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Hindi News उत्तराखंडबिजली बिल के नाम पर उपभोक्ताओं से धोखा, हर महीने इतने रुपयों का नुकसान

बिजली बिल के नाम पर उपभोक्ताओं से धोखा, हर महीने इतने रुपयों का नुकसान

जबकि पहले वह दो माह का बिल देते थे। विद्युत नियामक आयोग के बाद यूपीसीएल को उपभोक्ताओं को 25 से 35 दिन के बिल बनाने के निर्देश देने के बाद से अब कंपनियां मनमाने तरीके से बिल बनाने लगी हैं।

बिजली बिल के नाम पर उपभोक्ताओं से धोखा, हर महीने इतने रुपयों का नुकसान
Himanshu Kumar Lallदेहरादून, हिन्दुस्तानMon, 13 Nov 2023 12:59 PM
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यूपीसीएल-ऊर्जा निगम के  बिजली बिल के नाम पर उपभोक्ताओं को चूना लगाया जा रहा है। यूपीसीएल अनुबंधित टीडीएस कंपनी द्वारा उपभोक्ताओं को तीस दिन के बजाए 17 दिन के बिजली के बिल थमाए जा रहे हैं। उपभोक्ताओं से फिक्स चार्ज भी अधिक वसूला गया है।

मोहनपुर सब डिवीजन के प्रेमनगर क्षेत्र के उपभोक्ताओं को ऐसे ही बिल जारी किए गए। पहले तो उपभोक्ताओं को लगा कि इस बार बिल कुछ कम आया है। बाद में ध्यान से देखा तो यह सिर्फ 17 दिन का ही बिल था।

जबकि पहले वह दो माह का बिल देते थे। विद्युत नियामक आयोग के बाद यूपीसीएल को उपभोक्ताओं को 25 से 35 दिन के बिल बनाने के निर्देश देने के बाद से अब कंपनियां मनमाने तरीके से बिल बनाने लगी हैं। मोहनपुर डिवीजन में उपभोक्ता रामेश्वरी देवी के दो किलोवाट के कनेक्शन का बिल 17 दिन का बनाया गया है।

इसी तरह स्मिथनगर के एक अन्य उपभोक्ता महेश चंद्र आर्य का बिल भी सिर्फ 17 दिन में बना दिया गया। बिलिंग की इस अनियमितता के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता गीता बिष्ट ने नियामक आयोग अध्यक्ष को यूपीसीएल की संबंधित कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

उनके अनुसार उक्त कंपनी नियामक आयोग के आदेश की न सिर्फ अवहेलना कर रही है, बल्कि इससे उपभोक्ताओं को प्रत्येक बिल में चालीस से अस्सी रुपये तक अधिक फिक्स चार्ज देना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि उक्त कंपनी द्वारा बिलों की सुनवाई के लिए न तो कोई काउंटर बनाया गया न ही किसी को तैनात किया है, इसलिए उपभोक्ता बिजली दफ्तरों के चक्कर काटते रहते हैं।

उन्होंने संबंधित कंपनी पर गलत व मनमानी बिलिंग के खिलाफ अर्थ दंड लगाने की भी मांग की है। मोहनपुर डिवीजन के ईई मोहन मित्तल के अनुसार कुछ उपभोक्ताओं के कम दिनों के बिल बनने की शिकायत मिलने के बाद संबंधित कंपनी को सख्ती से निर्देश दिए गए हैं। अगली बिलिंग में सब एडजस्ट हो जाएगा। कर्मचारियों की कमी के चलते ये गड़बड़ी हुई।