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रिश्तों पर भी भारी पड़ रहा है कोरोना का असर, टूट रहे हैं कई परिवार 

हिन्दुस्तान टीम, हल्द्वानी। पुष्कर अधिकारीPublished By: Himanshu Kumar Lall
Mon, 14 Sep 2020 12:04 PM
रिश्तों पर भी भारी पड़ रहा है कोरोना का असर, टूट रहे हैं कई परिवार 

कोरोना का असर रिश्तों पर भी भारी है। इसका अंदाजा महिला ऐच्छिक ब्यूरो में बढ़ रही शिकायतों से लगाया जा सकता है। छह माह में करीब 180 परिवारों पर बीमारी से ज्यादा परिवार टूटने का खतरा है। इसमें सर्वाधिक केस 2018-19 की शादियों के हैं। लॉकडाउन में पति का काम छूटते ही पत्नियां खर्च न मिलने की दलील दे साथ छोड़ रही हैं।

कोरोना के चलते वर्तमान में कंपनियों के कर्मचारियों को निकालने से जिले के 180 परिवार टूटने की कगार पर पहुंच चुके हैं। हल्द्वानी कोतवाली स्थित महिला ऐच्छिक ब्यूरो के रिकार्ड मुताबिक यहां जून से अब तक 180 से अधिक मामले आ चुके हैं। इसमें 60 फीसदी महिलाएं सशर्त घर लौटने को मान गईं। मगर पति की नौकरी लगने के बाद ही सुसराल आएंगी।

इसके अलावा कुछ महिलाओं ने यह बहाना ढूंढ लिया है कि जब कोरोना महामारी ठीक हो जाएगी, तब वे ससुराल जाएंगी। इसके अलावा शेष बची महिलाएं कोर्ट की शरण में जाकर पति से खर्चा लेने की बात कहकर चली गईं, जिसमें मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इसके अलावा अभी करीब 50 केस नए आए हैं जो पेंडिंग पड़े है, उन्हें तारीख देकर बुलाया गया है।

2018-2019 में शादी करने वालों की ज्यादा शिकायतें
महिला ऐच्छिक ब्यूरो के अनुसार वर्ष 2018-2019 में जिनकी शादी हुई, उनकी ज्यादा शिकायतें हैं। शादी के बाद घूमने आदि के सपने लेकर आई महिलाओं का रास्ता कोरोना ने बंद कर दिया है। नौकरी जाने से दुखी पति पर दोहरी मार है। महिलाएं अलग होने के लिए हेल्पलाइन और थानों में तहरीर दे रही हैं। बच्चों वाली महिलाएं भी लॉकडाउन में ससुराल से ज्यादा मायके में रुचि दिखा रही हैं। 

लॉकडाउन में महिलाओं की शिकायत है कि पति की नौकरी जाने से खर्चा नहीं मिल रहा है, इसलिए अलग होना है। ब्यूरो का कर्तव्य है कि झगड़े निपटाकर घर बसाया जाए। नहीं मानता है तो केस दर्ज करते हैं।
विजया, प्रभारी, महिला ऐच्छिक ब्यूरो हल्द्वानी 

 

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