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शिक्षा विभाग में आंदोलन और हड़तालों पर पहली बार कड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने एस्मा के तहत कार्रवाई करने का मन बनाया

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शिक्षा विभाग में आंदोलन और हड़तालों पर पहली बार कड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने एस्मा के तहत कार्रवाई करने का निर्णय किया है। 21 जुलाई से दो अगस्त तक आंदोलन पर रहे राजकीय शिक्षक संघ के पदाधिकारियों के खिलाफ आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (एस्मा) के तहत कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं। शिक्षक संघ के 147 सदस्य इसके दायरे में हैं। इसके साथ ही ड्यूटी ज्वाइन करने के आदेश के बावजूद शिक्षा निदेशालय में आंदोलन पर बैठे शिक्षा मित्रों की बर्खास्तगी के प्रस्ताव पर शिक्षा मंत्री ने हस्ताक्षर कर दिए। राज्य गठन के बाद यह पहला मौका है जब सरकार ने शिक्षा विभाग में आंदोलनों पर सख्त रुख अख्तियार किया है। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने शिक्षा निदेशक आरके कुंवर को आंदोलन और निदेशालय-जिला कार्यालयों में तालांबदी करने वाले शिक्षकों को चिह्नित कर तत्काल कार्रवाई शुरू करने को कहा है। दूसरी तरफ, शिक्षा मंत्री ने ड्यूटी ज्वाइन करने के आदेश के बावजूद आंदोलन कर रहे शिक्षा मित्रों को बर्खास्त करने के निर्देश भी जारी कर दिए। शिक्षा निदेशक कुंवर ने बताया कि शिक्षकों के आंदोलन के दौरान तक विभाग में एस्मा लागू था। शिक्षा मंत्री के निर्देश पर सभी मंडलीय अपर निदेशक और सीईओ को चिह्नित शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दे दिए गए हैं। शिक्षा मित्रों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है।
वहीं शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने कहा उत्तराखंड की छवि देश भर में हड़ताली प्रदेश के रूप में बन गई है। इस राज्य के गठन में शिक्षक-कर्मचारियों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है। उनसे अपेक्षा की जाती है कि वो राज्य के विकास में योगदान करें, न कि हड़ताल। कम से कम वर्तमान सरकार प्रदेश को हड़ताली प्रदेश नहीं बनने देगी।
क्या हो सकती है कार्रवाई
एस्मा के तहत सरकार हड़ताल आंदोलन पर प्रतिबंध लगा सकती है। इसमें बिना वारंट के ही हड़ताली लोगों को गिरफ्तार किया जा सकता है। इसमें आरोपी पर ढाई सौ रुपये तक जुर्माना या छह महीने की कैद या फिर दोनों की सजा दी जा सकती हैं। 

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  • Web Title:government can take tough action against agitated teachers