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हिन्दुस्तान एक्सक्लूसिव: सिपाहियों को बंदूकें तो दे दीं पर गोलियां नहीं दीं- कैसे करेंगे शराब तस्करों से सामना जब किसी भी सर्किल में वाहन नहीं

जहरीली शराब कांड को लेकर विधानसभा से लेकर सड़कों तक इन दिनों भूचाल मचा है, लेकिन विभाग की असलियत क्या है इस पर किसी ने गौर नहीं किया। आबकारी सिपाहियों को बंदूकें तो थमा दी गई, लेकिन चार साल से उन्हें गोलियां तक नहीं दी गईं, आखिर ये कैसे शराब तस्करों का सामना कर पाएंगे?
हरिद्वार जनपद में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के बाद राजनीतिक दल मौके भुनाने में पीछे नहीं हैं, लेकिन विभाग की गहराई से कोई पड़ताल करने का नाम नहीं ले रहा है। कांग्रेस या फिर भाजपा सरकारें दोनों ही इसके लिए भी कम दोषी नहीं हैं। शराब तस्करों से मुकाबले को चार साल पहले 19 सर्किलों में एक-एक सिपाहियों को बंदूकें तो दे दी, लेकिन तब से आज तक इन्हें गोलियां तक नहीं मिली। स्थिति यह भी है कि राज्य में 43 सर्किलों और 13 चेक पोस्टों में कर्मचारियों के पास सरकारी वाहन तक नहीं हैं। ऐसे में अवैध शराब पर लगाम लगाना एक तरह से बेईमानी जैसा ही है। 

न कभी ट्रेनिंग दी 
आबकारी सिपाहियों को गोलियां चलाने की अभी तक ट्रेनिंग नहीं दी गई। ऐसे में वे कैसे अपराधियों पर निशाना साध पाएंगे। इंस्पेक्टरों को जब रिवाल्वर उपलब्ध कराई गई थी, उन्हें तो ट्रेनिंग दी गई पर सिपाहियों को ट्रेनिंग देना भी विभाग भूल गया।   

गोलियों को क्लेम नहीं किया 
कुछ सर्किलों में आबकारी इंस्पेक्टरों को भी रिवाल्वर तो उपलब्ध हैं, लेकिन उन्होंने भी कभी गोलियों के लिए क्लेम नहीं किया। अजब स्थिति यह है कि किसी इंस्पेक्टर का स्थानांतरण होने पर वे रिवाल्वर भी अपने साथ ही ले जाते हैं। ऐसे में कई बार ऐसी स्थितियां बन आती हैं कि महत्वपूर्ण सर्किलों में उन इंस्पेक्टरों की तैनाती कर दी जाती है, जिनके पास रिवाल्वर तक नहीं होते।

शुरू में जब हथियार दिए होंगे तो तब कार्टेज तो मिली ही होंगी। जब फील्ड से कोई डिमांड ही नहीं आएगी तो कार्टेज कैसे दे सकते हैं। रिकार्ड देखने के बाद ही बताया जा सकता है कि कब से कार्टेज नहीं मिले हैं। 
पीएस गब्र्याल, अपर आयुक्त, प्रवर्तन 

 

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  • Web Title:excise constable were given rifles without cartridges in uttarakhand