follow traffic rules strictly to avoid traffic penalty under new motor vehicle act - हिन्दुस्तान संवाद: मोटर व्हीकल ऐक्ट से डरने की जरूरत नहीं, नियमों का करें पालन: VIDEO DA Image

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हिन्दुस्तान संवाद: मोटर व्हीकल ऐक्ट से डरने की जरूरत नहीं, नियमों का करें पालन: VIDEO

मोटर व्हीकल ऐक्ट में किए गए बदलाव के बाद लोगों में यातायात नियमों के पालन को लेकर कई तरह के भ्रम हैं। दूसरी तरफ चालान काटे जाने को लेकर भय का माहौल बना हुआ है। प्रदूषण जांच के लिए केंद्रों पर रात से ही लंबी लाइनें लग रही है, वहीं, प्रदेश में ट्रांसपोर्टर हड़ताल पर चले गए हैं। इन हालात के बीच आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान की ओर से बुधवार को नए मोटर व्हीकल ऐक्ट को लेकर संवाद का आयोजन किया गया। 

हिन्दुस्तान कार्यालय में आयोजित संवाद में परिवहन, पुलिस अधिकारी और समाज के विभिन्न वर्गों के लोग मौजूद रहे। अधिकांश लोगों ने नए ऐक्ट का स्वागत किया। उनका कहना था कि सरकार ने नियम हमारी सुरक्षा के लिए बनाए हैं, हमें उनका पालन करना चाहिए। कुछ व्यवहारिक परेशानियां हैं वह दूर होनी चाहिए। ऐक्ट में किए गए कड़े प्राविधानों से लोग यातायात नियमों का पालन करेंगे और सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी। कुछ लोगों ने जुर्माना की दरों में राहत देने की मांग उठाई। उत्तराखंड परिवहन महासंघ के महासचिव सत्यदेव उनियाल ने कहा कि ओवरलोडिंग समेत कुछ अभियोगों में जुर्माने की राशि बहुत ज्यादा बढ़ाई गई है। उत्तराखंड पर्वतीय राज्य है। परिवहन लोगों का प्रमुख रोजगार है, लेकिन जुर्माने की राशि बढ़ने से वाहनों का संचालन करना मुश्किल हो जाएगा। राज्य सरकार को जुर्माना कम करना चाहिए। भाजपा नेता सचिन गुप्ता ने नए ऐक्ट को जनहित में बताया। कहा कि यातायात नियमों के पालन के लिए सख्ती करना जरूरी है। कांग्रेस नेता महेश जोशी ने इसे काला कानून बताया। कहा कि कानून पहले से था, लेकिन सरकार ट्रैफिक नियमों का पालन करवाने में फेल हो रही है। इसलिए जुर्माने की दरें दस गुना बढ़ाई गई। 

मौके पर वाहन के कागज नहीं तो घबराने की जरूरत नहीं : सीओ 
नये मोटर व्हीकल ऐक्ट से डरने की जरूरत नहीं है। यदि चेकिंग के दौरान आपके पास वाहन का एक भी कागज नहीं है और चेकिंग में 20 हजार का चालान और गाड़ी भी सीज हो जाती है तो घबराने की जरूरत नहीं है। वाहन के कागज दिखाने का मौका मिलता है। तय समय में सभी कागज दिखाने पर न्यूनतम जुर्माना या जुर्माना लगाने का अधिकार होता है। सीओ ट्रैफिक राकेश देवली ने कहा कि नए ऐक्ट में जुर्माने की जो दर्रें तय की गई वह अभी राज्य में लागू नहीं हुई। अधिकांश युवा हेलमेट नहीं पहनते। चालान करने पर उनके अभिभावक भी विरोध करते हैं। अभिभावक अपने बच्चों को हेलमेट के साथ संस्कार भी दें। अधिकांश सड़क दुर्घटनाओं में अधिकांश लोगों की मौत ओवर स्पीड और हेलमेट नहीं लगाने से हुई है। 

 

एमवी ऐक्ट पर बोले लोग

एक्ट में भारी जुर्माने का प्रावधान सही नहीं है। पर्वतीय राज्य में वाहन चालकों को सीजनल काम मिलता है। ऐसे में जुर्माने से उन पर अतिरिक्त भार पड़ेगा। राज्य सरकार को राहत देनी चाहिए।
-सत्यदेव उनियाल, महासचिव, उत्तराखंड परिवहन महासंघ 

