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Lok Sabha Election Result 2019 : पूर्व सीएम हरीश रावत की सबसे बड़ी हार

harish rawat file photo

राजनीतिक पंडित उत्तराखंड की जिस अकेली सीट पर कांग्रेस की जीत का अनुमान लगा रहे थे, उसमें कांग्रेस की सबसे बड़ी हार हुई। पार्टी के सबसे बड़े नेता हरीश रावत को नैनीताल सीट पर तीन लाख उन्तालिस हजार से भी ज्यादा मतों से हार का सामना करना पड़ा। रावत के राजनीतिक करिअर की यह सबसे बड़ी हार है और इस चुनाव में उत्तराखंड की पांचों सीटों में वे सबसे ज्यादा अंतर से पराजित हुए हैं। हार का यह रिकार्ड उनके सियासी भविष्य पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
हरीश रावत 1980 में पहली बार अल्मोड़ा सीट जीतकर संसद पहुंचे। वे इस सीट पर लगातार तीन बार जीते। 1991 की राम लहर में हार की शुरूआत हुई और लगातार चार चुनाव हारे और 2004 में उनकी पत्नी भी हार गईं। 2009 में हरिद्वार आकर उन्होंने फिर से जीत की शुरूआत की और सांसद बने। हरिद्वार से ही 2014 में उनकी पत्नी रेणुका रावत बड़े अंतर से पूर्व मुख्यमंत्री निशंक से चुनाव हार गईं। इसीलिए रावत दोबारा हरिद्वार से चुनाव लड़ने से कतरा रहे थे और नैनीताल को ज्यादा मुफीद मानकर वहां चले गए। 2017 में रावत मुख्यमंत्री रहते हुए हरिद्वार ग्रामीण और किच्छा दो सीटों से विधानसभा चुनाव लड़े और दोनों सीटों पर हार गए। उनकी और उनकी पत्नी की हार जोड़ें तो यह उनकी नौवीं हार हो चुकी है। नैनीताल-यूएसनगर सीट पर करारी हार ने पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को बड़ा झटका लगा है। अपेक्षाकृत अधिक अनुकूल हरिद्वार लोकसभा सीट को छोड़कर नैनीताल के मैदान में आना रावत के लिए नुकसानदेह साबित हुआ।   दरअसल, नैनीताल सीट का टिकट रावत ने पार्टी से लड़-भिड़ कर लिया था। हाईकमान और प्रदेश नेतृत्व उन्हें हरिद्वार से मैदान में उतारने के पक्ष में था। पर, रावत नैनीताल पर ही अड़े थे। रावत के समर्थक विधायकों ने भी एक दिन दिल्ली में डेरा तक डाल दिया था।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के लिए चुनौतियों का दौर शुरू
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के लिए आत्म मंथन का दौर शुरू हो गया है। गंभीर बात यह भी है कि लोकसभा चुनाव में प्रदेश में सत्ताधारी दल की पांचों सीट पर हार की परंपरा रही है।  पर, इस चुनाव में भाजपा सत्ता में रहते हुए भी पांचों सीट भारी मार्जन के साथ जीती है। इसका ठीकरा प्रीतम के सिर ही आना है। निकाय चुनाव में कुछ बेहतर प्रदर्शन कर प्रीतम ने जो उम्मीद बंधाई थी, वो लोस चुनाव में पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है। खुद प्रीतम बड़े मार्जन से हारे हैं।
 

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  • Web Title:former chief minister harish rawat faces defeat in lok sabha election 2019 in uttarakhand