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16 जुलाई, 2020|7:19|IST

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उत्तराखंड में हाथियों की संख्या बढ़कर पहुंची 2026, स्नो-लैपर्ड की जनसंख्या का भी होगा आंकलन

बाघ के बाद अब हाथियों के संरक्षण में भी प्रदेश ने पिछले तीन सालों में अच्छा काम किया है। इस साल हुई गणना में प्रदेश में कुल 2026 हाथी पाए गए। जबकि 2017  में ये संख्या 1839 थी। यानी तीन सालों में 187 हाथी बढ़ गए हैं।

सोमवार को स्टेट वाइल्डलाइफ बोर्ड की बैठक के दौरान गणना के रिजल्ट घोषित किए गए। वन मंत्री डा. हरक सिंह ने बताया कि प्रदेश में इस बार प्रदेश में 2026 हाथी पाए गए।

जो कि 2017 की गणना से 187 ज्यादा है। वन मंत्री के अनुसार अभी यूपी के साथ मिलकर भी हाथियों की गणना की जानी है। जिसमें संख्या में थोड़ा बदलाव आ सकता है।

उन्होंने बताया कि इस बार भी 1224 हाथियों की संख्या के साथ कार्बेट पहले नंबर पर रहा। जबकि राजाजी में 311 और लैंसडाउन वन प्रभाग में 150 हाथी पाए गए।

इस बार पौड़ी डिवीजन और कुमाऊं के कुछ क्षेत्रों में एक हजार मीटर से ऊपर भी हाथी की उपस्थिति के निशान मिले। जिसका अध्ययन चल रहा है। ताकि ये पता लग सके कि क्या हाथी इतनी ऊंचाई पर स्थायी तौर से गए हैं या सिर्फ अस्थायी रूप से वे वहां टहलने गए।

 

प्रदेश में मिल 451 मगरमच्छ, 77 घड़ियाल
प्रदेश में पहली बार मगरमच्छ, घड़ियाल और ऊदबिलाऊ की गणना की गई। चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डल राजीव भर्तरी ने बताया कि प्रदेश भर में 451 मगरमच्छ पाए गए हैं।

जो कि रिवर्ज क्षेत्र में हैं। इसके अलावा घड़ियालों की संख्या 77 है। जबकि हाई एल्टीट्यूट में कुल 194 ऊदबिलाऊ पाए गए। इनका बेसलाइन डाटा तैयार करने के पीछे इनके संरक्षण और संवर्धन की योजना बनाने का मकसद है। 

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  • Web Title:elephant numbers increases to 2026 in census conducted by wild life institute in uttarakhand