कानून में बदलाव लोगों की सुविधा के लिए हुआ है। शुरुआत में दिक्कत होती है। जुर्माना राशि घटनी चाहिए। 
-कमल देवराड़ी, उपाध्यक्ष हमारा उत्तराखंड मंच

नियम जनता की सुविधा के लिए ही बनते हैं। नियमों का पालन किया जाए तो जुर्माना भरने की नौबत ही नहीं आयेगी। बदलाव को लेकर जागरूकता जरूरी है। 
-स्वराज, जनजागरण अभियान समिति। 

जुर्माना बढ़ाना समस्या का हल नहीं है। युवाओं को नियमों के बारे में समझाया जाना चाहिए। टैक्स में राहत मिलनी चाहिए। 
-प्रमोद नौटियाल, अध्यक्ष दून-गढ़वाल टैक्सी यूनियन

मोहर व्हीकल एक्ट में संशोधन सही है, लेकिन जुर्माना राशि ज्यादा बढ़ा दी गयी है। लापरवाही से गाड़ी चलाने पर ही चालान होना चाहिए। 
-संजीव शर्मा, अधिवक्ता 

राज्य के लिए यह काला कानून है। एक्ट लागू करने से पूर्व कोई तैयारी नहीं की गयी। पहाड़ी राज्य में हर दूसरे आदमी का रोजगार गाड़ी है। ऐसे में राहत दी जानी चाहिए।
-संदीप चमोली, प्रदेश मीडिया प्रभारी, यूथ कांग्रेस

पहाड़ में गाड़ी की सवारी क्षमता घटी है। एक सवारी अतिरिक्त बैठाने पर 20 हजार का जुर्माना लगाया जा रहा है। यह गलत है, इसमें संशोधन होना चाहिए। 
-प्रदीप रावत, मैक्सी कैब संगठन

एमवी एक्ट में संशोधन के जरिये सरकार ने व्यवस्था बनाने का प्रयास किया है। प्रत्येक आदमी नियमों का पालन करें तो चालान क्यों कटेगा। 
-सचिन गुप्ता, प्रदेश उपाध्यक्ष भाजयुमो 

बल्लूपुर से विकासनगर के बीच आईएमए रेड लाईट की समस्या है। इसके अलावा प्रेमनगर, विकास नगर की ओर बसें लापरवाही से दौड़ती है। इन पर ध्यान दिया जाना चाहिए। 
रसिक भाटिया, रोटरी क्लब

ये सरकार का तुगलकी फरमान है। जनता के पैसे पर डकैती है। चालान की राशि बढ़ाना समस्या का हल नहीं है। चालान की राशि बढ़ाना हल नहीं है, कानून का कड़ाई से पालन होना चाहिए। 
-महेश जोशी, प्रदेश कांग्रेस कमेटी

कानून तो पहले से था, संशोधन हुआ है। ज्यादातर सड़क दुर्घटनाएं सड़कों में गड्ढों की वजह से  होती हैं। इस ओर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। 
-अकित तोमर, अधिवक्ता

विकसित देश के नियम विकासशील देश में सही नहीं हैं। राज्य सरकार को इसमें संशोधन करना चाहिए। छोटी गाड़ी वाले को परेशान किया जाता है। बड़ी गाड़ी वाले बच निकलते हैं। 
-रविंद्र आनंद, सामाजिक कार्यकर्ता 

नियमों का सालभर पालन होना चाहिए। चार दिन सख्ती होती है, फिर हाल बेहाल हो जाते हैं। स्कूल में छात्रों के लिए साइकिल का प्रावधान होना चाहिए। 
-विरेंद्र रावत, खेल प्रशिक्षिक 

कानून गलत नहीं है। हमारे हित के लिए ही है। कानून का पालन किया जाएगा, तो कोई चालान नहीं कटेगा। जागरूकता के अभाव के चलते ही भ्रम की स्थिति है। 
-माधव चौहान, छात्र, एलएलबी

एक्ट में एम्बुलेंस को रास्ता नहीं देने पर चालान का प्रावधान है। जबकि यह हमारी नैतिक जिम्मेदारी है कि हमें एम्बुलेंस को रास्ता देना चाहिए। 
-स्नेह भूषण, छात्र  एलएलबी


 

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