

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  • Web Title:government doctors to boycott opd services in government hospital against bjp led state government in uttarakhand