engineers to face heat if drinking water schemes get dysfunctional in uttarakhand - पेयजल योजना खराब हुई तो इंजीनियरों से वसूली DA Image
12 नबम्बर, 2019|4:24|IST

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पेयजल योजना खराब हुई तो इंजीनियरों से वसूली

नानघाट, बीरोंखाल, आवंलाघाट समेत तमाम पेयजल योजनाओं में घपले, घोटाले, अनियमितताएं सामने आने से जल निगम की साख को बट्टा लगा। 50 से 90 करोड़ तक की भारी भरकम योजनाएं तैयार किए जाने के बाद भी आम लोगों को तय पानी नहीं मिल पाया। अब भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियां सामने आने पर नुकसान की वसूली योजना से जुड़े इंजीनियरों से ही होगी। योजनाओं में अलग-अलग स्तर पर गड़बड़ियों के लिए वसूली का अलग अलग प्रतिशत तय किया गया है।

गलत एस्टीमेट, डिजाइन पर ईई से 50% वसूली होगी: योजना का गलत एस्टीमेट, डिजाइन तैयार होने पर जेई से 20%, एई से 30 प्रतिशत और ईई से 50 प्रतिशत वसूली होगी। जिन योजना की मंजूरी एसई स्तर से होती है, उनमें जेई से 20, एई से 30, ईई से 30 और एसई से 20 प्रतिशत वसूली होगी। मुख्य अभियंता से योजना मंजूर होने पर जेई से 20,एई व ईई से 30, एसई और मुख्य अभियंता से 10 प्रतिशत वसूली होगी। निर्माण में गड़बड़ी पर ठेकेदार से 50 प्रतिशत वसूली होगी: योजना का निर्माण पूरा होने व कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र जारी किए जाने के बाद अनुबंध की डिफेक्ट लाइबिलिटी अवधि के भीतर ठेकेदार से 50 प्रतिशत, जेई से 25,एई से 17.50, ईई से 7.50 प्रतिशत वसूली होगी। डिफेक्ट लाइबिलिटी अवधि गुजरने पर जेई से 50, एई से 35 व ईई से 15 प्रतिशत वसूली होगी।


डिप्लोमा महासंघ ने खोला मोर्चा
जल निगम डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ ने वसूली की इस व्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अध्यक्ष रामकुमार ने जवाबदेही तय किए जाने में भेदभाव का आरोप लगाया। कहा कि योजना के हर स्तर पर सिर्फ जेई की ही जवाबदेही तय की गई है। जेई से ही 50 प्रतिशत वसूली करते हुए शेष बड़े अफसरों की भूमिका बेहद सीमित कर दी गई है। चीफ और एमडी को एक तरह से पूरी तरह छोड़ दिया गया है। बड़े कांट्रेक्ट उच्चस्तर पर ही तय होते हैं। इस अव्यवस्था के खिलाफ आवाज बुलंद होगी।

गलत स्रोत चयन पर जेई से 50 प्रतिशत वसूली
योजना में पानी के गलत फ्लो की जांच, स्रोत के चयन, एलाइमेंट, सर्वे गलत होने की स्थिति में जेई, अपर सहायक अभियंता से 50 प्रतिशत, एई से 35 प्रतिशत व ईई से 15 प्रतिशत वसूली होगी।

ये व्यवस्था सभी इंजीनियरिंग विभागों में है। जल निगम में ऐसी कोई तय प्रक्रिया अभी तक निर्धारित नहीं थी। इसके कारण योजना में गड़बड़ी पाए जाने पर वसूली के प्रकरणों का निस्तारण किए जाने में दिक्कत पेश आती है। जवाबदेही तय होने से ये दिक्कतें दूर हो जाएंगी। 
अरविंद सिंह हयांकी, सचिव पेयजल

 

 

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