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पहली हिन्दी मासिक पत्रिका 'सरस्वती' आज भी महात्मा खुशीराम पुस्तकालय में मौजूद

Saraswati magzine

वसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। ऐसे में मां सरस्वती का गुणगान इस अवसर को अधिक प्रभावशाली बनाता है। कहा जाता है कि विद्या की देवी मां सरस्वती पुस्तकों में निवास करती है। पुस्तकों की बात चली है तो आप को दून शहर में स्थित ऐसे पुस्तकालय की बारे में कुछ जानकारी देते हैं जो करीब 98 सालों से निरंतर विभिन्न श्रेणियों के पाठकों के लिए अपनी सेवाएं प्रदान कर रहा है। गांधी रोड स्थित महात्मा खुशीराम पुस्तकालय इन्हीं में से एक है। हिंदी, अंग्रेजी सहित कई विधा की पुस्तकें यहां मौजूद हैं। खास बात यह है कि वर्ष 1914 में महावीर प्रसाद द्विवेदी द्वारा संपादित सरस्वती मासिक पत्रिका आज भी इस पुस्तकालय में पढ़ने को मिलती है।

लाईब्रेरियन पितांबर जोशी बताते है कि 4 अक्टूबर 1921 को रिटायर पोस्टमास्टर खुशी राम ने लाईब्रेरी की स्थापना की थी। खुशीराम पुस्तकालय में मौजूदा समय में करीब 50 हजार से अधिक रोचक, साहित्यक, कथा कहानियों और उपन्यास साहित्य से जुड़ी पुस्तकें सभी को पढ़ने के लिए उपलब्ध हैं। वहीं मौजूदा समय में 450 मेंबर रजिस्टर्ड है। इनमें से 40 से 50 लोग रोजाना लाईब्रेरी पहुंचते है। लाईब्रेरी अध्यक्ष विजय बंसल बताते है महात्मा खुशीराम पुस्तकालय प्रदेश का सबसे पुराना पुस्तकालय है। 

बसंत पंचमी: बिना मुहूर्त होंगे मांगलिक कार्य

चारों वेदों के साथ चित्रमय श्रीमदभागवत गीता भी है मौजूद

लाईब्रेरी में ऋगवेद, अर्थर्वेद, सामवेद,यजुर्वेद के साथ ही फोटोयुक्त श्रीमदभागवत गीता भी उपलब्ध है। लाईब्रेरियन पितांबर जोशी बताते है कि चारों वेद किसी ओर लाईब्रेरी में मुश्किल से मिलती है। 

वसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा का महत्व

आचार्य डा. रमेश पांडेय बताते है कि कि हिंदू धर्म में मां सरस्वती को विद्या और बुद्धि की देवी माना गया है। इसलिए छात्र बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की विशेष पूजा अर्चना करते है। वहीं कुछ लोग इस अपने अपने छोटे बच्चों को पहला अक्षर लिखाना भी सिखाते है। इसके साथ ही प्राचीन मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने मां सरस्वती से खुश होकर उन्हें वरदान दिया था कि बसंत पचंमी के दिन उनकी आराधना की जाएगी। तब से लेकर हर साल बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती के पूजन की परंपरा चली आ रही है। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि इस दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था।

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  • Web Title:First Hindi monthly magazine Saraswati still available in Mahatma khushi ram Library