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8 अगस्त, 2020|2:53|IST

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छात्रवृत्ति घोटाले में 07 संस्थानों के खिलाफ मुकदमा

uttarakhand scholarship scam

छात्रवृत्ति घोटाले में एसआईटी ने हरिद्वार में सात संस्थानों के खिलाफ अलग-अलग मुकदमे दर्ज कराए हैं। इनमें चार मुकदमे सिडकुल, एक बहादराबाद, एक कनखल और एक लक्सर में दर्ज कराया गया है। इन सभी संस्थानों को छात्रवृत्ति के नाम पर छह साल में 31 करोड़ रुपये से ज्यादा दिए गए। आरोप है कि इन सभी संस्थानों ने फर्जी दाखिले दिखाकर समाज कल्याण विभाग से मिली छात्रवृत्ति हड़प ली। पुलिस ने मामले दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एसआईटी इंचार्ज मंजूनाथ टीसी के मुताबिक, हरिद्वार के अलावा बाहरी राज्यों ने भी हरिद्वार के बच्चों का अपने कॉलेज में दाखिला दिखाकर करोड़ों रुपये हड़पे हैं। सोमवार को एसआईटी ने सिडकुल में त्रिवेणी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एजुकेशन, बागपत, मेरठ, अभिनव सेवा संस्थान महाविद्यालय राजीवपुरम, कानपुर, कृष्णा प्राइवेट आईटीआई विलेज कमालपुर, छुटमलपुर, सहारनपुर और मिलेनियम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी सहारनपुर के खिलाफ केस दर्ज कराया है। ये सभी मुकदमे सिडकुल में दर्ज कराए गए हैं। 

इन चारों कॉलेजों को सिडकुल स्थित समाज कल्याण विभाग के मुख्यालय से ही छात्रवृत्ति जारी की गई थी। वहीं कनखल में जगजीतपुर स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, बहादराबाद में सिंघानिया यूनिवर्सिटी पिलानी, झुंझनू राजस्थान और हेमलता इंस्टीट्यूट निकट क्रिस्टल वर्ल्ड के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। एक अन्य मुकदमा लक्सर में कृष्णा इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट स्टडीज (केआईएमटी) पर दर्ज कराया गया है।


2012 से 2017 के दौरान करोड़ों का घोटाला
उत्तराखंड में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान छात्रवृत्ति घोटाला हुआ। अनुमान है कि वर्ष 2012 से 2017 के दौरान छात्रवृत्ति बांटने के नाम पर तमाम कॉलेजों की मिलीभगत से लगभग पांच सौ करोड़ रुपये के घोटाले को अंजाम दिया गया। खासबात ये है कि इस दौरान समाज कल्याण विभाग के अफसरों ने उत्तराखंड के अलावा भी कई प्रदेशों के कॉलेजों के बच्चों को भी छात्रवृत्ति दे दी। यह पैसा बच्चों के खातों में गया या नहीं अथवा जिन कॉलेजों को छात्रवृत्ति आवंटित की गई, वे वास्तव में हैं या नहीं, अफसरों ने इसकी भी कोई जांच-पड़ताल नहीं की। इस मामले में एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए नैनीताल हाईकोर्ट ने सरकार को जांच के लिए एसआईटी गठित करने के आदेश दिए थे। इसके बाद एसआईटी मामले की जांच में जुटी है। अब तक 16 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। इनमें कुछ विभागीय अधिकारियों के साथ ही रुड़की तथा हरिद्वार क्षेत्र में संचालित निजी कॉलेजों के प्रबंधक और प्रधानाचार्य शामिल हैं। 

इन संस्थाओं को मिला पैसा
त्रिवेणी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एजुकेशन बागपत, मेरठ     12.14 करोड़
मिलेनियम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी सहारनपुर    6.69 करोड़
अभिनव सेवा संस्थान महाविद्यालय राजीवपुरम, कानपुर    5.48 करोड़
कृष्णा प्राइवेट आईटीआई विलेज कमालपुर छुटमलपुर सहारनपुर    5.42 करोड़
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी जगजीतपुर कनखल    50 लाख
हेमलता इंस्टीट्यूट, बहादराबाद/सिंघानिया यूनिवर्सिटी पिलानी, झुंझनू     50 लाख
कृष्णा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज     47.59 लाख 

फर्जी संस्थाओं को 50-50 लाख
लक्सर। पांच सौ करोड़ रुपये के इस घोटाले में शामिल समाज कल्याण विभाग के अफसरों ने सरकारी पैसा उड़ाने में हद पार कर दी। उन्होंने न तो रकम जारी करने से पहले संस्थानों का सत्यापन किया और न ही बाद में कोई जांच की। लक्सर और कनखल में जिन संस्थाओं को पचास-पचास लाख रुपये दिए गए, हकीकत में उनका अता-पता ही नहीं है। लक्सर में कृष्णा इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी को विभाग ने पचास लाख रुपये जारी किए थे, असलियत में इस नाम की कोई संस्था ही नहीं है। विभाग के पास उसका पता- मुखिया कॉम्लेक्स, हरिद्वार रोड, लक्सर दर्ज है। जबकि मुखिया कॉम्लेक्स के मालिक चौधरी हुकम सिंह मुखिया ने बताया कि उनके यहां इस नाम की न तो कोई संस्था है और न ही कभी थी। समाज कल्याण विभाग के कागजों में गलत तौर पर उनके भवन का पता लिखवाया गया है।

उधर कनखल में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, जगजीतपुर के नाम पर 50 लाख रुपये दिए गए। जांच के दौरान एसआईटी को मौके पर यह कॉलेज नहीं मिला। आईटीआई के खिलाफ पहला मुकदमा: सोमवार को कृष्णा प्राइवेट आईटीआई विलेज कमालपुर, छुटमलपुर, सहारनपुर और बहादराबाद में सिंघानिया यूनिर्वसिटी पिलानी झंुझनू, राजस्थान, हेमलता इंस्टीट्यूट निकट क्रिस्टल वर्ल्ड के खिलाफ केस दर्ज हुआ है। इस घोटाले में आईटीआई संचालकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का यह पहला मामला है। बहादराबाद स्थित हेमलता इंस्टीट्यूट को वर्ष 2013-2014 में 50 लाख की छात्रवृत्ति दी गई। बच्चों ने एक बार सहारनपुर में परीक्षा भी दी पर जब दूसरे साल पहुंचे तो कॉलेज नहीं था। बच्चों को पहले ही बताया गया था कि उन्हें सिंघानिया यूनिवर्सिटी के नाम के कागजात दिए जाएंगे। 


 

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  • Web Title:fir registered against seven educational institutions for alleged role in scholarship scam in uttarakhand